इकरा हसन से शादी को लेकर भाजपा विधायक का बयान, बोले- हिंदू युवक से विवाह करें तो समाज स्वीकार करेगा
नंद किशोर गुर्जर सहारनपुर में गौ रक्षा दल के कार्यक्रम में पहुंचे थे, कैराना सांसद इकरा हसन के पुराने बयान का भी किया जिक्र
अनप्लग इंडिया। डेस्क
सहारनपुर। कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को लेकर लोनी से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने सहारनपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर इकरा हसन किसी हिंदू गुर्जर युवक से विवाह करना चाहें तो समाज उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार है। विधायक ने कहा कि गुर्जर समाज ने हमेशा इकरा को बेटी के तौर पर देखा है।
नंद किशोर गुर्जर शनिवार शाम सहारनपुर में गौ रक्षा दल के प्रथम स्थापना दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने इकरा हसन से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रखी।
इकरा के पुराने बयान का किया जिक्र
भाजपा विधायक ने करीब एक साल पहले इकरा हसन की ओर से दिए गए एक बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इकरा ने गुर्जर समाज के लोगों के बीच सवाल किया था कि क्या वह उनकी बेटी नहीं हैं?
इकरा हसन ने उस समय अपने खिलाफ की जा रही कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का विरोध किया था। उनका कहना था कि चुनाव के दौरान सभी समुदायों के लोगों ने उन्हें बेटी और बहन मानकर समर्थन दिया था और विरोध करते समय धर्म, जाति तथा महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
इमरान मसूद को लेकर भी साधा निशाना
कार्यक्रम में नंद किशोर गुर्जर ने सहारनपुर के कांग्रेस नेता इमरान मसूद का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सत्ता में आने के बाद इमरान मसूद के बयानों में बदलाव आया है।
विधायक ने कहा कि पहले उनके बयानों में अलग तरह की भाषा सुनाई देती थी, जबकि अब वह कानून और व्यवस्था की बात करते हैं। उन्होंने सहारनपुर में कानून-व्यवस्था और पुराने विवादों का भी उल्लेख किया।
जातीय एकता पर दिया जोर
नंद किशोर गुर्जर ने अपने संबोधन में विभिन्न जातियों के बीच एकता की बात कही। उन्होंने गुर्जर, जाट, सैनी, पाल और कश्यप समाज सहित अन्य समुदायों से आपसी एकजुटता बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि समाज को जातिगत आधार पर बंटने के बजाय एक परिवार की तरह आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने युवाओं से अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को समझने की भी अपील की।
गौ संरक्षण को लेकर भी कही बात
गौ संरक्षण के मुद्दे पर विधायक ने कहा कि यह जिम्मेदारी केवल किसी एक संगठन की नहीं है। उनके मुताबिक समाज के प्रत्येक व्यक्ति को गायों के संरक्षण के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पहले गांवों में बुजुर्ग और अनुपयोगी हो चुकी गायों को भी परिवार का हिस्सा मानकर रखा जाता था, लेकिन समय के साथ यह परंपरा कमजोर हुई है।
इकरा हसन ने क्या कहा था?
करीब एक साल पहले कैराना सांसद इकरा हसन सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र के छापुर गांव पहुंची थीं। यह गुर्जर बहुल गांव है। वहां उन्होंने अपने खिलाफ की जा रही कथित टिप्पणियों पर नाराजगी जताई थी।
इकरा ने कहा था कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन विरोध के दौरान धर्म, बिरादरी और महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा था कि चुनाव में अलग-अलग धर्म और जातियों के लोगों ने उन्हें बेटी और बहन मानकर वोट दिया था।
इकरा ने यह भी कहा था कि उन्होंने कभी धर्म या बिरादरी के आधार पर राजनीति करने की कोशिश नहीं की और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है। इसी दौरान उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या वह गुर्जर समाज की बेटी नहीं हैं?
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