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15 अक्तूबर 2026 | भरोसेमंद खबरें, सीधे आपके शहर से
अंक: 15 Oct 2026
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विपक्षी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखी बहस: अभिजीत दीपके बोले— ‘क्या अब देश में तिरंगा फहराना गुनाह है?’, प्रशांत भूषण की हुंकार— ‘बर्बरता न रुकी, तो सत्ता बदलनी होगी’

Rinku Yadav • • 8 मिनट पढ़ें
विपक्षी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखी बहस: अभिजीत दीपके बोले— ‘क्या अब देश में तिरंगा फहराना गुनाह है?’, प्रशांत भूषण की हुंकार— ‘बर्बरता न रुकी, तो सत्ता बदलनी होगी’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा के बोलते ही हंगामा, प्रशांत भूषण और दीपके ने सरकार को घेरा!

प्रकाश राज ने देशभर में आंदोलन तेज करने का किया ऐलान, 23 अक्टूबर से ‘पीपुल्स अगेंस्ट SIR’ अभियान शुरू करने की घोषणा

अनप्लग इंडिया। डेस्क
नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में आयोजित विपक्ष और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं की एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आज उस समय भारी हंगामा और राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई, जब मंच से वक्ताओं ने हालिया प्रदर्शनों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सरकार पर तीखे हमले शुरू किए। नेहा बोरा के वक्तव्य के साथ शुरू हुई इस प्रेस वार्ता में तब विवाद गहरा गया जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने देश की वर्तमान लोकतांत्रिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए।
तिरंगा फहराने को लेकर अभिजीत दीपके का बड़ा बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने हाल ही में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि देश के भीतर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना और राष्ट्रीय ध्वज फहराना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। दीपके ने सवालिया लहजे में कहा, “क्या अब इस देश में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए तिरंगा फहराना भी एक अपराध बन चुका है? जिस तरह से प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है।”
प्रशांत भूषण की दो टूक— ‘बर्बरता जारी रही, तो जनता बदल देगी सरकार’
इसी मामले पर देश के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने जंतर-मंतर और दिल्ली के अन्य हिस्सों में हुए हालिया सीजेपी (CJP) प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट पाबंदी, मेट्रो सेवाओं को बंद करने और कार्यकर्ताओं की धरपकड़ पर सरकार को आड़े हाथों लिया।
       प्रशांत भूषण ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के लिए जिस तरह की प्रशासनिक बर्बरता और तानाशाही का सहारा लिया जा रहा है, उसे देश की जनता लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “अगर नागरिक अधिकारों का हनन और यह प्रशासनिक बर्बरता इसी तरह जारी रही, तो आने वाले समय में देश की जनता लोकतांत्रिक तरीके से इस सरकार को उखाड़ फेंकेगी और सत्ता बदलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”
नेहा बोरा के बोलते ही शुरू हुआ हंगामा
प्रेस वार्ता की शुरुआत में जैसे ही नेहा बोरा ने हालिया पुलिसिया कार्रवाई और हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की आपबीती को मीडिया के सामने रखना शुरू किया, वैसे ही वहां मौजूद कुछ पक्षों के बीच तीखी बहस और हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आड़ में नागरिकों के शांतिपूर्ण आंदोलन करने के मौलिक अधिकार को पूरी तरह खत्म करना चाहती है। शीर्ष अदालत द्वारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने के आदेश के बाद आई इस राजनीतिक प्रतिक्रिया ने दिल्ली की सियासी हलचल को और तेज कर दिया है।

प्रकाश राज का ऐलान—देशभर में आंदोलन तेज करेंगे

अभिनेता प्रकाश राज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शनों को सीमित करने की कोशिशों के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि आंदोलनकारी अब देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी आवाज उठाएंगे।

प्रकाश राज ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जो लोग पहले बड़े मुद्दों से नहीं डरते थे, वे अब ‘कॉकरोच’ से डरने लगे हैं। उनका यह बयान CJP के नाम और आंदोलन को लेकर राजनीतिक कटाक्ष के रूप में सामने आया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि कर्नाटक के उडुपी क्षेत्र में हजारों आदिवासी लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए या उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया। प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों को यह जानकारी नहीं थी कि उनके नाम सूची से क्यों हटाए गए और उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए क्या करना चाहिए। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित चुनावी रिकॉर्ड के आधार पर जांच महत्वपूर्ण होगी।

प्रकाश राज ने कहा कि आंदोलन को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्होंने देश के जिलों और गांवों में लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने की बात कही।

प्रशांत भूषण की चेतावनी—विरोध को अपराध न माना जाए

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार के खिलाफ विरोध करना अपने आप में अपराध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ कठोर व्यवहार और विरोध प्रदर्शनों पर पाबंदियां लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार का कथित दमनकारी रवैया जारी रहा, तो जनता राजनीतिक बदलाव की मांग कर सकती है। भूषण के अनुसार, लोकतंत्र की रक्षा के लिए नागरिक समाज और युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

उनका बयान ऐसे समय आया है, जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, प्रदर्शन स्थलों की सूची में बदलाव और कनॉट प्लेस में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर कानूनी तथा राजनीतिक विवाद जारी है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शन पर रोक लगाने से किया इनकार

इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। यह मामला कनॉट प्लेस के एक दुकानदार की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई थी कि प्रदर्शन के कारण इलाके के कारोबार और आम लोगों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है।

दुकानदार की ओर से दलील दी गई कि कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है और सप्ताहांत में प्रदर्शन होने से व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। दिल्ली पुलिस ने अदालत को आश्वासन दिया कि प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

अदालत ने पुलिस के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को निर्धारित बताई गई है।

दूसरी ओर, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रस्तावित मार्च की अनुमति नहीं देने की मांग की थी। CTI ने दावा किया कि 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के कारण कारोबार को लगभग 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह आंकड़ा संगठन का दावा है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर विवाद

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर जारी गतिरोध भी शामिल है। खबर के अनुसार, केंद्र सरकार ने 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया था। इसके बाद CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया पर रोक की मांग को लेकर प्रदर्शन की अनुमति मांगी, लेकिन पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया।

प्रदर्शन स्थलों में बदलाव के बाद राजनीतिक संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

CJP के दो प्रवक्ताओं, आशुतोष रांका और सौरव दास को भी प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर सामने आई थी। इससे पहले CJP संस्थापक अभिजीत दीपके सहित कुछ लोगों को जमानती मुचलके पर रिहा किए जाने की जानकारी दी गई थी।

अब 16 अक्टूबर के प्रदर्शन पर नजर

CJP और उसके सहयोगी संगठनों ने SIR की प्रक्रिया, मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका और विरोध प्रदर्शनों पर लगी पाबंदियों को लेकर अपना अभियान जारी रखने का संकेत दिया है। वहीं, कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर व्यापारियों की चिंताओं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच प्रशासन के सामने संतुलन कायम रखने की चुनौती है।

23 अक्टूबर से प्रस्तावित ‘पीपुल्स अगेंस्ट SIR’ अभियान के ऐलान के बाद यह विवाद आने वाले दिनों में और व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले सकता है। अब सबकी नजर 16 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस की व्यवस्था और इस मामले में आगे होने वाली न्यायिक सुनवाई पर रहेगी।

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