बाराबंकी में CNG कार बनी आग का गोला, चालक की दर्दनाक मौत; चार महीने पहले खरीदी थी गाड़ी
लखनऊ एयरपोर्ट से सवारी छोड़कर घर लौट रहे थे प्रदीप कुमार, घर से करीब दो किलोमीटर पहले हुआ हादसा, आग लगने की वजह जानने में जुटी पुलिस और फॉरेंसिक टीम
अनप्लग इंडिया। डेस्क
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक दर्दनाक हादसे में कार सवार चालक की जलकर मौत हो गई। सफदरगंज थाना क्षेत्र में एक CNG कार आग की चपेट में आ गई। शनिवार सुबह ग्रामीणों ने कार को जली हुई हालत में देखा, जिसके बाद पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी गई। कार के भीतर चालक के अवशेष मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई।
मृतक की पहचान प्यारेपुर निवासी प्रदीप कुमार (45) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने करीब चार महीने पहले ही टाटा टियागो का CNG मॉडल खरीदा था। हादसे के कारणों का अभी आधिकारिक रूप से खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम मामले की जांच कर रही हैं।
घर लौटते समय रास्ते में हुआ हादसा
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, प्रदीप कुमार लखनऊ एयरपोर्ट से सवारियों को बाराबंकी छोड़कर अपने घर लौट रहे थे। सफदरगंज थाना क्षेत्र में उनका घर पहुंचने से करीब दो किलोमीटर पहले यह घटना हुई। घटनास्थल जिला मुख्यालय से लगभग 33 किलोमीटर दूर बताया गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रात करीब 1:30 बजे तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी। हालांकि, रात के समय घटना का स्पष्ट पता नहीं चल सका। शनिवार सुबह करीब छह बजे ग्रामीणों ने सड़क किनारे कार को जली हुई अवस्था में देखा और पुलिस को सूचना दी।
सुबह कार के भीतर मिले चालक के अवशेष
स्थानीय निवासी मदन कुमार वर्मा के मुताबिक, घटनास्थल उनके घर से लगभग 400 मीटर की दूरी पर है। सुबह टहलने के लिए निकले लोगों ने कार को जलते हुए देखा। सूचना मिलने पर पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। आग बुझने के बाद कार के अंदर से जले हुए अवशेष बरामद किए गए।
पुलिस ने वाहन के पंजीकरण नंबर के आधार पर चालक की पहचान की। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से नमूने एकत्र किए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। अवशेषों को पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया के लिए भी भेजा गया।
आग लगने के बाद दरवाजे लॉक होने की आशंका
सफदरगंज के थाना प्रभारी अजय प्रकाश त्रिपाठी के अनुसार, शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि आग लगने के बाद कार के दरवाजे लॉक हो गए होंगे। संभव है कि चालक ने बाहर निकलने के लिए दूसरे दरवाजे से प्रयास किया हो, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। हालांकि, इस घटनाक्रम की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल पुलिस आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी है। यह भी जांच का विषय है कि आग वाहन के किस हिस्से से शुरू हुई और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी खराबी थी।
परिवार में मातम, पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
प्रदीप कुमार अपने परिवार के प्रमुख सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी राधा, दो बेटियां नेहा और उमा तथा दो बेटे सुकेश और शिव हैं। परिजनों के मुताबिक, प्रदीप ने हादसे से पहले शाम करीब चार बजे पत्नी से फोन पर बात की थी और देर से घर पहुंचने की जानकारी दी थी।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि प्रदीप स्वास्थ्य विभाग में चलने वाली गाड़ी भी चलाते थे और कभी-कभी एयरपोर्ट से सवारियां लेकर आते-जाते थे। हादसे की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजन घटनास्थल पर पहुंचे तो उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
पुलिस का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हादसे की वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है।
यह भी पढ़ें