रेप रोकने के लिए अपराधियों में कानून का खौफ जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली-NCR की तीन घटनाओं पर सुनवाई में सख्त टिप्पणी, कहा- अपराध होने के बाद कार्रवाई नहीं, पहले रोकथाम पर जोर दे पुलिस
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ हाल की यौन अपराधों की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली पुलिस और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि अपराधियों के मन में कानून का ऐसा डर होना चाहिए कि वे अपराध करने से पहले कई बार सोचें। केवल घटना के बाद आरोपियों को पकड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपराध को होने से रोकना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि जरूरत पड़ने पर पुलिस को सख्ती से कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली में महिलाओं को देर रात भी सड़क, सार्वजनिक स्थान या मेट्रो से यात्रा करते समय सुरक्षित महसूस होना चाहिए।
‘सिर्फ कागजों पर व्यवस्था नहीं, जमीन पर दिखे असर’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी और तत्काल प्रतिक्रिया की व्यवस्था को लेकर सवाल किए। कोर्ट का जोर इस बात पर रहा कि पुलिस की मौजूदगी और प्रभावी निगरानी से ऐसे लोगों में भय पैदा होना चाहिए, जो महिलाओं के खिलाफ अपराध करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
अदालत ने कहा कि अपराध हो जाने के बाद की कार्रवाई से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि अपराध होने ही न दिया जाए। इसके लिए पुलिस को संवेदनशील स्थानों की पहचान, निगरानी और पेट्रोलिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाना होगा।
तीन घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में सामने आई तीन गंभीर घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लिया था। इनमें ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही बस में नाबालिग के साथ कथित यौन अपराध, स्वरूप नगर में नाबालिग के साथ गैंगरेप और हत्या तथा कालकाजी के पास आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित गैंगरेप का मामला शामिल है।
बस वाली घटना में वाहन ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक करीब 47 किलोमीटर की दूरी तय करता रहा। कोर्ट ने ऐसे मामलों में पुलिस की निगरानी और समय पर हस्तक्षेप की क्षमता पर सवाल उठाए हैं।
आस्था कुंज मामले में पहले भी सामने आई थीं सुरक्षा संबंधी शिकायतें
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में आस्था कुंज पार्क के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई थी। अदालत के सामने यह बात आई कि आसपास के इलाके में छात्राओं की ओर से पहले भी यौन उत्पीड़न की शिकायतें की गई थीं। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर कोर्ट ने जवाबदेही की जरूरत बताई थी।
2024 में दिल्ली में POCSO के 1,553 मामले
उपलब्ध NCRB आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में दिल्ली में POCSO के 1,553 मामले दर्ज हुए थे। यानी औसतन चार से अधिक मामले प्रतिदिन दर्ज हुए। 2025 के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश: महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल घटना के बाद कार्रवाई करने से सुनिश्चित नहीं होगी। पुलिस और प्रशासन को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिससे अपराध की संभावना वाले स्थानों पर पहले से निगरानी और प्रभावी पुलिसिंग मौजूद रहे।
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