राहुल गांधी बालाघाट में मृत आदिवासी बच्चों के परिजनों से मिले
बीमारी और कुपोषण से निपटने में सरकार नाकाम, MP का हर पांचवां नागरिक आदिवासी: राहुल गांधी
अनीता यादव, अनप्लग इंडिया। डेस्क
बालाघाट। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक स्थित जगला गांव पहुंचे। यहां उन्होंने बैगा आदिवासी समुदाय के लोगों से मुलाकात की और बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। राहुल गांधी करीब एक घंटे तक क्षेत्र में रहे। उनसे मिलने आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। राहुल गांधी ने इससे पहले माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल पहुंचकर बच्चों से बातचीत की और मिड-डे मील के बारे में जानकारी ली।
बालाघाट के आदिवासी इलाकों में बच्चों की मौत का मामला पिछले कई महीनों से चर्चा में है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 30 से अधिक बच्चों की मौत हुई है। हालांकि, मौतों की संख्या और उनके कारणों को लेकर प्रशासन तथा कांग्रेस की ओर से अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। केंद्र और स्वास्थ्य अधिकारियों की जांच में किसी एक बीमारी को सभी मौतों का एकमात्र कारण नहीं माना गया है। रिपोर्टों में मलेरिया, खसरा, कुपोषण, एनीमिया, डिहाइड्रेशन, संक्रमण और सांस संबंधी समस्याओं जैसी कई स्थितियों का उल्लेख किया गया है।
राहुल गांधी बोले- बीमारी से निपटने में सरकार नाकाम
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी जरूरी सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत के बावजूद प्रभावित परिवारों को पूरी सहायता और मुआवजा नहीं मिला है। राहुल गांधी ने कहा कि वह इस मुद्दे को लोकसभा में उठाएंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। उनके मुताबिक, आदिवासी समुदायों को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि उन्हें देश के बीचों-बीच अकेला छोड़ दिया गया है।

राहुल गांधी के आरोप और मांगें- 9 बड़ी बातें
- राहुल गांधी ने कहा कि बालाघाट के आदिवासी इलाकों में बीमारी और कुपोषण की वजह से कई बच्चों की जान गई है।
- उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी सरकारी सहायता पर्याप्त नहीं है।
- राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा का काम ठप है और वन अधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है।
- उन्होंने आदिवासियों को जमीन के पट्टे दिए जाने की मांग की।
- राहुल गांधी ने कहा कि बच्चों की मौत के बाद भी सभी प्रभावित परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है और कई परिवार इससे अब भी वंचित हैं।
- उन्होंने सरकार से वन अधिकार कानून के तहत पट्टे देने, मनरेगा का काम शुरू करने तथा इलाके में स्कूल और अस्पतालों की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
- राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार विकास और भ्रष्टाचार की बातें करती है, लेकिन आदिवासी परिवारों को मदद की जरूरत पड़ने पर सरकारी सहायता दिखाई नहीं देती।
- उन्होंने लाड़ली बहना योजना को लेकर भी आरोप लगाया कि एक योजना का लाभ मिलने पर दूसरी योजना की राशि प्रभावित हो जाती है। राहुल गांधी ने कहा कि पात्र आदिवासी परिवारों को योजनाओं का पूरा लाभ मिलना चाहिए।
- राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस आदिवासियों को ‘वनवासी’ के बजाय ‘आदिवासी’ मानती है और उनके अनुसार कांग्रेस की सरकार बनने पर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में आदिवासी समुदाय के अधिकार सुनिश्चित किए जाएंगे।
मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे
बालाघाट में बच्चों की मौत को लेकर सरकारी आंकड़ों और कांग्रेस की ओर से बताए जा रहे आंकड़ों में अंतर है। एक रिपोर्ट के अनुसार सरकारी रिकॉर्ड में बीमारी से संबंधित मौतों की संख्या 32 बताई गई है, जबकि कांग्रेस की ओर से इससे अधिक मौतों का दावा किया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह भी कहा है कि सभी मौतों को किसी एक बीमारी से जोड़ना सही नहीं होगा। मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भी राज्य सरकार से संबंधित दस्तावेज और जवाब मांग चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्क्रीनिंग, उपचार, जांच और टीकाकरण अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है।
मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी 21.1%
2011 की जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश की कुल आबादी में अनुसूचित जनजाति (ST) की हिस्सेदारी 21.1% है। यानी राज्य की आबादी में लगभग हर पांचवां व्यक्ति अनुसूचित जनजाति समुदाय से आता है। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के आंकड़ों में मध्य प्रदेश की ST आबादी 1,53,16,784 दर्ज है। मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में 47 सीटें ST के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा करीब 84 विधानसभा क्षेत्रों को आदिवासी प्रभाव वाली सीटों के तौर पर देखा जाता रहा है। लोकसभा में मध्य प्रदेश की 29 सीटों में 6 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इस मामले में अब मुख्य सवाल बच्चों की मौतों की अंतिम सत्यापित संख्या, प्रत्येक मामले में चिकित्सकीय कारण और प्रभावित परिवारों को मिली सरकारी सहायता को लेकर हैं।
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