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अमित शाह का राहुल गांधी पर निशाना, बोले- 2029 में भी हारेगी कांग्रेस; SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों पर दिया जवाब
गृह मंत्री ने कहा- राहुल गांधी SIR की आड़ में घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं; गुजरात, त्रिपुरा और राजस्थान के चुनावी नतीजों का हवाला देकर कांग्रेस पर साधा निशाना
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच जारी सियासी टकराव के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार को मीडिया से बातचीत में शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी SIR के मुद्दे को उठाकर घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता विपक्ष की राजनीति को समझती है और 2029 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ेगा।
अमित शाह ने कहा कि SIR की प्रक्रिया वर्ष 2024 के बाद शुरू हुई, जबकि कांग्रेस लंबे समय से चुनावों में हार का सामना कर रही है। उनके मुताबिक, आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को भारी बहुमत मिलेगा और कांग्रेस लगातार चौथी बार पराजित होगी।
गुजरात के निकाय चुनावों का दिया उदाहरण
गृह मंत्री ने गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने कुल 104 सीटों में से 90 सीटों पर जीत हासिल की। शाह ने सवाल किया कि क्या गुजरात में कांग्रेस की हार के लिए भी SIR को जिम्मेदार ठहराया जाएगा?
उन्होंने आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन पर भी टिप्पणी की। शाह के अनुसार, पार्टी ने सभी 32 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन किसी भी सीट पर उसकी जमानत नहीं बच सकी। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात में कांग्रेस लंबे समय से चुनावी सफलता हासिल नहीं कर पाई है।
बैलेट पेपर से हुए चुनावों का भी किया उल्लेख
अमित शाह ने त्रिपुरा के ग्राम समिति चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि NDA को करीब 77.5 प्रतिशत वोट मिले। उन्होंने दावा किया कि लगभग 4,600 सीटों में कांग्रेस केवल 14 सीटें जीत सकी।
शाह ने चुनावी नतीजों पर सवाल उठाने वाले विपक्षी नेताओं को जवाब देते हुए कहा कि जिन चुनावों के परिणामों को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनमें बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ था। उनके अनुसार, ऐसे नतीजे भाजपा की जीत को केवल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से जोड़ने वाले तर्क पर सवाल खड़े करते हैं।
उन्होंने त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और गुजरात में कांग्रेस की कमजोर चुनावी स्थिति का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या इन राज्यों के नतीजों के लिए भी SIR को जिम्मेदार माना जाएगा।
बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के उपचुनावों का जिक्र
शाह ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में हुए उपचुनावों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस इन चुनावों में कोई सीट नहीं जीत सकी। उन्होंने पश्चिम बंगाल के नाओगांव और नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवारों की जीत का उल्लेख किया और दावा किया कि दोनों स्थानों पर पार्टी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगरपालिकाओं में भी बेहतर प्रदर्शन किया। शाह ने इन चुनावी परिणामों को विपक्ष के उन आरोपों के जवाब के तौर पर पेश किया, जिनमें चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
SIR को लेकर क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए। वहीं, चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।
दी गई जानकारी के मुताबिक, 6 अक्टूबर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला था। पुलिस ने मार्च को रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लेने के बाद रिहा कर दिया गया।
इसके बाद 8 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने राजघाट पर मौन प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी विवाद हुआ। वहीं, 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालते हुए SIR में कथित अनियमितताओं की जांच और प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।
2029 के चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज
SIR पर जारी विवाद के बीच अमित शाह के बयान से भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं। शाह ने आगामी लोकसभा चुनाव में NDA की जीत का भरोसा जताया है, जबकि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहा है। अब इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
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