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तमिलनाडु की थेनी जेल से 17 विचाराधीन कैदी फरार, चार गिरफ्तार: पुलिसकर्मियों पर हमले के बाद भागे, 13 की तलाश में 17 टीमें तैनात

Rinku Yadav • • 5 मिनट पढ़ें
तमिलनाडु की थेनी जेल से 17 विचाराधीन कैदी फरार, चार गिरफ्तार: पुलिसकर्मियों पर हमले के बाद भागे, 13 की तलाश में 17 टीमें तैनात

फरार कैदियों की तलाश में पुलिस ने चलाया बड़ा सर्च ऑपरेशन, हमले में तीन पुलिसकर्मी घायल, एक की हालत गंभीर, डिंडीगुल में 16 चेकपोस्ट बनाकर वाहनों की जांच शुरू, मदुरै और केरल तक अलर्ट, फरार कैदियों की तस्वीरें साझा, 1995 में वेल्लोर जेल से 43 LTTE संदिग्धों के फरार होने की घटना की याद ताजा, एक ही सेल से 17 कैदियों के भागने पर जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

अनप्लग इंडिया। डेस्क

चेन्नई/थेनी। तमिलनाडु के थेनी जिले में स्थित थेक्कमपट्टी सब-जेल से सोमवार, 26 अक्टूबर की देर रात 17 विचाराधीन कैदियों के एक साथ फरार होने से पुलिस और जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आरोप है कि कैदियों ने पहले एक साथी की तबीयत खराब होने का बहाना बनाया और मदद के लिए पहुंचे जेलकर्मियों पर हमला कर दिया। इसके बाद सभी 17 कैदी जेल से भाग निकले। घटना के बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, चार फरार कैदियों को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी 13 की तलाश जारी है।

पुलिस ने फरार कैदियों को पकड़ने के लिए 17 विशेष टीमें बनाई हैं। आसपास के जिलों में अलर्ट जारी करने के साथ वाहनों की जांच और संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है। इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था और एक ही सेल में बंद 17 कैदियों के एक साथ भाग निकलने को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बीमार होने का बहाना बनाकर जेलकर्मियों को बुलाया

प्रारंभिक पुलिस जानकारी के अनुसार, थेनी जिले के अंदिपट्टी के पास स्थित थेक्कमपट्टी जेल में सभी 17 कैदी एक ही सेल में बंद थे। सोमवार देर रात जेल कर्मचारियों को सूचना दी गई कि सेल में बंद एक कैदी की तबीयत खराब हो गई है और उसे दौरे पड़ रहे हैं।

सूचना मिलने पर जेल कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी सेल का दरवाजा खोलकर अंदर पहुंचे। आरोप है कि इसी दौरान कैदियों ने उन पर अचानक हमला कर दिया। कर्मचारियों के संभलने से पहले ही कैदी वहां से निकलकर फरार हो गए।

जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कैदियों ने इस घटना की योजना पहले से बनाई थी या नहीं। साथ ही, जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी में किसी तरह की चूक हुई थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

तीन पुलिसकर्मी घायल, एक के सिर में गंभीर चोट

कैदियों के हमले में तीन पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें थेनी जिला जेल में तैनात ग्रेड-II पुलिसकर्मी थंगापांडी भी शामिल हैं, जिनके सिर में चोट आई।

उन्हें जी. विलाक्कु स्थित सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो अन्य जेलकर्मियों को भी मामूली चोटें आईं।

घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जेल परिसर का निरीक्षण किया। थेनी के पुलिस अधीक्षक के.एस. प्रवीण गौतम तथा दक्षिण क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक विजयेंद्र बिदारी ने मामले की जांच और फरार कैदियों को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान की निगरानी की।

चार कैदी गिरफ्तार, 13 अब भी फरार

फरार कैदियों की तलाश के लिए पुलिस ने 17 विशेष टीमें गठित की हैं। शुरुआती रिपोर्टों में एक कैदी की गिरफ्तारी की जानकारी आई थी। बाद की रिपोर्टों में चार कैदियों को पकड़े जाने की पुष्टि की गई।

गिरफ्तार बताए गए चार कैदियों के नाम प्रवीण, सिलंबरासन, राजकुमार और राजा सिकंदर हैं। बाकी 13 कैदियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान जारी है।

पुलिस ने फरार आरोपियों की तस्वीरें विभिन्न थानों और संबंधित अधिकारियों के बीच साझा की हैं, ताकि उनकी पहचान करने और संभावित ठिकानों तक पहुंचने में मदद मिल सके।

16 स्थानों पर चेकपोस्ट, पड़ोसी जिलों में अलर्ट

फरार कैदियों के जिले से बाहर निकलने की आशंका को देखते हुए आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पड़ोसी डिंडीगुल जिले में 16 स्थानों पर चेकपोस्ट स्थापित किए गए हैं। यहां से गुजरने वाले वाहनों की जांच की जा रही है।

पुलिस ने मदुरै और केरल के इडुक्की जिले के अधिकारियों को भी घटना की जानकारी दी है। संभावित आवाजाही के रास्तों पर निगरानी बढ़ाई गई है, ताकि फरार कैदियों को दूसरे जिलों या राज्य की सीमा तक पहुंचने से पहले पकड़ा जा सके।

पुलिस का तलाशी अभियान केवल जेल के आसपास तक सीमित नहीं है। फरार आरोपियों की पहचान, संभावित ठिकानों और उनके भागने के रास्तों का पता लगाने के लिए अलग-अलग टीमों को लगाया गया है।

1995 में वेल्लोर जेल से फरार हुए थे 43 LTTE संदिग्ध

तमिलनाडु में कैदियों के एक साथ फरार होने की इस घटना की तुलना वर्ष 1995 की एक बड़ी जेल फरारी से की जा रही है। उस समय वेल्लोर किले के भीतर बने विशेष हिरासत शिविर से लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) संगठन के 43 संदिग्ध सुरंग बनाकर फरार हो गए थे।

रिपोर्टों के मुताबिक, उस सुरंग की लंबाई लगभग 153 फीट यानी 47 मीटर थी। थेनी की मौजूदा घटना को भी राज्य में पिछले कई दशकों की बड़ी जेल फरारी की घटनाओं में गिना जा रहा है।

हालांकि, दोनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग-अलग थीं। वेल्लोर में सुरंग बनाकर भागने की घटना हुई थी, जबकि थेनी में कैदियों पर जेलकर्मियों को धोखा देकर हमला करने और उसके बाद फरार होने का आरोप है।

जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

एक ही सेल में बंद 17 कैदियों का एक साथ फरार हो जाना जेल प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कैदियों ने सुरक्षा व्यवस्था का फायदा कैसे उठाया, घटना के समय सेल की निगरानी किस तरह की जा रही थी और कर्मचारियों पर हमले के बाद कैदी किस रास्ते से बाहर निकले।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल प्राथमिकता फरार कैदियों को गिरफ्तार करने और घटना से जुड़े सभी तथ्यों का पता लगाने की है। बाकी कैदियों की गिरफ्तारी तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर सुरक्षा संबंधी चूकों की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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