टाटा मोटर्स और स्टेलेंटिस की साझेदारी का विस्तार, भारत में विकसित होंगी 50 से अधिक देशों के लिए गाड़ियां
वाहन तकनीक और उत्पाद विकास में हुआ बड़ा समझौता, पुणे के रंजनगांव स्थित संयुक्त संयंत्र में होगा निर्माण; वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में भारत की भूमिका मजबूत करने पर जोर
अनप्लग इंडिया। डेस्क
मुंबई/पुणे। भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती देने की दिशा में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड और वैश्विक वाहन निर्माता स्टेलेंटिस ने अपनी रणनीतिक साझेदारी का विस्तार किया है। दोनों कंपनियों ने उन्नत वाहन तकनीक, व्हीकल आर्किटेक्चर और उत्पाद विकास में सहयोग के लिए एक निर्णायक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत भारत में विकसित तकनीक का इस्तेमाल 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरतों के अनुरूप वाहन तैयार करने में किया जाएगा।
यह समझौता फरवरी 2026 में दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को आगे बढ़ाता है। नई व्यवस्था के तहत टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV) और उसकी सहायक कंपनी टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड (TPEM) अपनी उन्नत वाहन तकनीक और वाहन आर्किटेक्चर तक स्टेलेंटिस को पहुंच उपलब्ध कराएंगी। इसके आधार पर स्टेलेंटिस की इंजीनियरिंग और उत्पाद विकास विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न वैश्विक बाजारों के लिए वाहन विकसित किए जाएंगे।
समझौते के अनुसार, इन वाहनों का निर्माण भारत में फिएट इंडिया ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड (FIAPL) के संयंत्र में किया जाएगा। FIAPL, टाटा मोटर्स और स्टेलेंटिस का 50:50 हिस्सेदारी वाला संयुक्त उपक्रम है।
भारत बनेगा वैश्विक वाहन विकास और निर्यात का अहम केंद्र
इस साझेदारी का प्रमुख उद्देश्य भारत की इंजीनियरिंग क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और बड़े पैमाने पर उत्पादन की सुविधाओं का लाभ उठाकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए प्रतिस्पर्धी वाहन तैयार करना है। दोनों कंपनियां ऐसे उत्पाद विकसित करने की दिशा में काम करेंगी, जो अलग-अलग देशों के ग्राहकों की जरूरतों, नियामकीय मानकों और परिचालन परिस्थितियों के अनुरूप हों।
भारत में वाहन निर्माण की स्थापित क्षमताओं और इंजीनियरिंग प्रतिभा का इस्तेमाल कर वैश्विक बाजारों के लिए उत्पाद तैयार करने से निर्यात की संभावनाओं को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही, यह सहयोग भारत को वैश्विक ऑटोमोबाइल कंपनियों के उत्पादन और उत्पाद विकास नेटवर्क में महत्वपूर्ण स्थान दिलाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। फरवरी 2026 में हुए शुरुआती समझौते में भारत और विदेशों में विनिर्माण, इंजीनियरिंग तथा आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया था। अब नए निर्णायक समझौते के जरिए सहयोग को विशेष रूप से वाहन तकनीक और आर्किटेक्चर के विकास तक विस्तारित किया गया है।
दो दशक से अधिक पुरानी साझेदारी को मिली नई दिशा
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शैलेश चंद्र ने कहा कि स्टेलेंटिस के साथ कंपनी की साझेदारी दो दशकों से अधिक समय से आपसी विश्वास और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं पर आधारित रही है।
उन्होंने कहा कि नया समझौता इस संबंध को उन्नत वाहन तकनीक और व्हीकल आर्किटेक्चर तक विस्तार देता है। यह टाटा मोटर्स की तकनीकी क्षमताओं और प्रतिस्पर्धात्मक ताकत को भी दर्शाता है। उनके अनुसार, स्टेलेंटिस इन क्षमताओं का इस्तेमाल वैश्विक बाजारों के लिए वाहन विकसित करने में करेगी। शैलेश चंद्र ने कहा कि दोनों कंपनियों की विशेषज्ञता को एक साथ लाकर भारत में ऐसे वाहन तैयार करने का अवसर मिलेगा, जिन्हें देश के साथ-साथ दुनिया के अन्य बाजारों में भी ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप उपलब्ध कराया जा सके।
