सेंसेक्स 1,000 अंक टूटा, 71,600 के करीब; निफ्टी भी 350 अंक से ज्यादा फिसला
कच्चे तेल की महंगाई और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार पर दबाव, मेटल-ऑटो और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को बिकवाली का दबाव तेज हो गया। सेंसेक्स करीब 1,000 अंक टूटकर 71,600 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी भी 350 अंक से ज्यादा गिरकर 22,250 के करीब पहुंच गया। मेटल, ऑटो और रियल्टी शेयरों में निवेशकों की भारी बिकवाली देखने को मिली।
बाजार में कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी को माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जिससे भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश के लिए चिंता बढ़ी है।
बाजार पर एक साथ कई दबाव
विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण एक साथ काम कर रहे हैं। इनमें आरबीआई के रुख में बदलाव से लेकर विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली और निफ्टी के अहम तकनीकी स्तर टूटना शामिल है।
1. आरबीआई के सख्त रुख के संकेत
करीब चार साल में पहली बार दरों में बढ़ोतरी के बाद रिजर्व बैंक ने अपने रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ किया है। बाजार में इसे ब्याज दरों को लेकर सख्त संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
आशंका है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे कंपनियों की फंडिंग लागत बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव आने की चिंता बाजार में बनी हुई है।
2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल
वैश्विक बाजार में बॉन्ड की बिकवाली बढ़ने से अमेरिकी 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.71% के पार पहुंच गई है। वहीं 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड भी 5.3% से ऊपर चली गई।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए डेट मार्केट ज्यादा आकर्षक हो जाता है। इसका असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिलता है।
3. कच्चा तेल 102 डॉलर के पार
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों की खबरों के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 2% चढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
सप्लाई बाधित होने की आशंका और क्रूड इन्वेंट्री में करीब 32 लाख बैरल की कमी ने भी तेल की कीमतों को सहारा दिया है।
भारत के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है, क्योंकि इससे आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
4. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी लगातार जारी है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने करीब 6,121 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
बीते 9 कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशक करीब 57,000 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं।
FII बनाम DII निवेश
| निवेशक | आज की नेट खरीद/बिकवाली | पिछले 7 दिन | पिछले 30 दिन |
|---|---|---|---|
| DII | +₹4,597 करोड़ | +₹14,867 करोड़ | +₹80,455 करोड़ |
| FII/FPI | -₹6,121 करोड़ | -₹13,782 करोड़ | -₹69,810 करोड़ |
आंकड़े करोड़ रुपये में हैं।
5. निफ्टी के अहम सपोर्ट टूटे
बाजार में तकनीकी स्तर टूटने से भी बिकवाली का दबाव बढ़ा। एक्सिस डायरेक्ट के विश्लेषकों के मुताबिक निफ्टी का 22,500 का अहम सपोर्ट टूट चुका है।
अब बाजार में 22,300 और फिर 52-सप्ताह के निचले स्तर 22,180 की ओर जाने की आशंका जताई जा रही है।
IPO की लिस्टिंग में मिला-जुला रुख
गुरुवार को विशाल निर्मिति और नित्यास जेम्स एंड ज्वैलरी के शेयरों की बाजार में लिस्टिंग हुई। दोनों शेयरों ने अलग-अलग प्रदर्शन किया।
विशाल निर्मिति
- इश्यू प्राइस: ₹220
- NSE पर लिस्टिंग: ₹215
- BSE पर लिस्टिंग: ₹215
- लिस्टिंग करीब 2.27% डिस्काउंट पर हुई।
नित्यास जेम्स एंड ज्वैलरी
- इश्यू प्राइस: ₹75
- NSE पर लिस्टिंग: ₹80
- BSE पर लिस्टिंग: ₹82
- NSE पर करीब 6.67% प्रीमियम, जबकि BSE पर करीब 9.33% प्रीमियम पर लिस्टिंग हुई।
एशियाई बाजारों में भी दबाव
गुरुवार को प्रमुख एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली।
| इंडेक्स | स्तर | बदलाव |
|---|---|---|
| कोस्पी | 6,751 | -55 (-0.81%) |
| निक्केई | 69,373 | -662 (-0.95%) |
| हैंगसेंग | 24,047 | -84 (-0.39%) |
अमेरिकी बाजार भी कमजोर
7 अक्टूबर को अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट रही।
| इंडेक्स | स्तर | बदलाव |
|---|---|---|
| डाउ जोन्स | 51,180 | -341 (-0.66%) |
| नैस्डैक | 27,539 | -61 (-0.22%) |
| S&P 500 | 7,802 | -17 (-0.22%) |
एक दिन पहले भी बाजार में गिरावट
इससे पहले बुधवार यानी 7 अक्टूबर को भी भारतीय बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 429 अंक टूटकर 72,639 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी करीब 173 अंक गिरकर 22,603 के स्तर पर रहा।
लगातार कमजोर वैश्विक संकेतों, महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच अब बाजार की नजर आगे के कारोबारी सत्रों पर है।
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