नोएडा में 2200 कैमरों से होगी निगरानी, ₹217 करोड़ के सेफ सिटी प्रोजेक्ट को मिलेगी रफ्तार
25 अक्टूबर तक कंपनियां कर सकेंगी आवेदन, अगले महीने एजेंसी चुनने की तैयारी; सेक्टर-94 में बनेगा नया कंट्रोल रूम
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नोएडा। शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और अपराधों पर नजर रखने के लिए प्रस्तावित सेफ सिटी परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। योजना के तहत नोएडा के अलग-अलग इलाकों में करीब 2,200 कैमरे लगाए जाएंगे। लगभग 217 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर तय की गई है। इसके बाद करीब एक महीने के भीतर कार्यदायी कंपनी का चयन करने की योजना है।
यह परियोजना पिछले करीब छह वर्षों से लंबित है। अब टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे जमीन पर उतारने की उम्मीद जताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कैमरे लगाने का काम अगले साल की शुरुआत से शुरू होने की संभावना है।
सुझावों के बाद आवेदन की तारीख बढ़ी
परियोजना के लिए जारी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) पर 17 सितंबर को संबंधित एजेंसियों के साथ बैठक हुई थी। बैठक में कंपनियों ने तकनीकी मानकों, पात्रता, कार्यक्षेत्र और काम पूरा करने की समय-सीमा से जुड़े सुझाव दिए। इनमें से कुछ बिंदुओं को शामिल करने के लिए आरएफपी में शुद्धिपत्र जारी किया गया। इसी प्रक्रिया के चलते आवेदन की समय-सीमा बढ़ाकर 25 अक्टूबर कर दी गई।
परियोजना के अंतर्गत डिजाइन तैयार करने, उपकरणों की आपूर्ति, कैमरों की स्थापना, सिस्टम लागू करने और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी चयनित एजेंसी को दी जाएगी।
सेक्टर-94 में बनेगा नया कंट्रोल रूम
सेफ सिटी परियोजना के लिए सेक्टर-94 स्थित इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ISTMS) परिसर में नया कंट्रोल रूम विकसित किया जाएगा। इसे मौजूदा कंट्रोल रूम से भी जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था में ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र को भी भविष्य में जोड़ने की सुविधा रखी गई है।
नया कंट्रोल रूम पुलिस मुख्यालय के कंट्रोल रूम से सीधे जुड़ा रहेगा। किसी घटना की सूचना मिलने पर संबंधित थाना, पुलिस चौकी, पीआरवी और डायल-112 तक जानकारी तेजी से पहुंचाने की व्यवस्था होगी। इससे आपात स्थिति में पुलिस की प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फेस डिटेक्शन से संदिग्धों की पहचान में मदद
प्रस्तावित कैमरा नेटवर्क में फेस डिटेक्शन जैसी तकनीक शामिल करने की योजना है। इसके जरिए पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज अपराधियों की पहचान करने और उनकी संभावित लोकेशन से संबंधित जानकारी कंट्रोल रूम तक पहुंचाने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
परियोजना में पैन-टिल्ट-जूम (PTZ) कैमरे भी लगाए जाने हैं। इन कैमरों को जरूरत के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में घुमाया जा सकेगा। दिए गए परियोजना विवरण के अनुसार, इनसे करीब 1,700 मीटर तक जूम करके फुटेज देखने की क्षमता प्रस्तावित है।
निगरानी और आपात प्रतिक्रिया पर रहेगा जोर
सेफ सिटी परियोजना का उद्देश्य शहर के प्रमुख और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना है। कैमरों और कंट्रोल रूम को एकीकृत करने से पुलिस को घटनाओं की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल परियोजना टेंडर और एजेंसी चयन की प्रक्रिया में है। कैमरों की स्थापना और सिस्टम के चालू होने की वास्तविक समय-सीमा चयन प्रक्रिया तथा आगे के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
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