मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
▪ राजनीति: CJI सूर्यकांत ने राहुल गांधी-खड़गे से मिलने से किया इनकार, विपक्ष आज सुप्रीम कोर्ट तक निकालेगा मार्च ▪ मेरा शहर: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की इको विलेज-2 सोसायटी में पानी का संकट, हजारों निवासियों की दिनचर्या प्रभावित ▪ राजनीति: ओवैसी की योगी और अखिलेश को चुनौती, बोले- ‘बाबा संभल आएं, अखिलेश गोरखपुर जाएं’ ▪ राजनीति: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गैरकानूनी हिरासत में न लें: सुप्रीम कोर्ट ▪ राजनीति: CJP का आज फिर जंतर-मंतर मार्च, दिल्ली में सुरक्षा कड़ी; मेट्रो प्रतिबंध पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई ▪ राजनीति: राहुल गांधी बोले- लोकतंत्र बचाने के लिए सवाल पूछना जरूरी, चेन्नई में युवाओं से किया संवाद ▪ राजनीति: दिल्ली में CJP का प्रदर्शन फिर जारी रखने का ऐलान, 7 हजार लोगों को हिरासत में लेने का दावा ▪ राजनीति: दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से पहले सख्ती, 600 समर्थक हिरासत में; जंतर-मंतर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग
12 अक्तूबर 2026 | भरोसेमंद खबरें, सीधे आपके शहर से
अंक: 12 Oct 2026
Unplug India

भरोसेमंद खबरें, सीधे आपके शहर से

आज का अखबार पढ़ें

ब्रेकिंग

संतान के लिए पड़ोसी ने तांत्रिक के कहने पर जुबान काटी

न्यूज़रूम डेस्क • • 8 मिनट पढ़ें
संतान के लिए पड़ोसी ने तांत्रिक के कहने पर जुबान काटी

तांत्रिक के कहने पर पड़ोसी ने बच्ची की हत्या की

संतान की चाह में कलेजा खाने का दावा, वारदात के बाद गांव में बच्चों को घर से बाहर भेजने में डरते हैं लोग

अनप्लग इंडिया। डेस्क

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर के एक मोहल्ले में दिवाली के अगले दिन सुबह करीब 5 बजे कुछ महिलाएं टहलने निकली थीं। इसी दौरान उनकी नजर खेतों के पास औंधे मुंह पड़ी 6-7 साल की एक बच्ची पर गई। बच्ची के शरीर पर कपड़े नहीं थे और वह खून से लथपथ थी।महिलाओं ने शोर मचाया। उनमें से एक ने बच्ची की पहचान प्रिया के रूप में की, जो रमा की बेटी थी। बच्ची की मां उसे रात से ही तलाश कर रही थी।

कुछ ही देर में पूरे इलाके में खबर फैल गई और लोग मौके पर पहुंचने लगे। बच्ची की मां रमाबाई भी वहां पहुंचीं। वह अपनी बेटी के पास जाने लगीं, लेकिन महिलाओं ने उन्हें रोक दिया और कहा कि पहले पुलिस को आने दिया जाए। कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची। बच्ची के शव की स्थिति देखकर वहां मौजूद लोग सहम गए। पुलिस के अनुसार, बच्ची के शरीर पर धारदार हथियार से चोट के निशान थे। उसकी जीभ और नाक कटी हुई थी तथा आंखों को भी नुकसान पहुंचाया गया था। शरीर के निचले हिस्से में भी चोट और खून के निशान थे। जांच के दौरान पुलिस को बच्ची के साथ दुष्कर्म की आशंका हुई। ब्लैकबोर्ड की यह कहानी उस परिवार और पूरे गांव की है, जहां एक बच्ची की हत्या के बाद पड़ोसियों के बीच वर्षों पुराना भरोसा टूट गया। घटना के बाद परिवार ने अपने बच्चों का दूसरे घरों में जाना लगभग बंद कर दिया।

पड़ोसन सुनीता से बहन जैसा रिश्ता था

रमाबाई बताती हैं कि शादी के बाद वह इसी घर में रहने लगी थीं। उनके पड़ोस में सुनीता और परम रहते थे। दोनों के कोई संतान नहीं थी।रमाबाई की बड़ी बेटी के जन्म के बाद सुनीता अक्सर उनके घर आती थीं और बच्ची की देखभाल में मदद करती थीं। कुछ साल बाद रमाबाई की छोटी बेटी प्रिया पैदा हुई। उस समय भी सुनीता ने उनकी काफी मदद की।

