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खड़गे की मांग- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए, SIR पर लगे रोक
विपक्ष की मॉक पार्लियामेंट में 19 दलों के नेता जुटे, मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े कानून पर उठाए सवाल
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, दिसंबर 2023 में बने चुनाव आयुक्तों से संबंधित कानून को रद्द करने और SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद की अनुमति के बिना मतदाता सूची में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव किए गए और जानबूझकर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए।
शनिवार को दिल्ली में खड़गे के आवास पर आयोजित विपक्ष की मॉक पार्लियामेंट में उन्होंने ये बातें कहीं। इस कार्यक्रम में कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के 19 राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सभा की अध्यक्षता की।
खड़गे ने लगाए चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
खड़गे ने अपने संबोधन में कहा कि विपक्ष की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और मतदाता सूची में नाम जोड़ने तथा हटाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक के चुनावों का जिक्र करते हुए मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। खड़गे के मुताबिक, विपक्ष ने चुनाव आयोग से कई बार जानकारी मांगी, लेकिन अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव लाने की कोशिश कर चुका है, लेकिन उसके नोटिस स्वीकार नहीं किए गए। अब लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्ष को सार्वजनिक मंच पर अपनी आवाज उठानी पड़ रही है।
2023 के कानून पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने दिसंबर 2023 में पारित मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून पर भी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि इस कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों को ऐसी कानूनी सुरक्षा दी गई है, जिस पर गंभीर सवाल उठते हैं।
खड़गे ने कहा कि विपक्ष की मांग है कि इस कानून को रद्द किया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए।
मीरा कुमार बोलीं- मतदाता लोकतंत्र का केंद्र
सभा की अध्यक्षता कर रहीं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि भारत का लोकतंत्र समानता के सिद्धांत पर आधारित है। यहां प्रत्येक वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार प्राप्त है, चाहे वह किसी भी वर्ग, जाति, धर्म या लिंग से संबंधित हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। जब विपक्ष इस संबंध में सवाल उठाता है तो उसे पर्याप्त पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं मिलती।
मतदाता सूची से नाम कटने की शिकायत लेकर पहुंचे लोग
मॉक पार्लियामेंट में ऐसे लोग भी पहुंचे, जिन्होंने दावा किया कि उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
दिल्ली के मंगोलपुरी निवासी कांता प्रसाद ने बताया कि वह पिछले करीब 35 वर्षों से मतदान करते आ रहे हैं, लेकिन अब मतदाता सूची में उनका नाम नहीं है। उनका आरोप है कि वह जीवित हैं, इसके बावजूद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने BLO पर सादे कागज पर हस्ताक्षर करवाने और फॉर्म-6 भरवाने का भी आरोप लगाया।
वहीं, पश्चिम बंगाल से पहुंचे इफ्तिकार ने कहा कि सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया। दिल्ली की अनीता जायसवाल ने भी अपना नाम कटने की शिकायत की। उन्होंने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर हैं और अकेले अपनी बेटी की परवरिश कर रही हैं।
TMC और वामपंथी नेताओं ने भी साधा निशाना
TMC सांसद सागरिका घोष ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का जिक्र करते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने के मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम किया।
CPI सांसद पी. संतोष कुमार ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके सहयोगियों को पद छोड़ना चाहिए।
वहीं, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने SIR को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए इस प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए।
क्या है विपक्ष की प्रमुख मांग?
विपक्ष की इस मॉक पार्लियामेंट में मुख्य रूप से छह मांगें और आरोप सामने आए:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए।
- दिसंबर 2023 में पारित चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून रद्द किया जाए।
- मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर तत्काल रोक लगाई जाए।
- फॉर्म-6 में किए गए बदलावों और उनकी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
- मतदाता सूची से नाम हटाने के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही तय हो।
- कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़े जाएं।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में सुधार के नाम पर किसी भी पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया और संबंधित तथ्यों की पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
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