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अंक: 12 Oct 2026
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एमिटी विश्वविद्यालय में ‘ट्रेस-2026’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

न्यूज़रूम डेस्क • • 5 मिनट पढ़ें
एमिटी विश्वविद्यालय में ‘ट्रेस-2026’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

सिविल इंजीनियरिंग में आधुनिक तकनीक, एआई और सतत विकास पर विशेषज्ञों ने रखे विचार, नेपाल के प्रो. भोला एनएस घिमिरे को मानद प्रोफेसरशिप

नोएडा। एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की ओर से ‘ट्रेंड्स एंड रिसेंट एडवांसेज इन सिविल इंजीनियरिंग-ट्रेस 2026’ के छठे संस्करण का बुधवार को शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलाव, आधुनिक निर्माण सामग्री, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटलीकरण, ऑटोमेशन और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की।

सम्मेलन का उद्घाटन भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सलाहकार एवं वैज्ञानिक ई (सेवानिवृत्त) तथा महासागर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार, सेंट्रल सॉयल एंड मटीरियल रिसर्च स्टेशन, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. मनीष गुप्ता, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) बलविंदर शुक्ला, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के डिप्टी डायरेक्टर जनरल नलिन कुमार श्रीवास्तव, नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. (डॉ.) भोला एनएस घिमिरे तथा एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार पांडे ने किया।

आधुनिक तकनीक से ही हल होंगी इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां

उद्घाटन सत्र में डॉ. विजय कुमार ने पर्यावरण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी जटिल चुनौतियों से निपटने में वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भविष्य के सिविल इंजीनियरों को केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें समस्या का समाधान खोजने वाला, तकनीक का प्रभावी उपयोग करने वाला और जिम्मेदार पेशेवर बनना होगा।

एआई, ड्रोन और रोबोटिक्स को इंजीनियरिंग से जोड़ने पर जोर

सेंट्रल सॉयल एंड मटीरियल रिसर्च स्टेशन के निदेशक डॉ. मनीष गुप्ता ने मजबूत और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में आधुनिक अनुसंधान और तकनीकों के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सिविल इंजीनियरिंग में रिमोट सेंसिंग, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक का व्यापक उपयोग बढ़ना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि एआई मानव सोच का विकल्प नहीं बन सकता। इंजीनियरों को उन भवनों और संरचनाओं की सुरक्षा के प्रति पूरी जिम्मेदारी निभानी होगी, जिनका निर्माण वे कर रहे हैं।

विकसित भारत 2047 के लिए तैयार हों युवा इंजीनियर

एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) बलविंदर शुक्ला ने सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को ऐसे इंजीनियरों की जरूरत है, जो बदलती इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों और सस्टेनेबिलिटी की चुनौतियों को समझ सकें। इसके लिए छात्रों और शोधकर्ताओं को भविष्य की तकनीकों से जुड़े ज्ञान एवं कौशल से लैस करना जरूरी है।

नदियों और जल संसाधनों के संरक्षण पर जोर

नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के डिप्टी डायरेक्टर जनरल नलिन कुमार श्रीवास्तव ने जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए टिकाऊ तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सिविल इंजीनियरों को नदियों को प्रदूषण से बचाने और जल संसाधनों के संरक्षण के लिए व्यावहारिक एवं प्रभावी समाधान विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए।

प्रो. भोला घिमिरे को मानद प्रोफेसरशिप

सम्मेलन के दौरान नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. (डॉ.) भोला एनएस घिमिरे को उनके अकादमिक योगदान और विशेषज्ञता के लिए एमिटी विश्वविद्यालय की ओर से मानद प्रोफेसरशिप प्रदान की गई।

सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रो. घिमिरे ने एमिटी विश्वविद्यालय का आभार जताते हुए कहा कि यह सम्मान उनके और एमिटी के बीच दीर्घकालिक अकादमिक जुड़ाव की शुरुआत है। उन्होंने छात्रों से जिज्ञासु और निडर बने रहने तथा असफलताओं से नहीं घबराने का आह्वान किया।

निर्माण क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल पर रहेगा फोकस

एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार पांडे ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि सिविल इंजीनियरिंग में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों को देखते हुए सम्मेलन में इनोवेटिव निर्माण सामग्री, डिजिटलीकरण, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

शोधपत्रों के साथ कई तकनीकी सत्र होंगे आयोजित

सम्मेलन के दौरान ‘ट्रेस-2026’ पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। इसमें सम्मेलन में प्रस्तुत किए जाने वाले समकालीन शोध और विशेषज्ञों के अकादमिक योगदान को शामिल किया गया है।

कार्यक्रम में आईआईटी दिल्ली के डॉ. एस.के. त्यागी और प्रो. जी.वी. रमना, एडिथ कोवान यूनिवर्सिटी के डॉ. संजय कुमार शुक्ला, रोवन यूनिवर्सिटी के प्रो. यूसुफ मेहता, यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस शिकागो के प्रो. कृष्णा आर. रेड्डी तथा यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी की डॉ. निधि नागाबथला समेत कई विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे।

सम्मेलन में रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन के साथ ‘भूकंपीय लचीलापन और आपदा न्यूनीकरण’, ‘सतत भविष्य के लिए तकनीक’ तथा ‘डिजिटल युग में सिविल इंजीनियरिंग : आने वाली चुनौतियां और भविष्य के लिए तैयार रहने की रणनीतियां’ जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।

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