एमिटी इंटरनेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता में एनएमआईएमएस इंदौर बना विजेता, काठमांडू स्कूल ऑफ लॉ ने अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता
16वें आयोजन में देश-विदेश के कानून के छात्रों ने लिया हिस्सा, न्यायाधीशों ने एआई के उपयोग, व्यावहारिक ज्ञान और आम आदमी को न्याय दिलाने पर दिया जोर
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नोएडा। एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी लॉ स्कूल द्वारा आयोजित 16वीं एमिटी इंटरनेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता 2026 का समापन हो गया। प्रतियोगिता के राष्ट्रीय राउंड में नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एनएमआईएमएस), इंदौर की टीम ने विजेता ट्रॉफी हासिल की, जबकि एनएमआईएमएस चंडीगढ़ की टीम उपविजेता रही। अंतरराष्ट्रीय राउंड में काठमांडू स्कूल ऑफ लॉ की टीम ने विजेता का खिताब जीता और अदीस अबाबा यूनिवर्सिटी की टीम उपविजेता बनी।
प्रतियोगिता का विषय ‘अंतरराष्ट्रीय कानून में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को विनियमित करना—ड्रोन, मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी), मशीनें और राज्य-प्रायोजित युद्ध से जुड़े मामले’ था। इसका उद्देश्य कानून के विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान, शोध क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच, आत्मविश्वास और न्यायालय में अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का कौशल विकसित करना था।
समापन समारोह में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी और न्यायमूर्ति गिरिश कथपालिया, कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप कुमार डे, मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव, एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार चौहान, एमिटी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. बलविंदर शुक्ला, एमिटी लॉ स्कूल के चेयरमैन डॉ. डीके बंद्योपाध्याय और निदेशक डॉ. शेफाली रायजादा सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। अतिथियों ने विजेता टीमों और प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया।
इंदौर और चंडीगढ़ की टीमों ने राष्ट्रीय राउंड में मारी बाजी
राष्ट्रीय राउंड में एनएमआईएमएस इंदौर को विजेता और एनएमआईएमएस चंडीगढ़ को उपविजेता घोषित किया गया। लॉयड लॉ स्कूल की टीम को सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल का पुरस्कार मिला, जबकि सिम्बायोसिस लॉ स्कूल की विधि सिंह को सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता का सम्मान प्रदान किया गया।
अंतरराष्ट्रीय राउंड में काठमांडू स्कूल ऑफ लॉ की जैसमीन गिरी को सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार मिला। लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ की टीम को सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल का पुरस्कार दिया गया। काठमांडू स्कूल ऑफ लॉ की टीम ने अंतरराष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया, जबकि अदीस अबाबा यूनिवर्सिटी की टीम उपविजेता रही।
‘एक जीत के लिए कई बार हारना पड़ता है’
दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि एक अच्छा वकील हमेशा सक्रिय और सजग रहता है। उन्होंने विद्यार्थियों को दूसरों की बात ध्यानपूर्वक सुनने, संवाद का उचित जवाब देने और लगातार अभ्यास करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ता है। विद्यार्थियों को कभी हार नहीं माननी चाहिए और अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने विजेता और अन्य सभी प्रतिभागियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार चौहान ने कहा कि यह प्रतियोगिता केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए वास्तविक अदालत के अनुभव जैसा अवसर है। उन्होंने कहा कि अच्छा वकील बनने के लिए कानून की किताबों का ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए धैर्य, तीक्ष्ण बुद्धि और न्याय के प्रति गहरी निष्ठा भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से उपस्थित न्यायाधीशों के अनुभवों से सीखने और लक्ष्य हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करने का आह्वान किया।
आम आदमी और वंचितों को न्याय दिलाना वकीलों की जिम्मेदारी
दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति गिरिश कथपालिया ने कहा कि प्रतियोगिता में एक ही टीम विजेता बन सकती है, लेकिन जीवन में मेहनत और ईमानदारी से हर व्यक्ति सफलता हासिल कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने कौशल को लगातार विकसित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि कानून के विद्यार्थियों को उन लोगों की आवाज बनना चाहिए, जिनकी समस्याएं अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। इसमें ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को बुनियादी सुविधाएं दिलाने से लेकर मेहनतकश रिक्शा चालकों जैसे आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना शामिल है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ समाज के जरूरतमंद लोगों को न्याय दिलाने की भावना भी विकसित करनी चाहिए।
एआई का उपयोग करें, लेकिन पुस्तकों से दूरी न बनाएं
एमिटी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. बलविंदर शुक्ला ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग आज लगभग हर क्षेत्र में हो रहा है। कानून के विद्यार्थी भी इसका सही इस्तेमाल शोध, लेखन और व्यावसायिक कार्यों में कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवा विधि विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। एमिटी में विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने के लिए तैयार किया जाता है और यह प्रतियोगिता उसी दिशा में एक कदम है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप कुमार डे ने कहा कि कक्षा से न्यायालय तक की यात्रा में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव और आधुनिक तकनीकों की समझ भी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को एआई का उपयोग करने के साथ-साथ पुस्तकों का नियमित अध्ययन जारी रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कानून के क्षेत्र में तथ्यों की सही और सटीक जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है। एआई की सहायता जरूर लें, लेकिन उसे अपनी समझ पर हावी न होने दें।
मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को समय मिलने पर न्यायालयों में जाकर उनकी कार्यप्रणाली समझने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में दस्तावेज तैयार करने और उन्हें प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखने से भविष्य के व्यावसायिक जीवन में मदद मिलती है। इस तरह की मूट कोर्ट प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं।
भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं ऐसी प्रतियोगिताएं
एमिटी लॉ स्कूल के चेयरमैन डॉ. डीके बंद्योपाध्याय ने कहा कि इस तरह के आयोजन केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों को उनके भविष्य के लिए तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में प्रत्येक चुनौती अपने साथ एक अवसर लेकर आती है, इसलिए विद्यार्थियों को चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
एमिटी लॉ स्कूल की निदेशक डॉ. शेफाली रायजादा ने अतिथियों का स्वागत किया और प्रतियोगिता के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर प्रतियोगिता पर आधारित पुस्तिका और जर्नलों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में एमिटी लॉ स्कूल के अतिरिक्त निदेशक डॉ. अरविंद पी. भानू ने अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
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