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एमिटी में BFSI सम्मेलन 2026: बैंकिंग, बीमा और वित्तीय क्षेत्र के बदलते नियामक ढांचे पर मंथन

न्यूज़रूम डेस्क • • 5 मिनट पढ़ें
एमिटी में BFSI सम्मेलन 2026: बैंकिंग, बीमा और वित्तीय क्षेत्र के बदलते नियामक ढांचे पर मंथन

PNB के MD-CEO अशोक चंद्रा बोले- देश की आर्थिक तरक्की के साथ बैंकिंग क्षेत्र के लिए बेहतर अवसर, विशेषज्ञों ने AI, डिजिटल फाइनेंस और साइबर सिक्योरिटी की चुनौतियों पर चर्चा की

अनप्लग इंडिया। डेस्क
नोएडा। एमिटी स्कूल ऑफ इंश्योरेंस, बैंकिंग एंड एक्चुरियल साइंसेस की ओर से ‘बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, बीमा और नियामक संरचनाएं’ विषय पर BFSI सम्मेलन 2026 का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र में हो रहे बदलावों, नई तकनीक तथा बदलते नियामक ढांचे पर उद्योग विशेषज्ञों और अकादमिक जगत के बीच संवाद स्थापित करना रहा।

सम्मेलन का शुभारंभ पंजाब नेशनल बैंक के एमडी एवं सीईओ अशोक चंद्रा, एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार चौहान, PFRDA के पूर्णकालिक सदस्य रणदीप सिंह जगपाल, SEBI के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. सदानंद एस. डाटे, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डॉ. बलविंदर शुक्ला, एमिटी ग्रुप वाइस चांसलर डॉ. गुरिंदर सिंह और एमिटी स्कूल ऑफ इंश्योरेंस, बैंकिंग एंड एक्चुरियल साइंसेस के निदेशक ए.पी. सिंह ने किया।

बैंकिंग क्षेत्र के लिए मौजूदा दौर बेहतर: अशोक चंद्रा

PNB के एमडी एवं सीईओ अशोक चंद्रा ने कहा कि पिछले तीन से चार वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र में लगातार विकास हुआ है। देश की अर्थव्यवस्था में तेजी के साथ MSME, रिटेल और कॉरपोरेट सेक्टर में भी गतिविधियां बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय संस्थानों को उद्योगों की क्षमता बढ़ाने में सहयोग करना होगा।

उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को सफलता का आधार बनाने की सलाह दी। चंद्रा ने कहा कि विद्यार्थियों को जीवन में अच्छा मार्गदर्शक तलाशना चाहिए या खुद अपना मार्गदर्शक बनने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।

BFSI क्षेत्र देश के विकास की रीढ़: डॉ. अशोक चौहान

एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार चौहान ने कहा कि देश के विकास में बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, बीमा और नियामक व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज के विद्यार्थी भविष्य में देश और विदेश के संस्थानों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से सीखने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से सम्मेलन का आयोजन किया गया है। उन्होंने युवाओं से बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया।

नियामक व्यवस्था से मजबूत होता है वित्तीय क्षेत्र में भरोसा

PFRDA के पूर्णकालिक सदस्य रणदीप सिंह जगपाल ने कहा कि वित्तीय लेन-देन की बुनियाद विश्वास पर टिकी होती है और मजबूत नियामक व्यवस्था इस भरोसे को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने PFRDA और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि नियामक संस्थाओं को ग्राहक संतुष्टि, तकनीकी क्षमता और बदलती परिस्थितियों को समझने पर लगातार ध्यान देना चाहिए।

AI को खतरे की बजाय अवसर के रूप में देखें: डॉ. सदानंद डाटे

SEBI के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. सदानंद एस. डाटे ने कहा कि बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र में तकनीक तेजी से बदलाव ला रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। एक तरफ रोजगार पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता है, वहीं दूसरी ओर AI के जरिए कई मौजूदा चुनौतियों का समाधान भी संभव है।

उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक को समझने और उसका सकारात्मक इस्तेमाल करने की अपील की।

डिजिटल फाइनेंस और फिनटेक से बदल रहा वित्तीय क्षेत्र

एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डॉ. बलविंदर शुक्ला ने कहा कि बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र में टेक्नोलॉजी इनोवेशन, डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेज और फिनटेक के कारण तेजी से बदलाव हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बदलते जोखिम, डेटा गवर्नेंस और ग्राहकों की नई अपेक्षाओं के बीच मजबूत नियामक व्यवस्था जरूरी है। इससे वित्तीय स्थिरता, उपभोक्ता संरक्षण, पारदर्शिता और सतत विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

साइबर सिक्योरिटी और रेगुलेटरी टेक्नोलॉजी पर भी चर्चा

एमिटी ग्रुप वाइस चांसलर डॉ. गुरिंदर सिंह ने कहा कि सम्मेलन विद्यार्थियों को बैंकिंग, बीमा और नियामक क्षेत्र के विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि एमिटी वित्तीय क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल पर भी लगातार काम कर रहा है।

वहीं, एमिटी स्कूल ऑफ इंश्योरेंस, बैंकिंग एंड एक्चुरियल साइंसेस के निदेशक ए.पी. सिंह ने बताया कि सम्मेलन में रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, रिस्क मैनेजमेंट, रेगुलेटरी टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, फाइनेंशियल इन्क्लूजन और गवर्नेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।

दो परिचर्चा सत्रों में विशेषज्ञों ने रखे विचार

सम्मेलन के दौरान दो परिचर्चा सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र का विषय ‘डिजिटल फाइनेंशियल इकोसिस्टम के लिए रेगुलेटरी आर्किटेक्चर’ रहा। इसमें पंजाब नेशनल बैंक के डिजिटल बैंकिंग ट्रांसफॉर्मेशन डिवीजन के चीफ जनरल मैनेजर अतिश कुमार राउत, नेक्सोरा एडवाइजर्स के संस्थापक एवं पार्टनर निखिल साहनी, SIDBI के डिप्टी जनरल मैनेजर स्वप्निल साहिल समेत अन्य विशेषज्ञों ने विचार रखे।

दूसरे सत्र में ‘बीमा उद्योग में बदलता आर्किटेक्चर—एक नजरिया’ विषय पर चर्चा हुई। इसमें बीमा क्षेत्र में हो रहे बदलावों, तकनीक और नियामक व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

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