देश में इस साल 13वां सबसे सूखा मानसून
पूर्वोत्तर में 1901 के बाद सबसे कम बारिश
पंजाब में 41% और राजस्थान में 22% कम बारिश, 10 अक्टूबर तक पूरे देश से मानसून की विदाई
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नई दिल्ली। देश में मानसून-2026 का सीजन सामान्य से कम बारिश के साथ समाप्त हुआ है। इस बार मानसून देश के इतिहास में 13वां सबसे सूखा सीजन रहा। पिछले 11 वर्षों में यह सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा है। हालांकि, मानसून सीजन के अंतिम दिनों में हुई तेज बारिश से बारिश की कमी में करीब 2.5 प्रतिशत की भरपाई हुई।
मानसून-2026 में देशभर में सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई। देश के करीब 43 प्रतिशत जिलों में 20 से 72 प्रतिशत तक कम बारिश हुई। पंजाब सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में रहा, जहां सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। राजस्थान में भी करीब 22 प्रतिशत बारिश की कमी रही। इसके अलावा 9 अन्य राज्यों में भी औसत से कम बारिश हुई। पूर्वी भारत में ओडिशा में सामान्य से 30 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। वहीं, बारिश के लिए जाने जाने वाले पूर्वोत्तर राज्यों में इस साल 1901 के बाद सबसे कम बारिश रिकॉर्ड की गई।
10 अक्टूबर तक पूरे देश से मानसून की विदाई संभव
देश से मानसून की वापसी 19 सितंबर से शुरू हो चुकी है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों के अलावा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और मध्य प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों से मानसून की विदाई शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से भी दक्षिण-पश्चिम मानसून वापस लौट सकता है।
हालांकि दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 10 अक्टूबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे देश से विदा हो जाएगा। इसके बाद 15 अक्टूबर के बाद दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों में उत्तर-पूर्व मानसून दस्तक दे सकता है।
सितंबर के आखिरी सप्ताह में सामान्य से 50% ज्यादा बारिश
मानसून की विदाई से ठीक पहले सितंबर के आखिरी सप्ताह में देशभर में सामान्य से करीब 50 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। इससे मानसून की कुल बारिश में रही कमी भी कुछ कम हुई। एक सप्ताह पहले तक मानसून की बारिश सामान्य से 15 प्रतिशत कम थी। लेकिन सीजन समाप्त होने तक यह कमी घटकर 12.6 प्रतिशत रह गई। यानी अंतिम सप्ताह में हुई बारिश से करीब 2.5 प्रतिशत की कमी पूरी हुई।
मानसून के कुल 122 दिनों में से 77 दिनों के दौरान देश में कोई न कोई मौसमी सिस्टम सक्रिय रहा। इसके कारण अलग-अलग हिस्सों में बारिश होती रही और सीजन के अंत में बारिश की कमी 12.6 प्रतिशत तक सीमित रही। सीजन शुरू होने से पहले अल नीनो के संभावित प्रभाव के कारण सूखे की आशंका जताई गई थी। हालांकि, एक-दो राज्यों को छोड़कर देश के ज्यादातर हिस्सों में स्थिति अनुमान के मुकाबले उतनी खराब नहीं रही।
282 जिलों में सामान्य से कम बारिश
देश के करीब 38 प्रतिशत हिस्से यानी 282 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। अत्यधिक बारिश के लिए प्रसिद्ध मेघालय में भी इस बार सामान्य से 60 प्रतिशत कम बारिश हुई।
24 सितंबर तक देश के 150 प्रमुख जलाशयों में करीब 130 अरब घन मीटर (BCM) पानी उपलब्ध था। इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 182.4 BCM है। इस हिसाब से जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का करीब 71 प्रतिशत पानी मौजूद था। हालांकि, जलाशयों में उपलब्ध पानी की मात्रा पिछले साल की तुलना में कम है।
अल नीनो के असर की कुछ भरपाई की उम्मीद
ICICI बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार इंडियन ओशन डाइपोल यानी IOD इंडेक्स 0.76 के साथ पॉजिटिव जोन में पहुंच गया है। इससे आने वाले समय में मजबूत हो रहे अल नीनो के प्रतिकूल प्रभाव की कुछ हद तक भरपाई होने की संभावना है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक अल नीनो अभी भी मानसून के लिए एक प्रमुख जोखिम बना हुआ है।
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