एमिटी विश्वविद्यालय में साइबर सुरक्षा कार्यशाला, छात्रों को ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल गोपनीयता के प्रति किया जागरूक
मिशन शक्ति चरण-5 के तहत आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने साइबर अपराधों से बचाव, कानूनी अधिकारों और एआई के सुरक्षित इस्तेमाल की दी जानकारी
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नोएडा। एमिटी विश्वविद्यालय में ‘मिशन शक्ति चरण-5 अभियान’ के अंतर्गत साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। ‘एआई, गोपनीयता और साइबर सुरक्षा—नैतिक तकनीक, व्यक्तिगत डेटा संरक्षण और डिजिटल स्थानों की सुरक्षा’ विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में छात्रों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर बुलिंग, डिजिटल गोपनीयता, सोशल मीडिया पर उत्पीड़न और इंटरनेट के जिम्मेदार इस्तेमाल के बारे में जागरूक किया गया।
कार्यशाला में साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ तथा सेडुलिटी सॉल्यूशंस एंड टेक्नोलॉजीज के संस्थापक एवं सीईओ डॉ. अनूप गिरधर और उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एवं भारत सरकार के साइबर अपीलीय ट्रिब्यूनल के पूर्व चेयरपर्सन राजेश टंडन ने छात्रों को महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। इस अवसर पर एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो-वाइस चांसलर डॉ. संजीव बंसल और कार्यकारी डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) डॉ. लक्ष्मी आहूजा ने अतिथियों का स्वागत किया।
सोशल मीडिया पर उत्पीड़न होने पर सबूत सुरक्षित रखने की सलाह
डॉ. अनूप गिरधर ने कहा कि वर्तमान समय में डेटा की सुरक्षा और साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं को सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर होने वाले उत्पीड़न के मामलों में सतर्क रहने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर लगातार पीछा करता है या ब्लॉक किए जाने के बाद भी अलग-अलग नामों से संदेश भेजता है, तो ऐसे संदेशों को नजरअंदाज करने के बजाय उनसे जुड़े सबूत सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों को संदेशों के स्क्रीनशॉट, संबंधित यूआरएल और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने तथा मामले की शिकायत संबंधित साइबर हेल्पलाइन पर करने की जानकारी दी।
डॉ. गिरधर ने ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर तत्काल बैंक को सूचित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी लिंक पर क्लिक करने या अनजान फाइल डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए। विभिन्न मोबाइल एप व्यक्तिगत डेटा, एसएमएस, कैमरा और माइक्रोफोन तक पहुंच की अनुमति मांग सकते हैं। इसलिए किसी एप को डाउनलोड करने से पहले उसकी अनुमतियों और जरूरतों को समझना जरूरी है। उन्होंने अनावश्यक इंटरनेट कनेक्टिविटी बंद रखने और डिजिटल उपकरणों का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया।
साइबर अपराधों से जुड़े कानूनी पहलुओं की दी जानकारी
उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एवं साइबर अपीलीय ट्रिब्यूनल के पूर्व चेयरपर्सन राजेश टंडन ने साइबर सुरक्षा के कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम डिजिटल गतिविधियों, साइबर अपराधों और उनसे संबंधित कानूनी प्रावधानों के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने छात्रों को बदलते डिजिटल परिवेश में अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा के लिए सतर्कता जरूरी है और लोगों को स्वयं जागरूक होने के साथ-साथ दूसरों को भी साइबर साक्षर बनाने का प्रयास करना चाहिए।
एआई के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए जिम्मेदारी जरूरी: डॉ. संजीव बंसल
एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो-वाइस चांसलर डॉ. संजीव बंसल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तेजी से डिजिटल प्रणालियों का हिस्सा बन रही है। शिक्षा, संचार, शासन, डेटा प्रोसेसिंग और सामग्री निर्माण जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक ने काम को आसान, तेज और अधिक रचनात्मक बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। ऐसे में एआई और डिजिटल तकनीकों का सुरक्षित एवं जिम्मेदार इस्तेमाल करने के लिए जागरूकता बेहद आवश्यक है। इसी उद्देश्य से छात्रों को विशेषज्ञों के माध्यम से साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई।
प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने पूछे सवाल
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने साइबर सुरक्षा, डिजिटल गोपनीयता और ऑनलाइन अपराधों से संबंधित विभिन्न सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे। विशेषज्ञों ने छात्रों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए डिजिटल दुनिया में सतर्क रहने, व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करने और साइबर अपराध की स्थिति में उचित कदम उठाने के महत्व को समझाया।
कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को साइबर खतरों के प्रति जागरूक बनाना और उन्हें सुरक्षित, जिम्मेदार तथा नैतिक डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
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