नोएडा-ग्रेटर नोएडा में निवेश प्रस्तावों की होगी जमीनी पड़ताल, 1.76 लाख करोड़ के निवेश का मांगा ब्योरा
25 अक्टूबर तक शासन को सौंपनी होगी रिपोर्ट, कितनी कंपनियां चालू और कितनी बंद हुईं, इसका होगा खुलासा
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में निवेश के लिए हुए बड़े समझौतों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए शासन ने कवायद तेज कर दी है। पिछले पांच वर्षों के निवेश प्रस्तावों और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में शामिल परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। संबंधित विभागों को 25 अक्टूबर तक यह रिपोर्ट शासन को भेजनी होगी।
जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि निवेश के लिए किए गए कितने समझौते धरातल पर उतरे, कितनी कंपनियों ने उत्पादन या व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दीं और कितनी इकाइयां शुरू होने के बाद बंद हो गईं। इसके अलावा, अब तक शुरू नहीं हो सकी परियोजनाओं की स्थिति भी दर्ज की जाएगी।
निवेश प्रस्तावों में शामिल थे 1.76 लाख करोड़ रुपये
वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लिए लगभग 1.76 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर समझौते हुए थे। इनमें नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के लिए करीब 89 हजार करोड़ रुपये और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के लिए लगभग 87 हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव शामिल थे।
इन समझौतों के माध्यम से औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने और विभिन्न व्यावसायिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की योजना थी। अब शासन इन प्रस्तावों की प्रगति का आकलन कर यह जानना चाहता है कि घोषित निवेश का कितना हिस्सा वास्तव में परियोजनाओं में तब्दील हुआ।
दस्तावेजों के साथ मौके पर भी होगी जांच
रिपोर्ट तैयार करने के लिए निवेश मित्र और नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों की संयुक्त टीम सर्वे करेगी। टीम संबंधित स्थलों का निरीक्षण कर यह जांचेगी कि परियोजना के लिए भूखंड आवंटित हुआ है या नहीं, निर्माण कार्य शुरू हुआ अथवा नहीं और कंपनी में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं या नहीं।
जिन इकाइयों को फंक्शनल सर्टिफिकेट जारी किया जा चुका है, उनकी मौजूदा स्थिति का भी सत्यापन किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद संबंधित कंपनी ने अपना संचालन जारी रखा या किसी कारण से बंद हो गई।
रोजगार के वादों और वास्तविक आंकड़ों का होगा मिलान
निवेश परियोजनाओं से पैदा हुए रोजगार का विवरण भी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। कंपनियों ने समझौते के समय जितने लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया था, उसके मुकाबले वास्तव में कितने लोगों को काम मिला, इसका आकलन किया जाएगा।
इसके साथ ही उन कंपनियों की सूची भी तैयार होगी, जिन्हें अब तक भूखंड आवंटित नहीं किए जा सके हैं। भूखंड मिलने में देरी के कारणों और परियोजनाओं के अटकने से जुड़ी परिस्थितियों का ब्योरा भी जुटाया जाएगा।
अधूरी परियोजनाओं की स्थिति होगी स्पष्ट
शासन के निर्देश के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के निवेश प्रस्तावों और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी से संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी। इसमें भूखंड आवंटन, निर्माण कार्य, उत्पादन या कारोबार की शुरुआत और कंपनियों की वर्तमान स्थिति जैसी जानकारियां शामिल होंगी।
25 अक्टूबर तक मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर यह तस्वीर सामने आ सकेगी कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में घोषित निवेश में से कितनी परियोजनाएं वास्तव में शुरू हुईं, कितनी कंपनियां सक्रिय हैं और कितनी योजनाएं अभी भी अधूरी पड़ी हैं।