एमिटी यूनिवर्सिटी में विश्व फार्मासिस्ट दिवस एवं राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह का राज्य स्तरीय आयोजन, 1500 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया की पहल पर आयोजित कार्यक्रम में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस से मुकाबले पर मंथन, विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक दवाओं के जिम्मेदार उपयोग और जनस्वास्थ्य में फार्मासिस्टों की भूमिका पर दिया जोर
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नोएडा। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नई दिल्ली की ओर से रविवार को एमिटी विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश, नोएडा में विश्व फार्मासिस्ट दिवस एवं राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह 2026 का राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली के फार्मेसी संस्थानों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 1,500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘स्वस्थ भारत: रोगाणुरोधी प्रतिरोध से मुकाबला’ रहा।
आयोजन का उद्देश्य एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) यानी रोगाणुरोधी प्रतिरोध के प्रति जागरूकता बढ़ाना, एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण और जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा जनस्वास्थ्य की सुरक्षा में फार्मासिस्टों की भूमिका को मजबूत करना था। कार्यक्रम में फार्मेसी के विद्यार्थियों, शिक्षकों, फार्मासिस्टों, स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और औषधि उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत AMR के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से निकाली गई जागरूकता रैली से हुई। इसके बाद औपचारिक उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें फार्मेसी और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ विशेषज्ञों ने सहभागिता की।
PCI अध्यक्ष डॉ. मोंटुकुमार पटेल सहित कई विशेषज्ञ रहे मौजूद
उद्घाटन सत्र में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मोंटुकुमार एम. पटेल, विशिष्ट अतिथि एवं PCI की कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉ. अतुल के. नासा, कार्यक्रम संयोजक एवं PCI केंद्रीय परिषद सदस्य प्रो. (डॉ.) विभु सहानी तथा सह-संयोजक एवं केंद्रीय परिषद सदस्य संदीप बडोला उपस्थित रहे।
इस अवसर पर एमिटी विश्वविद्यालय नोएडा के कुलपति प्रो. (डॉ.) बलविंदर शुक्ला ने स्वागत संबोधन दिया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल अतिथियों, विशेषज्ञों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत किया।
एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल से बढ़ रही चुनौती पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य एवं संबद्ध विज्ञान संकाय, एमिटी विश्वविद्यालय के डीन प्रो. (डॉ.) बी.सी. दास ने रोगाणुरोधी प्रतिरोध और उससे उत्पन्न हो रही चुनौतियों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया।
उन्होंने इस विषय पर वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं को सामने रखा। इसके बाद स्वास्थ्य सेवा और औषधि क्षेत्र के विशेषज्ञों की सहभागिता से पैनल चर्चा आयोजित की गई। चर्चा का केंद्र AMR की बढ़ती चुनौती, एंटीबायोटिक दवाओं का तर्कसंगत उपयोग और इस समस्या से निपटने में फार्मासिस्टों की भूमिका रहा।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि दवाओं का जिम्मेदार उपयोग और जागरूकता बढ़ाना जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
क्विज से नुक्कड़ नाटक तक, विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
समारोह में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कई शैक्षणिक और रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें फार्मास्यूटिकल क्विज, वैज्ञानिक पोस्टर प्रस्तुतिकरण, रील निर्माण, साइ-टून्स (Scitoons), सूचना-पत्र निर्माण और नुक्कड़ नाटक प्रमुख रहे।
इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने, AMR के प्रति जागरूकता फैलाने और एंटीबायोटिक दवाओं के जिम्मेदार उपयोग का संदेश आम लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिला।
प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने रचनात्मक माध्यमों से रोगाणुरोधी प्रतिरोध जैसी गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती को समझाने का प्रयास किया।
समापन सत्र में विजेताओं को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के समापन सत्र में PCI के सह-संयोजक एवं केंद्रीय परिषद सदस्य प्रो. (डॉ.) आकाश वेद, केंद्रीय परिषद सदस्य एवं सह-संयोजक दिनेश मदान तथा PCI की विधि समिति और व्यावसायिक फार्मेसी एवं जनसंपर्क समिति (PP&PRC) के सदस्य बलदेव कुमार शामिल हुए।
इस दौरान एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी की नोडल अधिकारी प्रो. (डॉ.) स्वाति मदान ने कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नवनीत वर्मा, प्रो-वाइस चांसलर (अनुसंधान एवं विकास), डीन एवं सह-समन्वयक, आईएफटीएम विश्वविद्यालय, मुरादाबाद ने प्रस्तुत किया।
एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी ने किया आयोजन
इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, एमिटी विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश, नोएडा की ओर से किया गया। कार्यक्रम का समन्वय एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी के प्रमुख प्रो. (डॉ.) हवागिरे आर. चितमे के नेतृत्व में किया गया।
आयोजन का व्यापक उद्देश्य दवाओं के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना, रोगाणुरोधी प्रतिरोध की रोकथाम एवं नियंत्रण के प्रभावी उपायों को प्रोत्साहित करना और भविष्य के फार्मासिस्टों को इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए तैयार करना रहा।
इस पहल के माध्यम से फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में फार्मेसी पेशेवरों के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही AMR की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए फार्मासिस्टों, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और औषधि उद्योग के बीच सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
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