पीएम मोदी का विपक्ष पर हमला, बोले- विरोध नहीं अब अवरोध की राजनीति हो रही: विदेश में किससे गुपचुप मिल रहे हैं, सब दिख रहा, देश को बांटने की कोशिश का आरोप
सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई; बोले- नक्सलवाद कमजोर हुआ, लेकिन ‘दिमागी नक्सलियों’ का खतरा बरकरार, 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प दोहराया
अनप्लग इंडिया। डेस्क
एकता नगर (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की और लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश की एकता, सुरक्षा, विकास और वैश्विक परिस्थितियों पर बात की। साथ ही विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ ताकतें देश में विभाजन और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष अब विरोध की भूमिका निभाने के बजाय अवरोध पैदा करने में लगा है। उन्होंने विदेश में होने वाली कुछ कथित गुप्त मुलाकातों का जिक्र करते हुए कहा कि कौन किससे मिल रहा है, यह सब दिखाई दे रहा है। हालांकि, उन्होंने अपने संबोधन में किसी व्यक्ति या संगठन का नाम लेकर इन आरोपों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया।
‘विरोध पक्ष नहीं, अवरोध पक्ष बन गया है विपक्ष’
पीएम मोदी ने विपक्ष की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अपना महत्व है, लेकिन देश के विकास में रुकावट पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक निराशा के कारण विकास कार्यों में बाधाएं खड़ी करने का आरोप लगाया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में कुछ ताकतें लोगों के बीच मतभेद बढ़ाने और समाज को बांटने के प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मां भारती की संतानों को आपस में लड़वाने के लिए कुचक्र रचे जा रहे हैं। ऐसे समय में देशवासियों को एकजुट रहने की जरूरत है।
उन्होंने विदेश में होने वाली कथित गुप्त बैठकों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि कौन विदेश में भारत विरोधी ताकतों से मिल रहा है और कौन देश विरोधी तत्वों जैसी भाषा बोल रहा है। ये प्रधानमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं; संबोधन में उन्होंने इन मुलाकातों से जुड़े नाम या कोई विस्तृत प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया।
‘नक्सलवाद की कमर टूटी, लेकिन दिमागी नक्सलियों का खतरा बाकी’
प्रधानमंत्री ने देश में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि नक्सलवाद की कमर तोड़ी जा चुकी है, लेकिन विचार और सोशल मीडिया के माध्यम से देश के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करने वाली ताकतों का खतरा अभी समाप्त नहीं हुआ है।
उन्होंने ‘दिमागी नक्सलियों’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि सोशल मीडिया को हथियार बनाकर देश के खिलाफ इस्तेमाल करने की साजिश हो रही है। उन्होंने लोगों से ऐसी गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील की।
पीएम मोदी ने कहा कि एक समय देश के 126 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। उन्होंने दावा किया कि सरकार के प्रयासों से अब यह स्थिति बदल चुकी है और देश नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ा है।
गृह मंत्रालय के जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च-अप्रैल 2026 तक किसी भी जिले को आधिकारिक रूप से वामपंथी उग्रवाद प्रभावित श्रेणी में नहीं रखा गया। हालांकि, 37 जिले ‘लेगेसी एंड थ्रस्ट’ श्रेणी में हैं, जहां सुरक्षा और विकास संबंधी निगरानी जारी रखने की जरूरत बताई गई है। एक जिला ‘डिस्ट्रिक्ट ऑफ कंसर्न’ श्रेणी में रखा गया है।
वैश्विक संकट के बीच भारत के सामने चुनौती
प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय हालात का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया इस समय कई तरह के संकटों से गुजर रही है। विभिन्न देशों में युद्ध जारी हैं, संसाधनों की उपलब्धता पर दबाव बढ़ रहा है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर पिछले कई दशकों के सबसे कठिन समय में से एक है। ऐसी परिस्थितियों में भारत को अपनी एकता और सामूहिक शक्ति के बल पर चुनौतियों का सामना करना होगा।
मोदी ने ऊर्जा संकट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण भारत के सामने भी मुश्किलें आईं, लेकिन सरकार के संकल्प के कारण इसका असर आम नागरिकों पर सीमित रखने का प्रयास किया गया।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, देश की एकजुटता ही ऐसी चुनौतियों से बाहर निकलने की सबसे बड़ी ताकत है।
‘भारत पहले से अधिक सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरा’
पीएम मोदी ने सुरक्षा बलों के जवानों के योगदान को याद करते हुए कहा कि देश में शांति स्थापित करने और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अनेक जवानों ने बलिदान दिया है। उन्होंने ऐसे सभी जवानों को नमन किया।
उन्होंने कहा कि आज भारत पहले से अधिक सुरक्षित और संकल्पित है। देशवासियों का बढ़ता आत्मविश्वास राष्ट्रीय उपलब्धियों का आधार है।
