पिछली सर्जरी के कारण मुश्किल हुआ इलाज, स्पाईग्लास कैमरे से 73 वर्षीय मरीज की पित्त नली से निकाली पथरी
यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, कौशांबी के डॉक्टरों ने अपनाई विशेष तकनीक; संक्रमण से किडनी पर पड़ रहा था असर, सामान्य प्रक्रिया के लिए एक-दो सप्ताह इंतजार करना पड़ सकता था
अनप्लग इंडिया। डेस्क
गाजियाबाद। पेट की पुरानी सर्जरी के कारण इलाज का सामान्य रास्ता बंद होने के बावजूद यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स, कौशांबी के डॉक्टरों ने 73 वर्षीय मरीज की पित्त नली में फंसी पथरी निकालने में सफलता हासिल की। मरीज की हालत गंभीर थी। पित्त नली में रुकावट के कारण संक्रमण शरीर में फैल रहा था और किडनी पर भी इसका असर पड़ने लगा था। ऐसे में डॉक्टरों ने स्पाईग्लास डीएस मिनिएचर कैमरे की मदद से विशेष प्रक्रिया कर पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ा और पित्त नली का रास्ता साफ किया।
गाजियाबाद के वैशाली निवासी मरीज को पित्त नली में रुकावट के साथ गंभीर संक्रमण था। उनकी स्थिति निमोनिया के कारण और जटिल हो गई थी। जांच में पित्त नली में दो पथरियां मिलीं। पित्त नली वह मार्ग है, जिसके जरिए लीवर से पित्त आंत तक पहुंचता है। इसमें रुकावट होने से संक्रमण और दूसरी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
पुरानी सर्जरी के कारण सामान्य रास्ते से इलाज संभव नहीं था
मरीज के पेट की पहले सर्जरी हो चुकी थी। इस वजह से डॉक्टरों के लिए सामान्य एंडोस्कोपिक रास्ते से पित्त नली तक पहुंचना संभव नहीं था। मरीज की गंभीर स्थिति और संक्रमण के कारण इलाज में देरी करना भी जोखिम भरा हो सकता था।
डॉक्टरों ने पहले मरीज को संक्रमण के अनुरूप एंटीबायोटिक दवाएं देना शुरू किया। इसके बाद त्वचा और लीवर के रास्ते एक पतली नली डालकर संक्रमित पित्त को बाहर निकालने की व्यवस्था की गई। इस प्रक्रिया के चार दिन बाद पथरी निकालने के लिए अगला उपचार किया गया।
मिनिएचर कैमरे से सीधे देखी पित्त नली
यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स, कौशांबी के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और एंडोस्कोपी विभाग के डायरेक्टर डॉ. कुणाल दास तथा इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. दीपक हंस ने स्पाईग्लास डीएस मिनिएचर कैमरे की सहायता से इलेक्ट्रोहाइड्रोलिक लिथोट्रिप्सी प्रक्रिया की।
इस तकनीक में नियंत्रित ऊर्जा तरंगों की मदद से पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है। कैमरे से डॉक्टरों को पित्त नली के भीतर देखने और पथरी की स्थिति पहचानने में मदद मिली। टीम ने पथरी के टुकड़ों और रुकावट पैदा कर रहे स्लज यानी गाद को साफ किया। इसके बाद पित्त का प्रवाह बनाए रखने के लिए स्टेंट लगाया गया।
एक-दो सप्ताह के बजाय चार दिन में की प्रक्रिया
डॉक्टरों के मुताबिक, लीवर के रास्ते बनाया गया नया चैनल सामान्य तौर पर अगली प्रक्रिया के लिए तैयार होने में एक से दो सप्ताह ले सकता है। लेकिन इस मरीज की हालत गंभीर थी और संक्रमण के कारण किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ रहा था।
ऐसे में डॉक्टरों ने मरीज की स्थिति का आकलन करने के बाद एक्सेस चैनल बनाए जाने के चार दिन बाद ही पथरी निकालने की प्रक्रिया करने का फैसला लिया। अस्पताल के अनुसार, उपचार के बाद मरीज को कोई जटिलता नहीं हुई और उन्हें स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई।
करीब छह सप्ताह बाद हुए फॉलोअप में मरीज की हालत ठीक पाई गई। लीवर सामान्य रूप से काम कर रहा था और मरीज को पीलिया भी नहीं था।
समय पर इलाज करना सबसे बड़ी चुनौती थी: डॉ. कुणाल दास
डॉ. कुणाल दास ने बताया कि इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती पित्त नली की रुकावट दूर करना था। मरीज की पिछली सर्जरी के कारण सामान्य एंडोस्कोपिक रास्ते का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था। साथ ही संक्रमण और किडनी पर पड़ रहे असर को देखते हुए समय पर इलाज करना जरूरी था।
उन्होंने कहा कि पित्त नली को सीधे देखने की सुविधा मिलने से वैकल्पिक रास्ते के जरिए पथरी की पहचान करने और उसे निकालने में मदद मिली।
बिना ओपन सर्जरी के दूर की गई रुकावट: डॉ. दीपक हंस
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. दीपक हंस ने बताया कि लीवर के रास्ते बनाए गए नए चैनल को अगली प्रक्रिया के लिए तैयार होने में आमतौर पर समय देना पड़ता है। लेकिन मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह फैसला करना जरूरी था कि इंतजार करना अधिक जोखिम भरा होगा या जल्द उपचार करना।
उनके मुताबिक, इस तकनीक से बिना ओपन सर्जरी के पित्त नली की रुकावट दूर की जा सकी। उपचार के बाद मरीज की सेहत में भी अच्छा सुधार देखा गया।
जटिल मामलों में इमेज-गाइडेड प्रक्रिया बन सकती है विकल्प
यह मामला दिखाता है कि जिन मरीजों की पहले सर्जरी हो चुकी हो और जिनमें सामान्य एंडोस्कोपिक तरीके से इलाज संभव न हो, उनके लिए इमेज-गाइडेड प्रक्रियाएं एक विकल्प बन सकती हैं। हालांकि, नया चैनल बनाए जाने के कुछ ही दिनों बाद ऐसी प्रक्रिया करना सावधानी और मरीज की स्थिति के विस्तृत आकलन की मांग करता है।
डॉक्टरों के अनुसार, गंभीर संक्रमण और पित्त नली में रुकावट वाले मरीजों में समय पर सही उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में मिनिएचर कैमरे की मदद से पथरी की पहचान और उसे निकालने की प्रक्रिया पूरी की गई।
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