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1 नवंबर 2026 | भरोसेमंद खबरें, सीधे आपके शहर से
अंक: 01 Nov 2026
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एमिटी में ‘इनफिनिटी 2026’ का आयोजन, विशेषज्ञों ने कहा- एआई के विकास में नैतिकता और जवाबदेही सबसे जरूरी

Rinku Yadav • • 7 मिनट पढ़ें
एमिटी में ‘इनफिनिटी 2026’ का आयोजन, विशेषज्ञों ने कहा- एआई के विकास में नैतिकता और जवाबदेही सबसे जरूरी

9वें वार्षिक तकनीकी सम्मेलन में ‘नैतिक एआई गवर्नेंस’ पर मंथन, उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने छात्रों को भरोसेमंद और समावेशी तकनीकी भविष्य के लिए किया प्रेरित

अनप्लग इंडिया। डेस्क

नोएडा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तेजी से दुनिया की अर्थव्यवस्था, उद्योग और कार्यप्रणाली को बदल रहा है। ऐसे में तकनीक का विकास केवल उसकी क्षमता और उपयोगिता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक मूल्यों का समावेश भी जरूरी है। इसी विषय पर चर्चा के लिए एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी बिजनेस स्कूल की ओर से नौवें वार्षिक तकनीकी सम्मेलन ‘इनफिनिटी 2026’ का आयोजन किया गया।

सम्मेलन का मुख्य विषय ‘नैतिक एआई गवर्नेंस-एक टिकाऊ और समावेशी भविष्य के लिए बुद्धिमान पारिस्थितिकी तंत्र’ रखा गया। कार्यक्रम में केंद्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और देश की प्रमुख तकनीकी एवं कॉरपोरेट संस्थाओं से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को एआई के बदलते स्वरूप, उसके व्यावसायिक उपयोग, तकनीकी नवाचार और नैतिक जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मोहम्मद वाई. सफीरुल्ला, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के जनरल मैनेजर गिरिश सरदाना, आईबीएम की टेक्निकल कम्युनिटी लीडर एवं की फील्ड सीटीओ गीता गुरनानी और एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डॉ. संजीव बंसल ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।

लगातार सीखने और नए प्रयोग करने की जरूरत: मोहम्मद वाई. सफीरुल्ला

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मोहम्मद वाई. सफीरुल्ला ने कहा कि मौजूदा दौर में लगातार सीखते रहना बेहद जरूरी हो गया है। बीते दो से तीन वर्षों में बाजार और कार्यक्षेत्र में तेजी से बदलाव हुए हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को केवल अपने विषय तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्वास्थ्य, कृषि और अन्य क्षेत्रों की भी जानकारी हासिल करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि युवाओं में कुछ नया सृजन करने और समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तलाशने की सोच विकसित होनी चाहिए। एआई के दौर में जीवन और कार्यक्षेत्र को व्यापक दृष्टिकोण से समझना जरूरी है। तकनीकी विकास के साथ नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देते हुए ऐसे समाधान तैयार किए जाने चाहिए, जो किफायती होने के साथ आम लोगों के लिए सुलभ भी हों।

सफीरुल्ला ने विद्यार्थियों को किसी एक क्षेत्र में गहन ज्ञान और विशेषज्ञता हासिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कम समय में मिलने वाली सफलता हमेशा टिकाऊ नहीं होती। इसलिए निरंतर प्रयास और हर काम में नैतिक मूल्यों का पालन आवश्यक है। विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि विकास की यात्रा लंबी होती है और बेहतर भविष्य बनाने के लिए उनकी प्रतिस्पर्धा किसी दूसरे व्यक्ति से नहीं, बल्कि स्वयं से होनी चाहिए।

ईमानदारी के बिना बुद्धिमत्ता जोखिम बन सकती है: गिरिश सरदाना

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के जनरल मैनेजर गिरिश सरदाना ने कहा कि व्यापार और उद्योग जगत में एआई की भूमिका लगातार बढ़ रही है। यह तकनीक अर्थव्यवस्था से जुड़ रही है और आने वाले समय में कई क्षेत्रों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करेगी। ऐसे में एआई की विश्वसनीयता और उसके जिम्मेदार इस्तेमाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बुद्धिमान तकनीकी प्रणालियों का निर्माण करते समय नैतिकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ईमानदारी के बिना बुद्धिमत्ता जोखिम का कारण बन सकती है। युवा विद्यार्थी एआई आधारित समाधानों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए उन्हें तकनीक के साथ उसके नैतिक पहलुओं को भी समझना होगा।

सरदाना ने एआई से जुड़े तीन महत्वपूर्ण पहलुओं- प्रश्न आधारित एआई, गवर्नेंस एआई और जिम्मेदार एआई को समझने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि एआई को नवाचार और विकास का माध्यम बनाना होगा। इसका जिम्मेदार उपयोग ही विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।

