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अंक: 12 Oct 2026
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SIR विवाद पर विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च, राहुल-अखिलेश समेत 11 नेताओं ने दाखिल की याचिका

Rinku Yadav • • 7 मिनट पढ़ें
SIR विवाद पर विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च, राहुल-अखिलेश समेत 11 नेताओं ने दाखिल की याचिका

10 विपक्षी दलों के नेताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए सवाल, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी मोर्चा; राहुल गांधी बोले— लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट हैं विपक्षी दल

रिंकू यादव
अनप्लग इंडिया।

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर विपक्ष ने सोमवार को दिल्ली में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेता सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने निकले। प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा व्यवस्था के चलते अदालत से करीब 500 मीटर पहले रोक दिया गया। हालांकि, बाद में विपक्ष के 10 राजनीतिक दलों के 11 नेताओं ने SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विपक्ष ने निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों को लेकर न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाने के साथ सार्वजनिक विरोध भी किया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मताधिकार से जुड़े सवालों पर निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए। दूसरी ओर, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ते हुए पलटवार किया है।

राहुल-अखिलेश समेत 11 नेता याचिकाकर्ता

SIR से जुड़े विवाद में याचिका दाखिल करने वाले नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संजय राउत, CPI(M) के एम.ए. बेबी, CPI के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी, NCP (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई.टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं।

इस तरह 10 विपक्षी दलों के 11 नेताओं ने मिलकर निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे को न्यायिक स्तर पर उठाया। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका है और इससे पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।

CJI से मिलने का समय मांगा, याचिका दाखिल करने की सलाह मिली

विपक्षी सांसदों ने रविवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था। वे निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने मिलने से इनकार करते हुए नेताओं को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करने के लिए कहा।

इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सोमवार को मार्च निकालने का फैसला किया। राहुल गांधी ने मार्च से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा अभियान बताया। उन्होंने विपक्षी मार्च की तुलना शिवजी की बारात से करते हुए कहा कि इसमें कोई भी शामिल हो सकता है।

विपक्षी नेताओं ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के चलते उन्हें अदालत से लगभग 500 मीटर पहले रोक दिया गया। इसके बाद निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

राहुल गांधी बोले— लोकतंत्र की रक्षा राजनीति से ऊपर

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करना है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के कारण मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी INDIA ब्लॉक के मार्च के दौरान लोकतंत्र की रक्षा को राजनीति से ऊपर बताया। उन्होंने मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवाल उठाते हुए कहा कि नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा जरूरी है।

राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्षी दल लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए एकजुट हुए हैं। वहीं, अखिलेश यादव ने आंदोलन जारी रखने की बात कही। उन्होंने भाजपा और निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। ये आरोप विपक्ष के राजनीतिक पक्ष का हिस्सा हैं; इनकी पुष्टि या खंडन संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना है।

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को लेकर भी चर्चा

राहुल गांधी की कानूनी टीम ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में शाम 4:30 बजे की समय-सीमा के बाद याचिका दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने की मांग की थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हुई।

सुप्रीम कोर्ट की ई-फाइलिंग व्यवस्था के जरिए याचिका दाखिल करने का विकल्प भी मौजूद है। इस मामले में याचिका की सुनवाई, अदालत की टिप्पणियों और आगे होने वाली कार्रवाई के संबंध में अंतिम स्थिति न्यायालय की आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट होगी।

भाजपा का पलटवार— हार की खीझ में आंदोलन कर रही कांग्रेस

विपक्ष के मार्च और निर्वाचन आयोग पर लगाए गए आरोपों के बीच भाजपा ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार चुनावों में हार का सामना कर रही है और अपनी हार का दोष संवैधानिक संस्थाओं पर मढ़ती है। उनके मुताबिक, कांग्रेस की चुनावी स्थिति के लिए निर्वाचन आयोग नहीं, बल्कि पार्टी का नेतृत्व जिम्मेदार है।

भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को शोर नहीं, सच चाहिए और आरोपों के बजाय सबूत पेश किए जाने चाहिए। भाजपा का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं पर राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखी जानी चाहिए।

इस प्रकार SIR और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर विपक्ष तथा सत्तारूढ़ दल के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर भी सवाल

इसी घटनाक्रम के बीच दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थलों को लेकर भी चर्चा तेज हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का निर्णय लिया है। एक समिति की सिफारिश के आधार पर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को प्रदर्शन स्थलों के रूप में निर्धारित किए जाने की बात सामने आई है।

इस फैसले का विरोध प्रदर्शनों की अनुमति और नागरिकों के शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह महत्वपूर्ण प्रश्न है। किसी भी स्थिति में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

अब न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी निगाहें

SIR को लेकर विपक्ष का यह कदम निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और नागरिकों के मताधिकार से जुड़े व्यापक सवाल सामने लाता है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा है, लेकिन यह भी जरूरी है कि पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहें और किसी भी शिकायत का निष्पक्ष तरीके से समाधान हो।

विपक्ष ने अपने आरोपों को न्यायालय के समक्ष रखने का रास्ता चुना है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया है। अब इस विवाद में आगे की दिशा याचिका में उठाए गए मुद्दों, प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायालय की कार्रवाई से तय होगी।

लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना और संवैधानिक संस्थाओं से जवाब मांगना राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। साथ ही, गंभीर आरोपों की जांच तथ्यों और कानून के आधार पर होना जरूरी है। ऐसे में पूरे देश की नजर इस बात पर रहेगी कि SIR से जुड़े सवालों पर न्यायिक प्रक्रिया क्या रुख अपनाती है और मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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