मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
▪ राजनीति: CJI सूर्यकांत ने राहुल गांधी-खड़गे से मिलने से किया इनकार, विपक्ष आज सुप्रीम कोर्ट तक निकालेगा मार्च ▪ मेरा शहर: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की इको विलेज-2 सोसायटी में पानी का संकट, हजारों निवासियों की दिनचर्या प्रभावित ▪ राजनीति: ओवैसी की योगी और अखिलेश को चुनौती, बोले- ‘बाबा संभल आएं, अखिलेश गोरखपुर जाएं’ ▪ राजनीति: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गैरकानूनी हिरासत में न लें: सुप्रीम कोर्ट ▪ राजनीति: CJP का आज फिर जंतर-मंतर मार्च, दिल्ली में सुरक्षा कड़ी; मेट्रो प्रतिबंध पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई ▪ राजनीति: राहुल गांधी बोले- लोकतंत्र बचाने के लिए सवाल पूछना जरूरी, चेन्नई में युवाओं से किया संवाद ▪ राजनीति: दिल्ली में CJP का प्रदर्शन फिर जारी रखने का ऐलान, 7 हजार लोगों को हिरासत में लेने का दावा ▪ राजनीति: दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से पहले सख्ती, 600 समर्थक हिरासत में; जंतर-मंतर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग
12 अक्तूबर 2026 | भरोसेमंद खबरें, सीधे आपके शहर से
अंक: 12 Oct 2026
Unplug India

भरोसेमंद खबरें, सीधे आपके शहर से

आज का अखबार पढ़ें

74 रुपये का इंजेक्शन बिक रहा है 4980 में, जांच में खुलासा

न्यूज़रूम डेस्क • • 3 मिनट पढ़ें
74 रुपये का इंजेक्शन बिक रहा है 4980 में, जांच में खुलासा

प्रदेश में मरीजों से खुलेआम चल रही है लूट

उत्तर प्रदेश में एफएसडीए की जांच में दवाओं की खरीद कीमत और एमआरपी में बड़ा अंतर सामने आया, 74 रुपये का इंजेक्शन 4980 रुपये में बिकने का मामला भी सामने आया

अनप्लग इंडिया। डेस्क

लखनऊ, एजेंसी। अस्पतालों में दवाओं की ऊंची कीमतों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मेडिकल कॉलेजों और निजी अस्पतालों की 214 फार्मेसियों की जांच में 36 दवाओं की खरीद कीमत से 10 गुना से भी अधिक कीमत वसूले जाने का मामला सामने आया है। कुछ दवाओं में यह अंतर 67 गुना तक पाया गया।

बैक्टीरियल संक्रमण में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमाइक्सिन-बी इंजेक्शन की खरीद कीमत 74.09 रुपये थी, जबकि एमआरपी 4980.94 रुपये मिली। यानी मरीजों को यह इंजेक्शन खरीद कीमत से करीब 67 गुना अधिक कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा था। यह खुलासा उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में हुआ है।

130 दवाओं का किया गया विश्लेषण

एफएसडीए की ओर से जुटाए गए आंकड़ों में 130 दवाओं का विश्लेषण किया गया। इसमें उपलब्ध दवाओं की खरीद दर और पैकेट पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में बड़ा अंतर मिला।

जांच में एंटीबायोटिक, एंटीफंगल और अन्य जटिल चिकित्सकीय स्थितियों में इस्तेमाल होने वाली कई इंजेक्शन वाली दवाएं भी शामिल थीं। लिवर की गंभीर बीमारी में इस्तेमाल होने वाले एक इंजेक्शन की खरीद कीमत 56 रुपये मिली, जबकि उसकी एमआरपी 3050 रुपये पाई गई।

गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाले मेरोपेनेम 1 ग्राम के विभिन्न उत्पादों में भी खरीद कीमत और एमआरपी का अनुपात एक जैसा नहीं मिला।

मेडिकल उपकरणों की कीमत में भी बड़ा अंतर

जांच में केवल दवाओं की कीमतों में ही अंतर नहीं मिला, बल्कि मेडिकल उपकरणों की कीमत में भी भारी अंतर सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक एक उपकरण की खरीद कीमत 6.40 रुपये थी, जबकि एमआरपी 163 रुपये पाई गई। यह खरीद कीमत के मुकाबले करीब 25 गुना अधिक है।

एक अन्य मेडिकल उपकरण की खरीद कीमत 20.95 रुपये के मुकाबले एमआरपी 500 रुपये मिली। विभागीय विश्लेषण में ऊंचे व्यापारिक लाभ और छूट की गुंजाइश बनाए रखने के लिए एमआरपी ऊंची रखने की आशंका जताई गई है।

जीवनरक्षक दवाओं में भी अंतर

जांच में जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में भी काफी अंतर पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि दवाओं के अलावा मेडिकल उपकरणों की कीमत में भी बड़ा अंतर मिला है।

लगातार बढ़ रही दवाओं की कीमतों के बीच निजी अस्पतालों और फार्मेसियों में मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। खासकर गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

जांच के बाद सामने आए आंकड़ों ने दवाओं की कीमतों और उनकी वास्तविक खरीद लागत के बीच बड़े अंतर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों को राहत देने के लिए दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी की जरूरत सामने आई है।

यह भी पढ़ें