रमाबाई के मुताबिक, एक साथ बच्चों और घर की जिम्मेदारी संभालना मुश्किल होता था। ऐसे में सुनीता कई बार उनके घर खाना बना देती थीं या बच्चों को नहला-धुलाकर तैयार कर देती थीं। जब रमाबाई का बेटा हुआ तो जिम्मेदारियां और बढ़ गईं। तब सुनीता ने उनसे कहा था कि प्रिया की चिंता न करें, वह रात में भी उसे अपने घर सुला सकती हैं और रमाबाई अपने बेटे पर ध्यान दें। धीरे-धीरे दोनों परिवारों के बीच रिश्ते काफी करीबी हो गए। कई बार प्रिया खेलते-खेलते सुनीता के घर ही सो जाती थी। रमाबाई को भी भरोसा था कि सुनीता सुबह उसे खुद घर पहुंचा देंगी।

जेठ का बेटा अंकुर भी प्रिया के साथ खेलता था

सुनीता के जेठ का बेटा अंकुर भी उनके साथ रहता था। करीब पांच साल की उम्र में उसके माता-पिता की एक हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद से वह सुनीता और परम के साथ ही रहने लगा था। घटना के समय अंकुर करीब 18-19 साल का था। वह प्रिया के साथ खेलता था और कई बार रमाबाई के घर भी आता-जाता था। उनके बेटे और बड़ी बेटी के साथ भी उसका मेलजोल था।

दिवाली के दिन अंकुर प्रिया को अपने साथ ले गया

15 नवंबर 2020 को दिवाली के दिन अंकुर रमाबाई के घर आया और प्रिया के साथ खेलने लगा। कुछ देर बाद उसने रमाबाई से कहा कि वह प्रिया को पटाखे दिलाने बाजार ले जाना चाहता है। रमाबाई ने यह कहते हुए मना कर दिया कि प्रिया अभी छोटी है और पटाखों से उसका हाथ जल सकता है। पिछले साल भी उनके बेटे का हाथ पटाखे जलाते समय झुलस गया था।

अंकुर ने कहा कि वह फिर अपने लिए ही पटाखे खरीद लेगा। इसके बाद रमाबाई घर के काम में व्यस्त हो गईं। वह अंदर के कमरे की सफाई करने लगीं। इसी दौरान अंकुर प्रिया को अपने साथ ले गया। रमाबाई को लगा कि वह उसे सुनीता के घर ले गया होगा। शाम होने लगी और त्योहार के कारण रमाबाई खाना बनाने की तैयारी में लग गईं। कुछ समय बाद उन्हें ध्यान आया कि प्रिया अभी तक घर नहीं लौटी है। उन्होंने अपने बेटे से कहा कि वह प्रिया को बुलाकर ले आए, क्योंकि पूजा का समय हो गया था। बेटे ने आसपास के घरों और मोहल्ले में प्रिया को तलाश किया, लेकिन वह कहीं नहीं मिली।

रातभर परिवार और पुलिस ने तलाश की

बेटे के वापस आने पर रमाबाई और उनके पति भी प्रिया को तलाश करने निकल गए। उन्होंने आसपास के कई घरों के दरवाजे खटखटाए और पूछा कि क्या प्रिया वहां आई है। हर जगह से उन्हें नकारात्मक जवाब मिला। परिवार की चिंता बढ़ती गई। पूरे इलाके में तलाश करने के बाद भी जब प्रिया नहीं मिली तो वे थाने पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।

पुलिस ने पूछताछ में रमाबाई से पूछा कि प्रिया को आखिरी बार किसके साथ देखा गया था। उन्होंने बताया कि अंकुर घर आया था और वह प्रिया को अपने साथ ले गया था। पुलिस तुरंत अंकुर के घर पहुंची, लेकिन वहां ताला लगा मिला। इससे पुलिस का संदेह और बढ़ गया। रात बीत चुकी थी। परिवार और आसपास के लोग भी बच्ची की तलाश में जुटे हुए थे। इसी दौरान कुछ महिलाओं ने आवाज लगाकर बताया कि प्रिया खेतों में पड़ी हुई है। इसके बाद पुलिस ने अंकुर की तलाश तेज कर दी।

पूछताछ में अंकुर ने वारदात में दोस्त के शामिल होने की बात कही

कुछ ही घंटों में पुलिस ने अंकुर को पकड़ लिया। पुलिस पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि वह प्रिया को खेतों की तरफ ले गया था, जहां उसका एक दोस्त पहले से मौजूद था। पुलिस के मुताबिक, अंकुर ने बताया कि दोनों ने बच्ची को चुप कराने के लिए उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। इसके बाद दोनों ने शराब पी और बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बाद में गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में अंकुर ने यह भी बताया कि हत्या के बाद शव को क्षत-विक्षत किया गया और शरीर के कुछ अंग निकाल लिए गए।रमाबाई का कहना है कि उनकी बेटी के साथ हुई घटना की क्रूरता को वह आज तक भूल नहीं पाई हैं।

