एमिटी में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: कला और तकनीक के मेल से रचनात्मकता के नए अवसरों पर विशेषज्ञों ने की चर्चा
ICIVA-2026 में देश-विदेश के कलाकारों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने रखे विचार; एनिमेशन, डिजिटल आर्ट, डिजाइन और भारतीय पौराणिक कथाओं की रचनात्मक संभावनाओं पर हुआ मंथन
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नोएडा। एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स की ओर से बुधवार को विजुअल आर्ट्स में नवाचार पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ICIVA-2026 का आयोजन किया गया। सम्मेलन का विषय ‘कला और डिजाइन की नई कल्पना : रचनात्मकता और तकनीक के बीच सेतु’ रहा। इसमें देश-विदेश के कलाकारों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने कला और तकनीक को साथ लेकर चलने, पारंपरिक कलात्मक सिद्धांतों को आधुनिक डिजिटल माध्यमों से जोड़ने और रचनात्मक अभिव्यक्ति के नए रास्ते तलाशने पर जोर दिया।
सम्मेलन में असम यूनिवर्सिटी (सिलचर), वनस्थली विद्यापीठ (राजस्थान), कॉलेज ऑफ आर्ट (नई दिल्ली), दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (आगरा), दिल्ली विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रख्यात कलाकार कविता नायर, एमिटी स्कूल ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी और एमिटी स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स की चेयरपर्सन दिव्या चौहान, अमेरिका की वेस्टर्न कैरोलिना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन जिचा, राज कॉमिक्स के सह-संस्थापक संजय गुप्ता, एकेजे मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अतुल सिन्हा और एमिटी विश्वविद्यालय के ग्रुप एडिशनल प्रो-वाइस चांसलर डॉ. प्रदीप जोशी ने किया।
तकनीक कलाकार की मौलिकता की जगह नहीं ले सकती : कविता नायर
प्रख्यात कलाकार कविता नायर ने कहा कि कला रचनात्मकता और नवाचार की बुनियाद है। यह विचारों, कल्पनाओं और मानवीय भावनाओं को अभिव्यक्ति देती है, जबकि तकनीक इन विचारों को वास्तविकता में बदलने के साधन उपलब्ध कराती है।
उन्होंने कहा कि तकनीक किसी कलाकार की मौलिकता, संवेदनशीलता और रचनात्मक दृष्टि का स्थान नहीं ले सकती। हालांकि कलाकारों को नई तकनीकों के प्रति खुला रहना चाहिए और अपने कौशल को लगातार विकसित करना चाहिए। भविष्य कला और तकनीक में से किसी एक को चुनने में नहीं, बल्कि दोनों के बेहतर तालमेल में है।
फैशन और डिजाइन के छात्रों को नई तकनीक अपनाने की सलाह
एमिटी स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स और एमिटी स्कूल ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की चेयरपर्सन दिव्या चौहान ने कहा कि सही दृष्टिकोण, निरंतर सीखना और उचित मार्गदर्शन किसी व्यक्ति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के दौर में फैशन और डिजाइन के क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए नए रुझानों से अपडेट रहना और नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है। ऐसे सम्मेलन छात्रों को व्यावहारिक अनुभव हासिल करने, विशेषज्ञों से संवाद करने और उद्योग की बदलती जरूरतों को समझने का अवसर देते हैं।
पारंपरिक कला और डिजिटल तकनीक के मेल पर जोर
अमेरिका की वेस्टर्न कैरोलिना यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ आर्ट एंड डिजाइन के प्रोफेसर एमेरिटस जॉन जिचा ने ऑनलाइन संबोधन में कला, डिजाइन और तकनीक के बदलते संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने पारंपरिक कलात्मक सिद्धांतों को आधुनिक डिजिटल उपकरणों के साथ जोड़ने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने छात्रों को कला की बुनियादी समझ मजबूत करने के साथ-साथ ऐसी नई तकनीकों और तरीकों को तलाशने के लिए प्रेरित किया, जिनसे दृश्य संचार, डिजाइन और रचनात्मक अभिव्यक्ति की संभावनाएं बढ़ सकें।
भारतीय पौराणिक कथाओं से बन सकते हैं नए सुपरहीरो : संजय गुप्ता
राज कॉमिक्स के सह-संस्थापक संजय गुप्ता ने एनिमेशन को कला और कहानी कहने का प्रभावशाली माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि एनिमेशन के जरिए कल्पना, संस्कृति और इतिहास को जीवंत किया जा सकता है।
उन्होंने भारतीय पौराणिक कथाओं, लोककथाओं और सांस्कृतिक आख्यानों को नए किरदारों के निर्माण का बड़ा स्रोत बताया। उनके मुताबिक, भारतीय परंपराओं में ऐसे अनेक पात्र और कहानियां मौजूद हैं, जिनसे मौलिक और यादगार एनिमेशन कैरेक्टर तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने छात्रों को अपनी कहानी कहने की कला विकसित करने और नए पात्र गढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
लोककथाएं और पौराणिक कथाएं आज भी रचनाकारों की प्रेरणा
एकेजे मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अतुल सिन्हा ने कहा कि लोककथाएं किसी समाज की परंपराओं, संस्कृति और सामूहिक अनुभवों से जुड़ी होती हैं। पीढ़ियों से आगे बढ़ती ये कहानियां मनोरंजन के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान, मूल्यों और सामाजिक समझ को भी सुरक्षित रखती हैं।
उन्होंने कहा कि लोककथाओं और पौराणिक कथाओं ने दुनिया भर में कहानी कहने की परंपराओं को आकार दिया है। आज भी एनिमेशन, सिनेमा, कॉमिक्स और डिजिटल मीडिया जैसे माध्यमों में इनसे प्रेरणा ली जा रही है। पारंपरिक कहानियों को आधुनिक माध्यमों से प्रस्तुत कर युवा रचनाकार सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचा सकते हैं।
शोध और उद्योग के बीच संवाद का मंच हैं ऐसे सम्मेलन
एमिटी विश्वविद्यालय के ग्रुप एडिशनल प्रो-वाइस चांसलर डॉ. प्रदीप जोशी ने कहा कि विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए विचारों और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के मंच उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विभिन्न विषयों के बीच संवाद बढ़ाते हैं और शिक्षा जगत तथा उद्योग के सहयोग को मजबूत करते हैं। इससे छात्रों को नई तकनीकों, उभरते रुझानों और पेशेवर कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलता है।
सम्मेलन के दौरान तीन प्रमुख विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें ‘रचनात्मक अभ्यास में नई पद्धतियां और उभरते प्रतिमान’, ‘समकालीन कला और डिजाइन अभ्यास : आलोचनात्मक दृष्टिकोण और उभरते प्रतिमान’ तथा ‘प्रौद्योगिकी, कला और डिजाइन के प्रति अंतर-विषयक दृष्टिकोण’ शामिल रहे।
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