तकनीक का महत्व तभी, जब उसका इस्तेमाल नैतिक हो: डॉ. संजीव बंसल

एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डॉ. संजीव बंसल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ‘इनफिनिटी’ केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि ऐसा दृष्टिकोण है जिसकी संभावनाओं का कोई अंत नहीं है।

उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। एआई जैसी नई तकनीकें जहां विकास और नवाचार के अवसर उपलब्ध करा रही हैं, वहीं इनके साथ कई नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सम्मेलन का आयोजन किया गया, ताकि विद्यार्थियों को नैतिक एआई गवर्नेंस और टिकाऊ एवं समावेशी भविष्य के निर्माण में इसकी भूमिका समझाई जा सके।

डॉ. बंसल ने कहा कि तकनीक का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ किया जाए।

उद्योगों में एआई के इस्तेमाल के साथ जवाबदेही भी जरूरी: गीता गुरनानी

आईबीएम की टेक्निकल कम्युनिटी लीडर एवं की फील्ड सीटीओ गीता गुरनानी ने कहा कि प्रबंधन के विद्यार्थियों के लिए भी तकनीकी समझ अब अनिवार्य हो गई है। उन्हें गवर्नेंस एआई और बिजनेस एआई, दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलना होगा।

उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे यह समझें कि औद्योगिक और व्यावसायिक परिस्थितियों में एआई का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है। एआई मॉडल पारदर्शी होने चाहिए और यदि उनके परिणाम गलत आते हैं तो उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

गुरनानी ने कहा कि भारत में एआई से संबंधित नियामकीय व्यवस्था को लेकर गतिविधियां तेज हैं और कई औद्योगिक क्षेत्र इस तकनीक को अपना चुके हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को एआई से पैदा होने वाली नई चुनौतियों, कार्यक्षेत्र में इसके व्यावहारिक उपयोग और एथिक्स बोर्ड एवं गवर्नेंस जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

भरोसेमंद एजेंटिक एआई पर पहले परिचर्चा सत्र में चर्चा

‘इनफिनिटी 2026’ के अंतर्गत दो विशेष परिचर्चा सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र का विषय ‘नैतिक एआई से आगे-भरोसेमंद एजेंटिक एआई और स्वायत्त बुद्धिमान प्रणालियों का निर्माण’ था।

इस सत्र में हिताची डिजिटल के एआई एवं इनोवेशन प्रमुख संजीव आजाद, विप्रो के ग्लोबल प्रैक्टिस हेड एवं जनरल मैनेजर सिद्धार्थ मुखर्जी, जियो बिजनेस क्लाउड डाटा एवं एआई के बिजनेस एंड प्रोडक्ट हेड कमलजीत सिंह और टीक्यू सर्ट प्राइवेट लिमिटेड के रीजनल हेड-नॉर्थ अतुल कुमार श्रीवास्तव ने अपने विचार साझा किए।

विशेषज्ञों ने भरोसेमंद एआई सिस्टम विकसित करने, स्वायत्त तकनीकी प्रणालियों की उपयोगिता और उनके संचालन में नैतिक मानकों की भूमिका पर चर्चा की।

एआई के दौर में नीति, जवाबदेही और टिकाऊ नवाचार पर मंथन

दूसरे परिचर्चा सत्र का विषय ‘बुद्धिमान इकोसिस्टम का संचालन-एआई के दौर में नीति, जवाबदेही और टिकाऊ नवाचार’ रखा गया।

इस सत्र में एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड के एंटरप्राइज रिस्क मैनेजमेंट के उपाध्यक्ष विजय आनंद, एओन हेविट के इंजीनियरिंग डायरेक्टर सनमान परवलकर, जेनपैक्ट की डिजिटल सेल्सफोर्स एप्लिकेशन आर्किटेक्ट एवं असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट रश्मि टंडन और एचसीएलटेक के एआई आधारित मार्केटिंग सॉल्यूशंस एवं सर्विसेज के डायरेक्टर शुभम गोयल ने हिस्सा लिया।

वक्ताओं ने एआई आधारित तकनीकी प्रणालियों के संचालन में स्पष्ट नीतियों, जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था और दीर्घकालिक नवाचार की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।

कई संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी साझा किए विचार

सम्मेलन के दौरान फरीदाबाद स्थित अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर के मेडिकल सुपरिटेंडेंट एयर वाइस मार्शल डॉ. आशुतोष शर्मा और इनसेप्ट डाटा सॉल्यूशन के अध्यक्ष सौरभ अरोरा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में ‘इनफिनिटी 2026’ की सह-अध्यक्ष एवं एमिटी बिजनेस स्कूल की प्रोफेसर लखविंदर कौर ढिल्लों तथा सह-अध्यक्ष डॉ. विजित चतुर्वेदी भी मौजूद रहे।

सम्मेलन में विशेषज्ञों के विचारों और परिचर्चाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि भविष्य की तकनीक केवल अधिक तेज और सक्षम बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उसे पारदर्शी, भरोसेमंद, जवाबदेह और समाज के सभी वर्गों के लिए उपयोगी बनाना भी उतना ही जरूरी है।

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