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बिहार के वैशाली में गंगा नदी में नाव हादसा, 13 बच्चों की मौत; एक परिवार की 7 बच्चियों ने गंवाई जान
राघोपुर में श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे नाव सवार, क्षमता से अधिक लोगों के बैठने की आशंका; 17 वर्षीय लड़की ने तीन लोगों की जान बचाई, SDRF का रेस्क्यू अभियान जारी
अनप्लग इंडिया। डेस्क
वैशाली/पटना। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर क्षेत्र में गंगा नदी में नाव पलटने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में 13 बच्चों की मौत की खबर है। मृतकों की उम्र छह से 15 वर्ष के बीच बताई गई है। सबसे दर्दनाक बात यह है कि मृतकों में एक ही परिवार की सात बच्चियां शामिल हैं। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात करीब 8:30 बजे नाव पर सवार लोग गंगा नदी पार कर श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे। नाव में 25 से अधिक लोगों के सवार होने की बात सामने आई है, हालांकि SDRF के एक अधिकारी ने नाव में 22 लोगों के होने की जानकारी दी। इसी दौरान नाव बीच नदी में पलट गई और सवार लोग पानी में डूबने लगे।
जर्जर नाव पर क्षमता से अधिक लोग सवार होने की आशंका
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे में शामिल नाव की हालत ठीक नहीं थी। ग्रामीणों ने दावा किया कि नाव जर्जर थी और इसकी स्थिति को लेकर पहले भी प्रशासन को सूचना दी गई थी। हालांकि, हादसे के कारणों और पूर्व शिकायतों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
बताया गया कि रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला के लोग एक भोज में शामिल होने जा रहे थे। नाव पलटते ही घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत बचाव का प्रयास शुरू किया। लोगों को नदी से निकालने के लिए रस्सियों, लकड़ी और खाट तक का इस्तेमाल किया गया।
एक परिवार की सात बच्चियों की मौत से गांव में मातम
इस हादसे में कई परिवारों ने अपने बच्चों को खो दिया। मृतकों में एक ही परिवार की सात बच्चियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। बच्चों के शव गांव पहुंचने के बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, परिजनों ने बच्चों का पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया। स्थिति को देखते हुए पुलिस की तैनाती की गई। हादसे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन अस्पताल पहुंचे।
17 साल की लड़की ने बचाईं तीन जानें
हादसे के बीच राहत की बात यह रही कि एक 17 वर्षीय लड़की ने तीन लोगों की जान बचाई। दुर्घटना के दौरान स्थानीय लोगों ने भी जोखिम उठाकर डूब रहे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। ग्रामीणों की मदद से कई लोगों को नदी से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।
बचाव अभियान में जुटे स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन को सूचना मिलने के बाद पहुंचने में देरी हुई। एक स्थानीय बचावकर्ता ने यह भी दावा किया कि अस्पताल में ऑक्सीजन और इलाज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
घायलों का पटना के अस्पतालों में इलाज
हादसे में घायल लोगों को पटना के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। उपलब्ध अपडेट के अनुसार, नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) में चार बच्चों का इलाज चल रहा था। वहीं, दो अन्य घायलों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की जानकारी दी गई।
SDRF की टीम ने रातभर नदी में तलाशी अभियान चलाया और बुधवार सुबह भी राहत एवं बचाव कार्य जारी रहने की सूचना थी। प्रशासन की ओर से घटनास्थल पर बचाव कार्य किया गया।
प्रधानमंत्री ने जताया दुख, सहायता राशि की घोषणा
हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई। राघोपुर से विधायक तेजस्वी यादव ने भी घटना पर दुख जताया। उन्होंने बताया कि हादसे की जानकारी मिलने के समय वह दिल्ली में थे और अगले दिन पटना पहुंचने की बात कही।
ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन से जवाबदेही की मांग
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया और घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों से सवाल किए। कुछ लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समय पर मौके पर नहीं पहुंचने पर भी नाराजगी व्यक्त की।
ग्रामीणों की ओर से नाव की कथित जर्जर स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हादसे के वास्तविक कारणों, नाव में सवार लोगों की सही संख्या और प्रशासन को पहले सूचना दिए जाने के दावों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
यह हादसा नदी पार करने के दौरान नावों की सुरक्षा और क्षमता से अधिक सवारी बैठाने के संभावित खतरे को गंभीरता से सामने लाता है। फिलहाल पूरे इलाके में शोक का माहौल है और पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित है।
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