स्टेलेंटिस की वैश्विक विशेषज्ञता का मिलेगा लाभ
स्टेलेंटिस के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के मुख्य परिचालन अधिकारी तियानशु शिन ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कंपनी की रणनीति में साझेदारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि टाटा मोटर्स की भारत में मजबूत तकनीकी क्षमताओं और स्टेलेंटिस की वैश्विक उत्पाद विकास विशेषज्ञता तथा बाजार पहुंच को एक साथ लाने से प्रतिस्पर्धी वाहन विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात की संभावनाओं का विस्तार करने में मदद मिलेगी।उनके अनुसार, यह समझौता भारत को स्टेलेंटिस के लिए रणनीतिक विनिर्माण और उत्पाद विकास केंद्र के रूप में और मजबूत करता है।
रंजनगांव संयंत्र में होगा वाहनों का निर्माण
समझौते के तहत विकसित किए जाने वाले वाहनों का निर्माण पुणे के रंजनगांव में स्थित फिएट इंडिया ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के एकीकृत वाहन एवं पावरट्रेन संयंत्र में किया जाएगा।
यह संयुक्त उपक्रम पहले से ही स्टेलेंटिस के जीप कंपास, मेरिडियन, ग्रैंड चेरोकी और रैंगलर जैसे मॉडलों के साथ टाटा मोटर्स की नेक्सॉन, अल्ट्रोज और कर्व जैसी गाड़ियों का निर्माण करता है। संयंत्र में उन्नत इंजन, ट्रांसमिशन और ट्रैक्शन मोटर का उत्पादन भी किया जाता है।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस संयंत्र से जापान सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में वाहनों का निर्यात भी किया जाता है। नई साझेदारी के तहत वैश्विक बाजारों के लिए अतिरिक्त उत्पाद विकसित करने की दिशा में इसी विनिर्माण और इंजीनियरिंग क्षमता का लाभ उठाया जाएगा।
14 वैश्विक ऑटोमोबाइल ब्रांडों का अनुभव
स्टेलेंटिस के पास यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में व्यापक मौजूदगी है। कंपनी के पोर्टफोलियो में जीप, फिएट, सिट्रोएन, प्यूजो, ओपल, मासेराती, अल्फा रोमियो, क्रिसलर और अन्य प्रमुख ऑटोमोबाइल ब्रांड शामिल हैं।
दूसरी ओर, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स की पहचान भारतीय बाजार में कारों और एसयूवी के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों, कनेक्टेड तकनीक और भविष्य की मोबिलिटी से जुड़े समाधानों के विकास के लिए है। दोनों कंपनियों की तकनीकी क्षमताओं, उत्पाद विकास के अनुभव और विनिर्माण संसाधनों का संयुक्त इस्तेमाल इस साझेदारी का आधार है।
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए क्या हैं मायने?
यह समझौता भारत में वाहन निर्माण को घरेलू बाजार की जरूरतों से आगे बढ़ाकर वैश्विक मांग से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भारत में विकसित तकनीक और यहां उपलब्ध उत्पादन क्षमताओं का इस्तेमाल 50 से अधिक देशों के लिए वाहन तैयार करने में किया जाएगा। इससे भारत की वैश्विक विनिर्माण और निर्यात क्षमता को बढ़ावा देने के अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, समझौते के तहत विकसित होने वाले नए वाहनों के नाम, उनकी लॉन्च समयसीमा, उत्पादन की मात्रा और निर्यात के विस्तृत लक्ष्य की जानकारी जारी बयान में नहीं दी गई है।
कुल मिलाकर, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और स्टेलेंटिस की विस्तारित साझेदारी भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र की तकनीकी क्षमताओं को वैश्विक उत्पाद विकास से जोड़ने का प्रयास है। दोनों कंपनियों का लक्ष्य अपनी-अपनी विशेषज्ञता का लाभ उठाकर भारत में ऐसे वाहन विकसित और निर्मित करना है, जो घरेलू ग्राहकों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरतों को भी पूरा कर सकें।
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