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12 अक्तूबर 2026 | भरोसेमंद खबरें, सीधे आपके शहर से
अंक: 12 Oct 2026
Unplug India

भरोसेमंद खबरें, सीधे आपके शहर से

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क्यों जरूरी था — ‘अनप्लग इंडिया’

न्यूज़रूम डेस्क • • 6 मिनट पढ़ें
क्यों जरूरी था — ‘अनप्लग इंडिया’

संपादकीय

प्रिय पाठकों,

हर दौर की पत्रकारिता के सामने कुछ सवाल खड़े होते हैं। सवाल यह नहीं कि खबरें कितनी हैं, बल्कि यह है कि खबरों के बीच सच कितना है?

आज हम ऐसे समय में जी रहे हैं, जब सूचना हमारे चारों ओर है। मोबाइल की स्क्रीन खोलते ही खबरों की बाढ़ आ जाती है। सोशल मीडिया पर हर मिनट कुछ नया सामने आता है। हर घटना कुछ ही क्षणों में वायरल हो जाती है। लेकिन इस तेज रफ्तार में एक चीज लगातार पीछे छूटती जा रही है—खबर को समझने का समय और अवसर।

इसी जरूरत से जन्म हुआ है—‘अनप्लग इंडिया’ का।

अनप्लग इंडिया का मतलब क्या है?

‘Unplug’ का सामान्य अर्थ है—किसी चीज से थोड़ी देर के लिए अलग होना।

लेकिन हमारे लिए ‘अनप्लग’ का अर्थ खबरों से दूर होना नहीं है। इसका अर्थ है—सूचनाओं के शोर से थोड़ा अलग होकर खबर को समझना, सवाल करना और उसके पीछे छिपे सच तक पहुंचने की कोशिश करना।

अनप्लग इंडिया यानी—शोर से अलग, सवालों के करीब।

क्यों हुई ‘अनप्लग इंडिया’ की स्थापना?

इस अखबार की स्थापना के पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य खबरों की भीड़ में पाठक को विश्वसनीय, तथ्यपरक और संदर्भपूर्ण पत्रकारिता उपलब्ध कराना है।

आज समस्या यह नहीं है कि लोगों तक खबरें नहीं पहुंच रहीं। समस्या यह है कि एक ही घटना के बारे में इतनी अलग-अलग सूचनाएं और दावे सामने आते हैं कि आम पाठक के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि तथ्य क्या है, दावा क्या है और राय क्या है।

‘अनप्लग इंडिया’ इसी अंतर को कम करने की कोशिश है।

हमारा उद्देश्य केवल खबर पहुंचाना नहीं, बल्कि खबर की तह तक पहुंचना है।

हम पूछेंगे—

क्या हुआ?
क्यों हुआ?
इसके पीछे कौन-से तथ्य हैं?
इसका असर किस पर पड़ेगा?
और जो बताया जा रहा है, उसमें कितना सच है?

हम मानते हैं कि लोकतंत्र में जागरूक नागरिक के लिए सूचना जरूरी है, लेकिन सही सूचना उससे भी ज्यादा जरूरी है।

पत्रकारिता को शोर नहीं, भरोसा बनाना होगा

आज समाचार माध्यमों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है—तेजी और विश्वसनीयता के बीच संतुलन।

हर खबर सबसे पहले देने की होड़ में कई बार संदर्भ पीछे छूट जाता है। सुर्खियां खबर से बड़ी हो जाती हैं और बहस तथ्य से आगे निकल जाती है।

‘अनप्लग इंडिया’ का उद्देश्य इस दौड़ से अलग एक ऐसा मंच तैयार करना है जहां खबर की गति से ज्यादा उसकी विश्वसनीयता महत्वपूर्ण हो।

हम सनसनी पैदा करने के बजाय सवाल उठाना चाहेंगे।

हम अफवाहों को खबर का रूप देने के बजाय उनकी पड़ताल करना चाहेंगे।

हम केवल बयान प्रकाशित करने के बजाय उसके तथ्य और संदर्भ को भी सामने रखना चाहेंगे।

और जहां किसी मुद्दे पर मतभेद होंगे, वहां पाठक को अलग-अलग पक्षों को समझने का अवसर दिया जाएगा।

