ग्रेटर नोएडा: शारदाकेयर हेल्थसिटी में ‘द लाइफ बियॉन्ड डायलिसिस’ कार्यक्रम, किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों के अनुभवों को किया साझा
80 से अधिक मरीजों और परिजनों ने लिया हिस्सा, विशेषज्ञों ने किडनी की देखभाल, ट्रांसप्लांट और रिकवरी से जुड़े सवालों के दिए जवाब
अनप्लग इंडिया। डेस्क
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा स्थित शारदाकेयर हेल्थसिटी ने किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों को जागरूक करने के उद्देश्य से ‘द लाइफ बियॉन्ड डायलिसिस’ कार्यक्रम का आयोजन किया। अस्पताल परिसर में आयोजित इस इंटरैक्टिव कार्यक्रम में 80 से अधिक मरीजों और उनके परिजनों ने हिस्सा लिया। इस दौरान किडनी ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों ने अपने अनुभव साझा किए, जबकि विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उपचार के विभिन्न विकल्पों, सर्जरी की तैयारी और ट्रांसप्लांट के बाद की देखभाल से जुड़े सवालों के जवाब दिए।
कार्यक्रम में किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों के संघर्ष, हौसले और जीवन में आए बदलावों को सराहा गया। उन्हें सम्मानित भी किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य मरीजों और उनके परिवारों को किडनी की बीमारी, डायलिसिस तथा ट्रांसप्लांट से संबंधित सही जानकारी उपलब्ध कराना और इलाज के बारे में निर्णय लेने में मदद करना था।
किडनी की बीमारी और ट्रांसप्लांट की बढ़ती जरूरत पर चर्चा
कार्यक्रम में देश में किडनी संबंधी उपचार की बढ़ती जरूरत पर भी चर्चा हुई। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में फरवरी 2025 तक प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के तहत 4.33 लाख मरीजों ने डायलिसिस की सुविधा ली। वहीं, नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत में 13,476 किडनी ट्रांसप्लांट किए गए।
इन आंकड़ों के मद्देनजर मरीजों को उपचार के विकल्पों, लंबे समय तक देखभाल और ट्रांसप्लांट के बाद जरूरी सावधानियों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
ट्रांसप्लांट से पहले जांच और तैयारी जरूरी
शारदाकेयर हेल्थसिटी के किडनी ट्रांसप्लांट एवं यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. अनिल शर्मा ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट से पहले मरीज और अंगदान करने वाले व्यक्ति, दोनों की विस्तृत जांच जरूरी होती है। इसमें उनकी मेडिकल फिटनेस, आपसी अनुकूलता और संभावित जोखिमों का आकलन किया जाता है। उन्होंने कहा कि ट्रांसप्लांट का निर्णय लेने से पहले मरीजों को प्रक्रिया और उससे जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातों की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने मरीजों को बताया कि ट्रांसप्लांट की पात्रता, डोनर और प्राप्तकर्ता के बीच अनुकूलता तथा सर्जरी से पहले की तैयारी जैसे पहलुओं को समझना उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण है।
ट्रांसप्लांट के बाद नियमित देखभाल पर जोर
अस्पताल के किडनी ट्रांसप्लांट एवं यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. अहमद कमाल ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद भी मरीजों को नियमित रूप से निर्धारित दवाएं लेनी होती हैं। समय पर फॉलो-अप कराना और किडनी के कामकाज की निगरानी करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों के वास्तविक अनुभव दूसरों को सर्जरी के बाद की रिकवरी और जीवन में आने वाले बदलावों को समझने में मदद करते हैं। ऐसे मरीजों को सम्मानित करने का उद्देश्य उनके हौसले की सराहना करने के साथ-साथ दूसरों को अपने अनुभव साझा करने के लिए प्रोत्साहित करना भी है।
हर मरीज के लिए उपचार की योजना अलग
शारदाकेयर हेल्थसिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी के यूनिट हेड एवं निदेशक डॉ. भीम राज गुप्ता ने कहा कि किडनी की बीमारी हर मरीज को अलग तरह से प्रभावित कर सकती है। इसलिए बीमारी की स्थिति और उसके बढ़ने की गति को समझकर उपचार संबंधी निर्णय लेना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि डायलिसिस किडनी के कुछ कार्यों को पूरा करने में मदद करती है, लेकिन मरीज की स्थिति के अनुसार लंबे समय की देखभाल और अन्य उपचार विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है। कार्यक्रम के माध्यम से मरीजों और उनके परिवारों को बीमारी के साथ जीवन जीने तथा उपलब्ध उपचार विकल्पों को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिला।
मरीजों और परिवारों को जागरूक करने की पहल
‘द लाइफ बियॉन्ड डायलिसिस’ कार्यक्रम में नेफ्रोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांटेशन और यूरोलॉजी के विशेषज्ञों ने मरीजों के सवालों का जवाब दिया। चर्चा में ट्रांसप्लांट की पात्रता, डोनर की अनुकूलता, सर्जरी की तैयारी, रिकवरी और नियमित चिकित्सकीय निगरानी जैसे विषय शामिल रहे।
शारदाकेयर हेल्थसिटी की इस पहल का उद्देश्य विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह और ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों के अनुभवों को एक मंच पर लाकर लोगों को जागरूक करना तथा किडनी की बीमारी के उपचार और रिकवरी के दौरान मरीजों एवं उनके परिवारों को बेहतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराना था।
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