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चुनाव आयोग तक विपक्ष का मार्च रोका, राहुल-प्रियंका हिरासत में, ज्ञानेश कुमार से मिलने पर अड़े राहुल
19 दलों के सांसदों ने संसद से ECI तक निकाला ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’, राहुल बोले- 300 सांसदों की बात नहीं सुनना देश का अपमान
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नई दिल्ली। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध मंगलवार को दिल्ली में सड़क पर उतर आया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत 19 विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला। सुरक्षा बलों ने मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया गया।
हिरासत में लिए जाने के बाद दोनों को बस में बैठाया गया, लेकिन बाद में वे आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंचकर धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी ने साफ कहा कि जब तक उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने नहीं दिया जाएगा, वे वहां से नहीं हटेंगे। Pasted text
ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की मांग
राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके साथ करीब 300 लोकसभा और राज्यसभा सांसद हैं और वे मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्तों से मुलाकात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनी जाना लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति है।
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर भाजपा की मदद करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांगने की बात कही। Pasted text
आकाशवाणी परिसर में धरने पर बैठे राहुल-प्रियंका
मार्च रोके जाने के बाद राहुल और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में बरगद के पेड़ के नीचे चटाई बिछाकर बैठ गए। विपक्षी नेताओं का कहना था कि उन्हें चुनाव आयोग के कार्यालय तक जाने दिया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त से बातचीत कराई जाए।
राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग का कार्यालय आकाशवाणी परिसर से कुछ ही दूरी पर है, फिर भी उन्हें वहां जाने की अनुमति नहीं दी जा रही। Pasted text
पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई विपक्षी कार्यकर्ताओं और नेताओं को हिरासत में लिया। आकाशवाणी भवन के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और सीआरपीएफ तथा महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रदर्शन के चलते मध्य दिल्ली के कई इलाकों में बैरिकेडिंग और यातायात नियंत्रण भी किया गया। Pasted text Pasted text
कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई। वहीं, भाजपा नेताओं ने विपक्ष के प्रदर्शन को राजनीतिक विरोध और जनादेश के अपमान से जोड़कर निशाना साधा। शिवराज सिंह चौहान ने इसे लोकतंत्र की चिंता के बजाय विपक्ष की हार की खीझ बताया। Pasted text
विपक्ष की पांच प्रमुख मांगें
विपक्षी गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर पांच प्रमुख मांगें सामने रखीं।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।
- मतदाता सूची में पारदर्शिता—नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग।
- SIR को लेकर आपत्ति और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल।
- EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग।
- चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही को लेकर विपक्षी दलों की एकजुटता। Pasted text
खड़गे और अखिलेश ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया के जरिए युवाओं, महिलाओं, किसानों और गरीबों के अधिकार प्रभावित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष का आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है। Pasted text
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार निष्पक्ष हैं तो उन्हें विपक्ष की बात सुननी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार पर भी सवाल उठाया। Pasted text
विपक्ष के आरोपों पर सत्ता पक्ष का पलटवार
विपक्ष जहां चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को राजनीतिक विरोध करार दिया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह लोकतंत्र की चिंता नहीं बल्कि चुनावी हार की खीझ है। Pasted text
इस तरह मंगलवार का प्रदर्शन चुनाव आयोग की निष्पक्षता, SIR और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन गया। अब नजर इस बात पर है कि विपक्ष की मांगों पर चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।
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