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राहुल गांधी के मार्च पर CJI सूर्यकांत की दो टूक—अदालत को दबाव में नहीं ला सकता कोई
सांकेतिक तस्वीर
SIR के खिलाफ विपक्षी नेताओं के मार्च और याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व चुनाव आयोग से मांगा जवाब
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं के विरोध मार्च के संदर्भ में स्पष्ट कहा कि अदालत को डराने या धमकाने की कोई भी कोशिश सफल नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयासों पर न्यायपालिका ध्यान नहीं देती। गुरुवार को SIR से जुड़े विरोध प्रदर्शन और मार्च के संबंध में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह टिप्पणी की।
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी सहित 14 याचिकाकर्ताओं से जुड़े मामले का भी उल्लेख हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
CJI से मिलने का समय नहीं मिलने के बाद दाखिल हुई याचिका
विपक्षी नेताओं ने 11 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखकर ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था। हालांकि, उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे को लेकर आगे की कार्रवाई की और संबंधित याचिका दाखिल की।
12 अक्टूबर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। इसके बाद कई विपक्षी नेता सुप्रीम कोर्ट परिसर पहुंचे। इस दौरान अखिलेश यादव, केसी वेणुगोपाल, तेजस्वी यादव सहित अन्य नेताओं की मौजूदगी भी बताई गई।
SIR को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों की मुख्य आपत्तियां मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, चुनावी आंकड़ों की पारदर्शिता तथा संबंधित सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को लेकर हैं।
मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से SIR से जुड़े विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताए जाने का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि पिछले 10 महीनों में ऐसे मामलों में कम से कम 14 बार सवाल उठाए गए।
मतदाता सूची और फॉर्म-6 में बदलाव पर भी विवाद
विपक्ष की ओर से मतदाता सूची में नाम शामिल करने, हटाने और दोबारा बहाल करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, फॉर्म-6 में SIR से संबंधित सवाल जोड़े जाने को लेकर भी आपत्ति सामने आई थी।
चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर तक पहुंच तथा अधिकारियों के बीच कार्यों के बंटवारे को लेकर भी चिंता जताए जाने की बात रिपोर्टों में कही गई है। इन मुद्दों ने SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट के जवाब से आगे की स्थिति होगी स्पष्ट
सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान याचिका में उठाए गए मुद्दों और संबंधित पक्षों के तर्कों पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल, SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियों और न्यायपालिका की भूमिका पर राजनीतिक तथा कानूनी चर्चा जारी है।
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