एमिटी यूनिवर्सिटी में बायोटेक्नोलॉजी के नवाचारों को मिला मंच, विभु बंसल और श्याम सुंदर ने जीते पुरस्कार
‘वाइस फॉर बीटी’ में एमिटी के विभु बंसल रहे विजेता, ‘बेस्ट इनोवेटिव आइडिया 2026’ का पुरस्कार जयपुर के श्याम सुंदर को; दोनों को 20-20 हजार रुपये मिले
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नोएडा। एमिटी विश्वविद्यालय में बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए ‘वाइस फॉर बीटी’ और ‘बेस्ट इनोवेटिव आइडिया 2026’ के नॉर्थ जोन कार्यक्रम आयोजित किए गए। एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की ओर से आयोजित इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को अपने विचार प्रस्तुत करने, विशेषज्ञों से संवाद करने और विज्ञान के व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।
एसोसिएशन ऑफ बायोटेक्नोलॉजी लेड एंटरप्राइजेज (ABLE) की पहल के तहत आयोजित इन प्रतियोगिताओं में उत्तर भारत के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। ‘वाइस फॉर बीटी’ प्रतियोगिता में एमिटी विश्वविद्यालय के विभु बंसल ने पहला स्थान हासिल किया। वहीं, ‘बेस्ट इनोवेटिव आइडिया 2026’ का पुरस्कार जयपुर स्थित डॉ. बी. लाल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के श्याम सुंदर को मिला। दोनों विजेताओं को 20-20 हजार रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
18 कॉलेजों के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
‘वाइस फॉर बीटी’ प्रतियोगिता में उत्तर क्षेत्र के 18 कॉलेजों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस मंच पर प्रतिभागियों ने बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों पर अपने विचार और दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों के वैज्ञानिक ज्ञान के साथ-साथ उनके संवाद कौशल और विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता को विकसित करना है।
दूसरी ओर, ‘बेस्ट इनोवेटिव आइडिया 2026’ में विद्यार्थियों की टीमों ने अपने नए विचार निर्णायक मंडल के सामने रखे। नॉर्थ जोन स्तर पर विभिन्न संस्थानों की सात टीमों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। प्रत्येक टीम में तीन विद्यार्थी शामिल थे। इन टीमों ने अपने विचारों की उपयोगिता और संभावनाओं को विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत किया।
वैज्ञानिक अनुसंधान को बाजार से जोड़ना जरूरी: राजगोपाल मनोहर
कार्यक्रम में जूरी सदस्य और नोवोनेसिस के एमईआईए क्षेत्र में टीएस एवं इनोवेशन प्रमुख राजगोपाल मनोहर ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी में नवाचार को सफल बनाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और उसके व्यावहारिक इस्तेमाल के बीच मजबूत संबंध होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने विचारों को वास्तविक उपयोग और बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया को भी समझना चाहिए। इसके लिए तकनीकी ज्ञान के साथ नियामकीय आवश्यकताओं और व्यावसायिक पहलुओं की जानकारी जरूरी है। उनके अनुसार, इस तरह के कार्यक्रम युवा नवाचारकर्ताओं को उद्योग की जरूरतों और किसी विचार को व्यावसायिक रूप देने की चुनौतियों से परिचित कराते हैं।
विद्यार्थियों को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित कर रहा विश्वविद्यालय: डॉ. बलविंदर शुक्ला
एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डॉ. बलविंदर शुक्ला ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को उद्यमशील बनने और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है। ‘वाइस फॉर बीटी’ और ‘बेस्ट इनोवेटिव आइडिया 2026’ जैसी पहल युवाओं को अपने विचार विकसित करने, संवाद कौशल बेहतर बनाने और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कारोबार की संभावनाएं तलाशने का अवसर देती हैं।
उन्होंने कहा कि नवाचार और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देकर युवा प्रतिभाओं को इस दिशा में तैयार किया जा सकता है, जिससे वे देश की वैज्ञानिक प्रगति और आर्थिक विकास में योगदान दे सकें।
तकनीकी ज्ञान के साथ बाजार की समझ भी जरूरी: श्रेया मलिक
जूरी सदस्य और वाधवानी फाउंडेशन के वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क में लाइफ साइंसेज की प्रोग्राम हेड श्रेया मलिक ने कहा कि युवा नवाचारकर्ताओं के लिए तकनीकी दक्षता के साथ उद्यमशील सोच और बाजार की जरूरतों को समझना भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने, अपने विचारों की संभावनाओं का आकलन करने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए आत्मविश्वास विकसित करने में मदद करते हैं।
स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण में बायोटेक्नोलॉजी की बड़ी भूमिका
एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो-वाइस चांसलर डॉ. चंद्रदीप टंडन ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी में स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि, पर्यावरणीय स्थिरता और औद्योगिक विकास से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की व्यापक संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा और आत्मविश्वास बढ़ाती हैं। साथ ही, युवा शोधकर्ताओं को अपने अनुसंधान के व्यावसायिक उपयोग और उद्यमिता से जुड़ी संभावनाओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं।
बेंगलुरु में होगा राष्ट्रीय फाइनल
‘बेस्ट इनोवेटिव आइडिया 2026’ कार्यक्रम का उद्देश्य बायोटेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों में उद्यमिता को बढ़ावा देना है। इसमें अंतिम वर्ष के स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टोरल स्तर के पात्र विद्यार्थी निर्धारित विषयों पर अपने नवाचारी विचार प्रस्तुत करते हैं। प्रत्येक जोन से शीर्ष दो टीमें बेंगलुरु में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय फाइनल में हिस्सा लेंगी।
वहीं, ‘वाइस फॉर बीटी’ को अंतर-महाविद्यालयी सार्वजनिक भाषण प्रतियोगिता के रूप में आयोजित किया जाता है। इसमें बायोटेक्नोलॉजी, फूड टेक्नोलॉजी और केमिकल इंजीनियरिंग से जुड़े पात्र विद्यार्थी भाग लेते हैं। वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों की जूरी प्रतिभागियों का मूल्यांकन करती है। प्रत्येक क्षेत्र के शीर्ष दो प्रतिभागियों को राष्ट्रीय फाइनल में पहुंचने का अवसर मिलता है।
एबीएलई ने बताईं अपनी पहलें
कार्यक्रम में एसोसिएशन ऑफ बायोटेक्नोलॉजी लेड एंटरप्राइजेज (ABLE) के मानद अध्यक्ष जी.एस. कृष्णन ने संगठन की विभिन्न पहलों और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी दी। एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की निदेशक डॉ. पूजा विजयाराघवन ने अतिथियों का स्वागत किया।
इन दोनों कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को वैज्ञानिक विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने, विशेषज्ञों से सीखने और अनुसंधान को व्यावहारिक समाधान में बदलने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला।
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