क्योंकि हमारा उद्देश्य पाठक को किसी निष्कर्ष तक पहुंचाना नहीं, बल्कि उसे अपना निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त तथ्य देना है।

स्थानीय भारत को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाना

‘अनप्लग इंडिया’ की स्थापना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि भारत की कहानी केवल बड़े शहरों और बड़ी सुर्खियों तक सीमित न रहे।

किसी गांव की सड़क, किसी छोटे शहर का अस्पताल, किसी युवा का रोजगार, किसी किसान की समस्या, किसी छोटे व्यापारी की चुनौती या किसी स्थानीय प्रशासनिक निर्णय का प्रभाव—ये सभी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितनी राष्ट्रीय स्तर की बड़ी खबरें।

हम स्थानीय मुद्दों को केवल स्थानीय खबर मानकर छोड़ना नहीं चाहते।

क्योंकि कई बार स्थानीय समस्या ही राष्ट्रीय तस्वीर का छोटा लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

नई पीढ़ी और नई पत्रकारिता के बीच पुल

‘अनप्लग इंडिया’ का एक उद्देश्य यह भी है कि पारंपरिक पत्रकारिता की विश्वसनीयता और डिजिटल युग की गति एवं पहुंच के बीच एक बेहतर पुल बनाया जाए।

हम प्रिंट की गंभीरता को डिजिटल माध्यमों की सहजता के साथ जोड़ने का प्रयास करेंगे।

लंबी रिपोर्ट हो या छोटी खबर, जमीनी पड़ताल हो या किसी बड़े मुद्दे का विश्लेषण—हम कोशिश करेंगे कि भाषा सरल हो, तथ्य स्पष्ट हों और पाठक को अनावश्यक शोर से बचाते हुए मुद्दे की वास्तविक तस्वीर दिखाई जाए।

इस पहल के पीछे रिंकू यादव की पत्रकारिता यात्रा

‘अनप्लग इंडिया’ के संस्थापक रिंकू यादव ने वर्ष 2000 में नोएडा से दैनिक अथाह समाचार पत्र के साथ पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद शाह टाइम्स और पब्लिक एशिया के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया, दैनिक भास्कर और हिंदी पायनियर जैसे समाचार संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप को करीब से देखा।

प्रिंट से टेलीविजन और फिर डिजिटल तथा सोशल मीडिया तक पत्रकारिता के इस परिवर्तन ने समाचारों के सामने नई संभावनाएं तो पैदा कीं, लेकिन नई चुनौतियां भी खड़ी कीं।

इसी लंबे अनुभव से निकला एक सवाल ‘अनप्लग इंडिया’ की स्थापना की प्रेरणा बना—

जब सूचनाएं पहले से कहीं ज्यादा हैं, तो क्या पाठक को ऐसी पत्रकारिता की जरूरत नहीं है जो उसे सूचना के साथ उसका संदर्भ और सत्यापन भी दे?

‘अनप्लग इंडिया’ उसी सवाल का एक प्रयास है।

हमारा संकल्प

हम यह दावा नहीं करते कि हमारे पास हर सवाल का जवाब होगा।

लेकिन हमारा प्रयास होगा कि हर जरूरी सवाल पूछा जाए।

हम यह दावा नहीं करते कि हम कभी गलती नहीं करेंगे।

लेकिन हमारी कोशिश होगी कि गलती होने पर उसे स्वीकारने और सुधारने का साहस भी हो।

हम किसी व्यक्ति, संस्था, विचार या सत्ता के पक्ष में खड़े होने के लिए नहीं आए हैं।

हमारा पक्ष है—

तथ्य का।
सवाल का।
पाठक के अधिकार का।
और ऐसी पत्रकारिता का, जिस पर भरोसा किया जा सके।

‘अनप्लग इंडिया’ की स्थापना का असली उद्देश्य इसी भरोसे को मजबूत करना है।

क्योंकि हमारा मानना है—

लोकतंत्र में शोर बहुत हो सकता है, लेकिन सच को सुनने के लिए जगह हमेशा बची रहनी चाहिए।

और वही जगह बनाने की एक कोशिश है—

अनप्लग इंडिया

**शोर से अलग।

सवालों के करीब।
तथ्यों के साथ।
और सच की तलाश में।**

    अनीता यादव
संपादक, अनप्लग इंडिया

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