खरगे की पीएम मोदी को चिट्ठी, बोले- संवैधानिक संशोधन विधेयक जबरन पास न कराए सरकार
परिसीमन के प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग, संसद के मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं होने पर भी उठाए सवाल
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान में हुई देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार से संवैधानिक संशोधन विधेयकों को जबरन पारित नहीं कराने की अपील करते हुए नए परिसीमन प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
खरगे ने अपने पत्र में कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर संसद में किसी अंतिम निर्णय से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उनके मुताबिक, इस मुद्दे पर विपक्ष अपनी बात विस्तार से रखना चाहता है, इसलिए सरकार को सभी दलों को चर्चा का उचित अवसर देना चाहिए।
मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी पर सवाल
खरगे ने पत्र में उल्लेख किया कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ था। इसके बाद 64 दिन बीत जाने के बावजूद संसद के दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान नहीं किए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई।
कांग्रेस अध्यक्ष ने इस देरी को असामान्य बताते हुए सरकार की संभावित योजनाओं पर चिंता जाहिर की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर पत्र साझा करते हुए कहा कि खरगे ने संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी और सरकार की संभावित रणनीति को लेकर प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी बात रखी है।
परिसीमन पर सभी दलों से चर्चा की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने नए परिसीमन प्रस्तावों को महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि इन्हें अंतिम रूप देने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक जरूरी है। उनका कहना है कि ऐसे फैसलों पर व्यापक विचार-विमर्श और विपक्ष की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
परिसीमन के तहत निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाता है। इसका चुनावी प्रतिनिधित्व पर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
संवैधानिक संशोधन विधेयकों को लेकर सरकार को आगाह किया
खरगे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि किसी भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को जल्दबाजी या दबाव में पारित कराने का प्रयास न किया जाए। उन्होंने इस प्रक्रिया में व्यापक चर्चा और लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
संविधान में संशोधन और परिसीमन से जुड़े विषय पहले भी राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं। कांग्रेस ने इन मुद्दों पर सरकार से स्पष्टता और विपक्ष को चर्चा में शामिल करने की मांग की है।
खरगे की इस पहल से संसद की प्रक्रिया, परिसीमन और संवैधानिक संशोधनों को लेकर सत्तापक्ष तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
(पीटीआई के इनपुट के आधार पर)
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