संतान की चाह में हत्या की साजिश का आरोप

पुलिस पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, अंकुर ने बताया कि उसके चाचा परम और चाची सुनीता की शादी को करीब 30 साल हो चुके थे, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। संतान के लिए उन्होंने कई प्रयास किए थे, लेकिन सुनीता की गोद खाली रही।

अंकुर के कथित बयान के मुताबिक, एक दिन उनके घर एक तांत्रिक आया था। उसने कथित तौर पर कहा था कि दिवाली की रात किसी बच्ची का कलेजा रोटी के साथ खाने से संतान की प्राप्ति हो सकती है। बताया गया कि तांत्रिक ने उन्हें इससे संबंधित एक किताब भी दी थी। पुलिस के अनुसार, अंकुर ने बताया कि इसी कथित अंधविश्वास के चलते उसके चाचा-चाची ने उससे दिवाली के दिन प्रिया को मारने के लिए कहा था।

रमाबाई बोलीं- बच्चा चाहिए था तो मुझसे मांग लेते

रमाबाई अपनी बेटी की मौत को याद करते हुए कहती हैं कि अंधविश्वास के कारण उनकी बच्ची की जान चली गई। उनका कहना है कि यदि उन्हें बच्चा चाहिए था तो वह उनसे कह सकते थे, लेकिन उनकी बेटी को मारने की जरूरत क्यों पड़ी। वह सवाल करती हैं कि अपनी संतान की इच्छा पूरी करने के लिए कोई किसी दूसरे के बच्चे की जान कैसे ले सकता है।

रमाबाई के मुताबिक, जिस व्यक्ति को वह अपना समझती थीं, उसी पर उनकी बेटी के साथ दरिंदगी का आरोप लगा। वह यह भी कहती हैं कि उनकी बेटी की जीभ तक काट दी गई। उनके मन में आज भी यह सवाल है कि आखिर उसकी जुबान काटने की जरूरत क्यों पड़ी।

बेटी को आखिरी बार गोद में भी नहीं ले सकीं

रमाबाई बताती हैं कि वह अपनी बेटी को आखिरी बार ठीक से देख भी नहीं सकीं। पुलिस प्रिया के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले गई और इसके बाद शव सीधे अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया गया।

रमाबाई कहती हैं कि उन्हें बेटी को गोद में लेने, उसके माथे को चूमने और आखिरी बार सीने से लगाने का मौका तक नहीं मिला। अब उनके पास प्रिया की सिर्फ एक तस्वीर है, जिसे देखकर वह अपनी बेटी को याद करती हैं। वह तस्वीर को देखते हुए कहती हैं कि उस घटना के बाद से उनके परिवार ने दिवाली मनाना बंद कर दिया। दिवाली नजदीक आते ही उन्हें उस रात की घटना और बेटी का चेहरा याद आने लगता है।

घटना के बाद बच्चों को दूसरे घर भेजने से डरता है परिवार

घटना के समय रमाबाई के परिवार में बच्चों के अलावा आसपास के परिवारों के बीच भी काफी मेलजोल था। बच्चे एक-दूसरे के घर बेझिझक जाते थे और पड़ोसी भी दूसरे के बच्चों को अपने बच्चों की तरह ही मानते थे। लेकिन प्रिया की हत्या के बाद यह भरोसा टूट गया। रमाबाई बताती हैं कि अब वह अपने बच्चों को किसी दूसरे के घर जाने नहीं देतीं। उनका कहना है कि उनकी बेटी की मौत ने सिर्फ उनके परिवार को ही नहीं तोड़ा, बल्कि पूरे गांव के लोगों के बीच एक-दूसरे पर विश्वास को भी प्रभावित किया।

चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा

मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद दिसंबर 2023 में विशेष पॉक्सो अदालत ने अंकुर, उसके दोस्त धीरेन, परम और सुनीता को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत से आरोपियों को सजा मिलने के बावजूद रमाबाई के मन में अपनी बेटी को लेकर सवाल आज भी कायम हैं। उनका कहना है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई, लेकिन एक मां के मन में अपनी बच्ची की मौत का दर्द और यह सवाल आज भी जिंदा है कि आखिर उसकी बेटी का क्या कसूर था?

नोट: इस खबर में पीड़िता और अन्य संबंधित लोगों के नाम बदले गए हैं।

यह भी पढ़ें