धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने मोहा मन, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा महर्षि नगर
धनुष यज्ञ के प्रसंग में जब भगवान श्रीराम ने सहज भाव से भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, तो धनुष टूटने की गूंज के साथ पूरा वातावरण रोमांचित हो उठा
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नोएडा। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर नोएडा के सेक्टर-110 स्थित महर्षि नगर में आयोजित दुर्गा पूजा एवं श्रीरामलीला महोत्सव के दौरान बुधवार को भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह से जुड़े प्रसंगों का भव्य एवं मनोहारी मंचन किया गया। धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और स्वयंवर में पधारे राजाओं के स्वागत-सत्कार के दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। विशेष रूप से परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुए संवाद का ओजस्वी एवं अलौकिक मंचन आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा।
ए के लाल मीडिया प्रभारी ने बताया कि महर्षि रामलीला मे मुख्य अतिथि. एस. के. सिंह. डी. सी. पी. मौजूद थे. धनुष यज्ञ के प्रसंग में जब भगवान श्रीराम ने सहज भाव से भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, तो धनुष टूटने की गूंज के साथ पूरा वातावरण रोमांचित हो उठा। इस दृश्य के मंचन ने दर्शकों को त्रेतायुग की दिव्य अनुभूति कराई। इसके बाद भगवान परशुराम के आगमन और उनके क्रोधपूर्ण संवाद ने रामलीला में उत्सुकता एवं नाटकीयता को और बढ़ा दिया।
परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बांधा समां
भगवान शिव के धनुष के टूटने से क्रोधित परशुराम और वीर लक्ष्मण के बीच हुए संवाद का मंचन अत्यंत प्रभावशाली रहा। परशुराम के तेजस्वी व्यक्तित्व, ओजपूर्ण वाणी और क्रोधपूर्ण भाव-भंगिमाओं के सामने लक्ष्मण के निर्भीक उत्तर, व्यंग्यपूर्ण संवाद और क्षत्रियोचित साहस ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दोनों पात्रों के बीच संवादों के उतार-चढ़ाव, सशक्त अभिनय और प्रभावशाली मंचीय प्रस्तुति ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक पूरे समय दृश्य से जुड़े रहे।
एक ओर परशुराम का तपोबल, क्रोध और पराक्रम दिखाई दिया, तो दूसरी ओर लक्ष्मण का आत्मविश्वास, निर्भीकता और अपने आराध्य भगवान श्रीराम के प्रति समर्पण देखने को मिला। वहीं भगवान श्रीराम ने अपने विनम्र व्यवहार और धैर्य से संवाद को मर्यादापूर्ण दिशा प्रदान की। इस प्रसंग ने दर्शकों को शक्ति के साथ विनम्रता, साहस के साथ विवेक और क्रोध के स्थान पर धैर्य के महत्व का संदेश दिया। मंचन के दौरान दर्शकों की तालियों और जय श्रीराम के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
धार्मिक अनुष्ठानों से भक्तिमय हुआ वातावरण
महर्षि नगर में आयोजित इस महोत्सव में रामलीला मंचन के साथ दुर्गा पूजन, वेद पाठ, भजन-कीर्तन, प्रवचन और आरती सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। प्रतिदिन सुबह मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और शाम को भक्ति संगीत एवं वैदिक अनुष्ठानों से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति के रंग में रंग रहा है।
आयोजकों के अनुसार, श्रीरामलीला मंचन का उद्देश्य भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना है। रामलीला के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेम, त्याग, कर्तव्य, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिल रही है।
इस अवसर पर महर्षि महेश योगी संस्थान के अध्यक्ष एवं महर्षि विश्व विश्विद्यालय के कुलाधिपति श्रीमान अजय प्रकाश श्रीवास्तव तथा श्री दुर्गा पूजा, विजयादशमी एवं श्रीरामलीला महोत्सव के संयोजक रामेंद्र सचान एवं प्रबंध समिति के, विनोद श्रीवास्तव, शिशिर कांत श्रीवास्तव, विनीत श्रीवास्तव, विनोद दीक्षित, एस.पी. गर्ग, श्रीकांत ओझा, मनोज श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव, लल्लन पाठक, दयाशंकर गुप्ता, राजेंद्र शुक्ला, राजेंद्र खंतवाल और नरेंद्र सिंह सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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