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12 अक्तूबर 2026 | भरोसेमंद खबरें, सीधे आपके शहर से
अंक: 12 Oct 2026
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ग्रीन कॉरिडोर से 63 मिनट में रोहतक से दिल्ली पहुंचा डोनर हार्ट, 47 वर्षीय मरीज को मिला नया जीवन

Rinku Yadav • • 4 मिनट पढ़ें
ग्रीन कॉरिडोर से 63 मिनट में रोहतक से दिल्ली पहुंचा डोनर हार्ट, 47 वर्षीय मरीज को मिला नया जीवन

फोर्टिस शालीमार बाग में सफल हार्ट ट्रांसप्लांट; उत्तरी और पश्चिमी दिल्ली में पहली बार सफल हृदय प्रत्यारोपण का दावा

अनप्लग इंडिया। डेस्क

नई दिल्ली। दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग में 47 वर्षीय चंचल यादव का सफल हृदय प्रत्यारोपण किया गया। मरीज कई वर्षों से गंभीर हार्ट फेलियर से जूझ रहे थे। उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी और दवाओं से भी अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था। ऐसे में हृदय प्रत्यारोपण ही उनके लिए जीवन बचाने का प्रमुख विकल्प रह गया था।

अस्पताल के मुताबिक, यह उत्तरी और पश्चिमी दिल्ली में पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट है। इस प्रत्यारोपण के लिए डोनर हार्ट हरियाणा के रोहतक स्थित पीजीआईएमएस से दिल्ली लाया गया। हरियाणा और दिल्ली पुलिस की मदद से बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर के जरिए करीब 95 किलोमीटर की दूरी महज 63 मिनट में पूरी की गई।

गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे थे मरीज

चंचल यादव की हृदय की पंपिंग क्षमता लगातार कम हो रही थी। इसके कारण उन्हें सांस फूलने की गंभीर परेशानी होती थी और वह बिस्तर तक सीमित हो गए थे। उन्हें बार-बार जानलेवा हार्ट शॉक की समस्या भी हो रही थी। अस्पताल की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, पहले किए गए चिकित्सा उपचार के बावजूद उनकी हालत में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ था।

डॉ. दिनेश कुमार मित्तल, सीनियर डायरेक्टर एवं एचओडी, कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी, फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग के नेतृत्व में डॉक्टरों की बहुविषयक टीम ने प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की।

पुलिस के सहयोग से बना ग्रीन कॉरिडोर

इस मामले में निर्णायक मोड़ तब आया, जब रोहतक के पीजीआईएमएस में डोनर हार्ट उपलब्ध हुआ। जानकारी मिलते ही फोर्टिस की ट्रांसप्लांट टीम ने अंग प्राप्त करने, उसे निकालने और दिल्ली तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

इस दौरान अस्पताल प्रशासन, ट्रांसप्लांट समन्वयकों, राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO), राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO) तथा हरियाणा और दिल्ली पुलिस ने समन्वय किया। ग्रीन कॉरिडोर की मदद से डोनर हार्ट को निर्धारित समय में अस्पताल पहुंचाया गया, ताकि प्रत्यारोपण की प्रक्रिया बिना अनावश्यक देरी के पूरी हो सके।

डॉक्टर बोले—हर मिनट था अहम

डॉ. दिनेश कुमार मित्तल ने बताया कि हृदय प्रत्यारोपण समय के लिहाज से बेहद संवेदनशील प्रक्रिया है। डोनर हार्ट को निकालने से लेकर मरीज के शरीर में रक्त प्रवाह दोबारा शुरू करने तक हर चरण में सावधानी और सटीक योजना जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि ऑर्गन रिट्रीवल, ट्रांसप्लांट सर्जरी, एनेस्थीसिया, परफ्यूजन और क्रिटिकल केयर टीमों के बीच तालमेल से यह चुनौती पूरी हो सकी। अस्पताल के अनुसार, मरीज प्रत्यारोपण के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं।

मरीज ने डोनर परिवार के प्रति जताया आभार

हृदय प्रत्यारोपण के बाद चंचल यादव ने अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और पूरी टीम के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि ट्रांसप्लांट की जरूरत के बारे में पता चलने पर वह और उनका परिवार डर तथा अनिश्चितता से गुजर रहे थे। लेकिन अस्पताल की टीम की देखभाल और सहयोग से उनका हौसला बढ़ा।

चंचल यादव ने डोनर परिवार को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के निस्वार्थ निर्णय ने उन्हें नया जीवन दिया है और वह भविष्य को लेकर आशावान हैं।

अंगदान के प्रति जागरूकता पर जोर

फोर्टिस के डॉ. नरेश कुमार गोयल, प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं एचओडी, कार्डियोलॉजी एंड हार्ट फेलियर प्रोग्राम ने बताया कि मरीज हार्ट फेलियर की गंभीर अवस्था में थे। उपलब्ध चिकित्सा उपचार से उनकी स्थिति में सुधार की संभावना सीमित थी, इसलिए प्रत्यारोपण एक महत्वपूर्ण विकल्प था। उन्होंने डोनर परिवार की उदारता के प्रति आभार जताया।

फोर्टिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस सफल प्रक्रिया में विभिन्न टीमों और पुलिस के समन्वय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। अस्पताल का कहना है कि ऐसे मामले अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद मरीजों तक समय पर उपचार पहुंचाने के महत्व को सामने लाते हैं।

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