आवास मानवाधिकार है, सभी के लिए पर्याप्त आवास जरूरी: एमिटी में ‘आर्किस्फेयर 2026’ का आयोजन
100 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा, विशेषज्ञों ने किफायती और समावेशी आवास पर रखे विचार
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नोएडा। विश्व वास्तुकला दिवस और विश्व पर्यावास दिवस 2026 के अवसर पर एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग (एसएसएपी) की ओर से एक दिवसीय संगोष्ठी ‘आर्किस्फेयर 2026’ का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘आवास एक मानवाधिकार है, सभी के लिए पर्याप्त आवास’ रहा।
कार्यक्रम में महामाया बालिका इंटर कॉलेज, सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल, मयूर स्कूल, जयंत स्कूल, जेबीएम ग्लोबल स्कूल और एमिटी इंटरनेशनल स्कूल सहित आठ विद्यालयों के 100 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो-वाइस चांसलर डॉ. चंद्रदीप टंडन, एडिशनल प्रो-वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) सुनील खत्री तथा फैकल्टी ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग के डीन डॉ. डी.पी. सिंह ने किया।
आवास, किफायती घर और टिकाऊ शहरों पर चर्चा
संगोष्ठी में ‘आवास एक मानवाधिकार है, सभी के लिए पर्याप्त आवास’ विषय पर विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें देश के प्रतिष्ठित आर्किटेक्ट्स, अर्बन डिजाइनर्स और पॉलिसी विशेषज्ञों ने आवास को मानवाधिकार के रूप में देखने, किफायती एवं समावेशी आवास की जरूरत तथा भविष्य के टिकाऊ शहरों के निर्माण पर विचार साझा किए।
पैनल में दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन के चेयरमैन आर्किटेक्ट आशुतोष अग्रवाल, स्पेस डिजाइनर्स इंटरनेशनल के प्रिंसिपल आर्किटेक्ट डॉ. विशाल मित्तल, डिजाइन एक्शन ग्रुप की अर्बन डिजाइनर डॉ. प्रकृति मेहता, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के सेंटर फॉर अर्बन स्टडीज के पॉलिसी कंसल्टेंट एवं पूर्व प्रमुख डॉ. के.के. पांडे तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स के अर्बन यूथ यूनिट के प्रमुख आर्किटेक्ट लवलेश शर्मा शामिल रहे।
डॉ. विशाल मित्तल ने कहा कि किसी भी परियोजना की योजना बनाते समय आर्किटेक्ट्स को उपयोगकर्ताओं की वास्तविक जरूरतों को केंद्र में रखना चाहिए। आवासीय परियोजनाओं में लोगों की आर्थिक क्षमता और बजट को भी महत्वपूर्ण मानदंड बनाया जाना चाहिए, ताकि आवास वास्तव में किफायती हो। उन्होंने कहा कि समावेशी और टिकाऊ समुदायों के निर्माण के लिए पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण आवास सुनिश्चित करना जरूरी है।
आर्किटेक्ट लवलेश शर्मा ने कहा कि घर प्रत्येक व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकता है। इसलिए समाज के सभी वर्गों के लिए आवास किफायती, सुलभ और आसानी से उपलब्ध होना चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास की लागत उनकी आर्थिक क्षमता के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि घर हासिल करने के लिए उन्हें अन्य आवश्यक जरूरतों से समझौता न करना पड़े।
डॉ. के.के. पांडे ने प्रधानमंत्री आवास योजना को निम्न और निम्न-मध्यम आय वर्ग के लोगों को किफायती एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाएं केवल रहने की मूलभूत आवश्यकता पूरी नहीं करतीं, बल्कि लोगों के जीवन स्तर, सामाजिक सुरक्षा और समग्र कल्याण को बेहतर बनाने में भी योगदान देती हैं।
मानवीय जरूरतों के अनुरूप विकसित हों शहर
संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर डॉ. चंद्रदीप टंडन ने कहा कि शहरों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि मानवीय आवश्यकताओं, स्थिरता, प्रौद्योगिकी और सुविचारित शहरी नियोजन को कितनी प्रभावी ढंग से एक साथ जोड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि ‘आर्किस्फेयर 2026’ जैसी पहल विद्यार्थियों को पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को समझने और समानतापूर्ण, समावेशी एवं सशक्त समुदायों के लिए समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करती है।
प्रो. (डॉ.) सुनील खत्री ने कहा कि आवास की चुनौती से निपटने के लिए नवीन, टिकाऊ और समावेशी दृष्टिकोण जरूरी है, जिसमें लोगों को डिजाइन और नियोजन के केंद्र में रखा जाए। ऐसे मंच विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों को समझने और सामाजिक रूप से उपयोगी, पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार तथा सभी के लिए सुलभ वास्तुशिल्पीय समाधान विकसित करने का अवसर देते हैं।
डॉ. डी.पी. सिंह ने कहा कि आवास मानव गरिमा, सुरक्षा और कल्याण का आधार है। आर्किटेक्ट और प्लानर की जिम्मेदारी है कि ऐसे वातावरण का निर्माण किया जाए जो समावेशी, टिकाऊ और सभी के लिए सुलभ हों। उन्होंने कहा कि ‘आर्किस्फेयर 2026’ युवाओं को वर्तमान आवासीय चुनौतियों के लिए नए समाधान तलाशने और ऐसे शहरों की कल्पना करने का अवसर देता है, जहां प्रत्येक व्यक्ति सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए वास्तुशिल्पीय मॉडल और पोस्टर
संगोष्ठी के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न वास्तुशिल्पीय परियोजनाओं पर आधारित पोस्टर प्रदर्शित किए। इनमें मंदिर, रिट्रीट, कॉरिडोर, कल्चरल विलेज और हैबिटेट सेंटर प्रमुख रहे। विद्यार्थियों ने इन परियोजनाओं में सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक जरूरतों, स्थिरता और पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नए डिजाइन दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
इसके अलावा एसएसएपी के इंस्टीट्यूट-लेवल क्लबों ने नोएडा के चयनित विद्यालयों के समान क्लबों के साथ मिलकर दो इंटर-इंस्टीट्यूशनल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। सस्टेनेबिलिटी इंपैक्ट क्लब की ओर से ‘स्पार्क टैंक’ प्रतियोगिता तथा हेरिटेज एक्सप्लोरेशन क्लब की ओर से ‘संस्कृतिक पोस्टकार्ड’ प्रतियोगिता आयोजित की गई।
इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को स्थिरता, संस्कृति और विरासत से जुड़े विषयों पर रचनात्मक विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिला। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में वास्तुकला को केवल भवन निर्माण तक सीमित न रखते हुए उसे समावेशी, स्मार्ट, टिकाऊ और कार्यात्मक स्थानों के निर्माण के माध्यम के रूप में समझने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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