RTI की जानकारी नहीं देने पर गुरुग्राम के तहसीलदार और नायब तहसीलदार पर ₹50 हजार जुर्माना
राज्य सूचना आयोग ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने पर दो राजस्व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। तत्कालीन तहसीलदार दर्पण कंबोज और नायब तहसीलदार सुशील कुमार पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है
अनप्लग इंडिया। डेस्क
गुरुग्राम। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी देने में देरी और लापरवाही बरतना गुरुग्राम के दो राजस्व अधिकारियों को भारी पड़ा है। राज्य सूचना आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्कालीन तहसीलदार और नायब तहसीलदार पर कुल 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। दोनों अधिकारियों को अलग-अलग 25-25 हजार रुपये जमा कराने होंगे।
आयोग ने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को दोनों अधिकारियों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि आरटीआई आवेदनों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
तहसीलदार और नायब तहसीलदार पर अलग-अलग 25 हजार का जुर्माना
राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20(1) के तहत कार्रवाई करते हुए तहसीलदार दर्पण कंबोज और नायब तहसीलदार सुशील कुमार को जिम्मेदार ठहराया। आयोग ने वर्ष 2024 में जारी शो-कॉज नोटिस संख्या 1464 और 1468 पर फैसला सुनाते हुए दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
दोनों अधिकारी 7 नवंबर 2022 को दाखिल किए गए आरटीआई आवेदन के समय राज्य लोक सूचना अधिकारी का प्रभार संभाल रहे थे। इस कारण मामले में उनकी सीधी जिम्मेदारी बनती थी।
तीन महीने के भीतर जमा करनी होगी जुर्माने की राशि
आयोग के आदेश के मुताबिक, दोनों अधिकारियों को जुर्माने की रकम आदेश प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर निर्धारित सरकारी मद में डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से पंचकूला में जमा करानी होगी।
आयोग सचिवालय को आदेश की प्रति गुरुग्राम के उपायुक्त को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। उपायुक्त को अधिकारियों से जुर्माने की राशि की वसूली सुनिश्चित करनी होगी।
आयोग ने यह भी कहा है कि यदि संबंधित अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं तो कानून के प्रावधानों के अनुसार जुर्माने की रकम उनकी पेंशन से वसूल की जा सकती है।
लापरवाही की जांच कर विभागीय कार्रवाई के निर्देश
आयोग ने उच्च अधिकारियों को यह जांचने के लिए कहा है कि आरटीआई की जानकारी देने में देरी किन परिस्थितियों में हुई। साथ ही, लापरवाही और कर्तव्य में ढिलाई बरतने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है।
इस कार्रवाई की रिपोर्ट तीन महीने के भीतर राज्य सूचना आयोग को सौंपनी होगी। आयोग ने भविष्य में सभी आरटीआई आवेदनों का निपटारा कानून में निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनिश्चित करने की हिदायत भी दी है।
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