आजम खान को जमानत, लेकिन जेल से रिहाई पर संशय; बेटे अब्दुल्ला के बाहर आने का रास्ता साफ
डबल पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजम खान और अब्दुल्ला की 10 साल की सजा निलंबित की, दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार; आजम के खिलाफ दो अन्य मामले बने रिहाई में अड़चन
अनप्लग इंडिया। डेस्क
लखनऊ/प्रयागराज। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को डबल पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत दे दी है। हालांकि, अदालत ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई का रास्ता साफ होता दिख रहा है, जबकि आजम खान की रिहाई को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
आजम खान के खिलाफ दो अन्य मामले लंबित होने के कारण उनकी रिहाई में अड़चन आ सकती है। इनमें एक मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला उत्तर प्रदेश विजिलेंस की ओर से दर्ज किया गया है। यदि इन मामलों में उनकी हिरासत जारी रखने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो जमानत मिलने के बावजूद उन्हें जेल में रहना पड़ सकता है।
ट्रायल कोर्ट से हाईकोर्ट तक ऐसे बढ़ा मामला
डबल पैन कार्ड मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने 17 नवंबर 2025 को आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोनों को जेल भेज दिया गया था।
सजा बढ़ाने की मांग को लेकर सरकार की ओर से भी अपील दायर की गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 23 मई 2026 को अपीलीय अदालत ने आजम खान की सजा सात साल से बढ़ाकर दस साल कर दी, जबकि अब्दुल्ला आजम की सजा में बदलाव नहीं किया गया।
इसके बाद आजम खान ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत देने की मांग की थी। 15 अक्टूबर को सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने सजा निलंबित करने और जमानत देने का आदेश दिया है।
दो पैन कार्ड का मामला क्या है?
इस मामले की शुरुआत वर्ष 2019 में रामपुर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज एफआईआर से हुई थी। भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अब्दुल्ला आजम के पास अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड थे।
आरोप के मुताबिक, एक पैन कार्ड में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 और दूसरे में 30 सितंबर 1990 दर्ज थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल चुनाव और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में किया गया। इस मामले में आजम खान पर अपने बेटे के लिए कथित तौर पर गलत दस्तावेज तैयार कराने में भूमिका निभाने का आरोप लगा था।
जमानत और दोषसिद्धि में क्या है अंतर?
हाईकोर्ट से सजा निलंबित होने और जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपों से बरी कर दिया है। दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई गई है, इसलिए निचली अदालत का दोषी ठहराने वाला फैसला फिलहाल कायम है। आगे मामले में अपील की सुनवाई के दौरान अदालत के निर्णय का महत्व रहेगा।
फिलहाल सबसे अहम सवाल आजम खान की रिहाई का है। अब्दुल्ला आजम को इस आदेश से राहत मिलने की संभावना है, लेकिन आजम खान के मामले में अन्य लंबित मुकदमों की स्थिति यह तय करेगी कि वह जेल से बाहर आ पाएंगे या नहीं।
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