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों के मुख्यधारा में लौटने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में दशकों तक हिंसा और अस्थिरता रही, वहां अब विकास और सामान्य जनजीवन को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गरीबी और सामाजिक सुरक्षा पर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने गरीब कल्याण योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 से पहले देश में 25 करोड़ से भी कम लोगों को सामाजिक सुरक्षा का कवच उपलब्ध था, जबकि अब लगभग 100 करोड़ लोगों को इससे जोड़ा जा चुका है।
उन्होंने गरीबी कम होने का जिक्र करते हुए विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बड़ी संख्या में लोगों ने गरीबी से बाहर निकलने में सफलता हासिल की है।
मोदी ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), मुफ्त राशन और बीमा योजनाओं को गरीबों के जीवन में बदलाव लाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि डीबीटी के माध्यम से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हुई है और इससे सरकारी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों को कम करने में मदद मिली है।
प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक गरीबी हटाने के नारे दिए गए, लेकिन अब गरीबों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने की दिशा में काम हुआ है।
सरदार पटेल ने 550 से ज्यादा रियासतों को एक सूत्र में पिरोया
प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि आज के भारत के स्वरूप की कल्पना उनके योगदान के बिना अधूरी है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रियासतों का एकीकरण था।
मोदी ने कहा कि सरदार पटेल ने 550 से अधिक रियासतों को एकजुट कर भारत के वर्तमान स्वरूप को आकार देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने केवल देश के भूगोल को नहीं जोड़ा, बल्कि लोगों को भावनात्मक एकता के सूत्र में भी बांधा।
उन्होंने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी ताकत है। देश की अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां, परंपराएं और जीवनशैली मिलकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाती हैं।
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के निर्माण और सांस्कृतिक एकता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने देश को प्रगति का रास्ता दिखाया और आज भारत जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसमें उनके विचारों की प्रेरणा शामिल है।
‘आजादी को सही क्षमता गणतंत्र से मिलती है’
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता और गणतंत्र के महत्व को समझाते हुए कहा कि आजादी किसी भी देश के लिए जरूरी है, क्योंकि इससे देश अपने भविष्य का फैसला खुद कर सकता है। लेकिन स्वतंत्रता को वास्तविक क्षमता गणतंत्र से मिलती है।
उन्होंने कहा कि संविधान सरकार और जनप्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाता है, जबकि राष्ट्रीय एकता देश को सामूहिक रूप से आगे बढ़ने की शक्ति देती है।
मोदी ने कहा कि भारत में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और राष्ट्रीय एकता दिवस तीनों को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है। इन आयोजनों का उद्देश्य देश की एकता, संविधान और स्वतंत्रता के मूल्यों को मजबूत करना है।
2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प
अपने भाषण के अंतिम हिस्से में प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि जब देश आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब भारत को सशक्त, समर्थ और विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे इस लक्ष्य को केवल सरकारी कार्यक्रम न समझें, बल्कि इसे राष्ट्रीय संकल्प बनाएं। प्रधानमंत्री ने कहा कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, देश की विकास यात्रा रुकनी नहीं चाहिए।
उन्होंने घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव को रोकने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, बड़े फैसलों के रास्ते में बाधाएं आएंगी, लेकिन भारत को आगे बढ़ते रहना होगा।
एकता नगर में 400 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने एकता नगर में 400 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें सीवेज और जल उपचार संयंत्र, नर्मदा घाट का उन्नयन, भवनों की फसाड लाइटिंग, IRCTC होटल और पर्यटन सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा गोरा-भद्रा सड़क विकास, जीरो वेस्ट स्मार्ट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना, खलवानी इको टूरिज्म विकास और कैक्टस एवं बटरफ्लाई गार्डन के एकीकृत विकास की आधारशिला भी रखी गई।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्टैच्यू ऑफ यूनिटी क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं, पर्यटन और स्थानीय विकास को बढ़ावा देना है।
सरदार पटेल की जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और विकास का संदेश दिया गया। हालांकि, प्रधानमंत्री के भाषण का बड़ा हिस्सा विपक्ष पर राजनीतिक आरोपों और देश में कथित विभाजनकारी गतिविधियों को लेकर केंद्रित रहा।
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