नोएडा में एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए बनेगा ग्रीन कॉरिडोर, 24 घंटे सक्रिय रहेगा ट्रैफिक कंट्रोल रूम, पुलिस ने शुरू किया ‘ऑपरेशन फास्ट’
गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में नहीं होगी ट्रैफिक की देरी, पुलिस ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर 9218981716; ट्रायल में 12 किलोमीटर का सफर करीब 10 मिनट में हुआ पूरा
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नोएडा। नोएडा में अब गंभीर मरीजों और सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए पुलिस ने नई व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत एंबुलेंस के लिए जरूरत पड़ने पर ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया जाएगा, ताकि मरीज को ट्रैफिक जाम में फंसने के बजाय जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सके। इस व्यवस्था को ‘ऑपरेशन फास्ट’ नाम दिया गया है।
नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में शुरू की गई इस पहल के तहत ट्रैफिक कंट्रोल रूम में 24 घंटे काम करने वाला विशेष एंबुलेंस ट्रैफिक सुविधा सेल बनाया गया है। पुलिस ने अस्पतालों, एंबुलेंस संचालकों और आपातकालीन सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए हेल्पलाइन नंबर 9218981716 भी जारी किया है।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस के रास्ते को सुगम बनाना और मरीज को अस्पताल पहुंचाने में लगने वाले समय को कम करना है।
हेल्पलाइन पर सूचना मिलते ही अलर्ट होगी ट्रैफिक पुलिस
ऑपरेशन फास्ट की कार्ययोजना डीसीपी मुख्यालय शैव्या गोयल ने तैयार की है। इसे लागू करने से पहले पुलिस ने ट्रायल भी किया।
नई व्यवस्था के तहत एंबुलेंस कर्मचारी, अस्पताल का कंट्रोल रूम या एंबुलेंस डिस्पैचर हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर मरीज की मौजूदा लोकेशन, जिस अस्पताल में मरीज को ले जाना है और संभावित रास्ते की जानकारी देंगे।
सूचना मिलने के बाद ट्रैफिक कंट्रोल रूम संबंधित मार्ग पर तैनात पुलिसकर्मियों को तत्काल अलर्ट करेगा। इसके बाद एंबुलेंस के गुजरने वाले रास्ते पर यातायात को नियंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
एंबुलेंस के आगे बढ़ने के साथ खाली कराया जाएगा रास्ता
पुलिस की इस व्यवस्था में एंबुलेंस के पूरे रूट पर एक साथ ट्रैफिक रोकने के बजाय चरणबद्ध तरीके से रास्ता खाली कराया जाएगा। एंबुलेंस जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, संबंधित चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मी यातायात को नियंत्रित करेंगे।
जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक सिग्नल के संचालन में अस्थायी बदलाव किया जाएगा। विपरीत दिशा से आने वाले वाहनों को कुछ समय के लिए रोका जा सकेगा और आवश्यकतानुसार वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
इसके अलावा शहर में लगे पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से वाहन चालकों को एंबुलेंस के आने की सूचना दी जाएगी। लोगों से तत्काल रास्ता खाली करने और आपातकालीन वाहन को प्राथमिकता देने की अपील की जाएगी।
ट्रायल में 12 किलोमीटर का रास्ता करीब 10 मिनट में तय
ऑपरेशन फास्ट की उपयोगिता परखने के लिए पुलिस ने व्यस्त यातायात के बीच इसका परीक्षण किया। ट्रायल के दौरान खाली एंबुलेंस ने चिल्ला बॉर्डर से मैक्स हॉस्पिटल और फोर्टिस हॉस्पिटल तक करीब 12 किलोमीटर की दूरी प्रत्येक मार्ग पर लगभग 10 मिनट में पूरी की।
पुलिस के अनुसार, ट्रैफिक कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय और चौराहों पर समय रहते यातायात नियंत्रित करने से यह संभव हुआ। इस व्यवस्था का उद्देश्य एंबुलेंस को रास्ता देने के साथ शहर के सामान्य यातायात पर भी कम से कम असर डालना है।
हार्ट अटैक, स्ट्रोक और गंभीर चोट के मरीजों को मिलेगा लाभ
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के मुताबिक, कई मेडिकल इमरजेंसी ऐसी होती हैं, जिनमें इलाज शुरू होने में कुछ मिनट की देरी भी मरीज के लिए गंभीर साबित हो सकती है।
सिर में गंभीर चोट, अधिक रक्तस्राव, फ्रैक्चर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी स्थितियों में मरीज को जल्द अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी होता है। ऐसे मामलों में एंबुलेंस को रास्ता मिलने से अस्पताल तक पहुंचने का समय कम किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि यह पहल ‘जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ की अवधारणा से भी जुड़ी है। इसका लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं में ऐसी मौतों को रोकना है, जिन्हें समय पर उपचार और बेहतर आपातकालीन व्यवस्था के जरिए टाला जा सकता है।
सरकारी और निजी अस्पताल भी व्यवस्था से जुड़ेंगे
ऑपरेशन फास्ट को प्रभावी बनाने के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों, एंबुलेंस सेवा प्रदाताओं तथा आपातकालीन डिस्पैच केंद्रों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
पुलिस ने सभी संबंधित संस्थानों से अपील की है कि एंबुलेंस के रवाना होने और उसके निर्धारित गंतव्य की जानकारी समय रहते साझा करें, जिससे ट्रैफिक कंट्रोल रूम पहले से रास्ते को सुगम बनाने की तैयारी कर सके।
नोएडा पुलिस ने आम वाहन चालकों से भी अपील की है कि सड़क पर एंबुलेंस दिखाई देने पर उसे तत्काल रास्ता दें और चौराहों पर अनावश्यक रूप से वाहन खड़े न करें। पुलिस का मानना है कि प्रशासन के साथ नागरिकों का सहयोग मिलने पर यह व्यवस्था आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बना सकती है।
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