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17 अक्तूबर 2026 | भरोसेमंद खबरें, सीधे आपके शहर से
अंक: 17 Oct 2026
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बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर गूगल का बड़ा कदम, भारत की साइबर एजेंसियों को सीधे जानकारी देने पर सहमति

Rinku Yadav • • 4 मिनट पढ़ें
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर गूगल का बड़ा कदम, भारत की साइबर एजेंसियों को सीधे जानकारी देने पर सहमति

बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों की रिपोर्ट सीधे भारतीय एजेंसियों तक पहुंचाने की पहल, गूगल ने I4C के साथ सूचना साझा करने की व्यवस्था पर जताई सहमति, मेटा भी पहले कर चुका है ऐसा कदम

अनप्लग इंडिया। डेस्क

नई दिल्ली | बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण से जुड़े मामलों में कार्रवाई तेज करने के लिए गूगल ने भारत सरकार के साथ सीधे सूचना साझा करने की व्यवस्था शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। कंपनी ने भारत से संबंधित ऐसे मामलों की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) को उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है। इससे जांच एजेंसियों को संवेदनशील मामलों में समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।

यह घटनाक्रम सितंबर 2026 में सामने आया था। उस समय गूगल ने कहा था कि वह बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का पता लगाने, उसे रोकने, हटाने और संबंधित मामलों की रिपोर्टिंग को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है। कंपनी की प्रस्तावित व्यवस्था का तकनीकी ढांचा तैयार होने के बाद सूचनाएं सीधे भारतीय एजेंसियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़नी थी।

पहले अमेरिका की संस्था के जरिए पहुंचती थी जानकारी

अब तक गूगल और मेटा जैसी अमेरिका मुख्यालय वाली कंपनियां बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी संदिग्ध ऑनलाइन सामग्री की रिपोर्ट अमेरिकी गैर-लाभकारी संस्था नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (NCMEC) को भेजती रही हैं। इसके बाद संबंधित जानकारी जरूरत के अनुसार विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचाई जाती थी।

भारतीय अधिकारियों की चिंता थी कि इस प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है। विशेष रूप से उन मामलों में देरी गंभीर हो सकती है, जहां किसी बच्चे की सुरक्षा तत्काल खतरे में हो और पुलिस को तुरंत हस्तक्षेप करना जरूरी हो।

सीधे भारतीय एजेंसियों को सूचना उपलब्ध कराने की प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य इस अतिरिक्त प्रक्रिया को कम करना और जांच में तेजी लाना है।

मेटा ने भी सितंबर में लिया था ऐसा कदम

गूगल का यह कदम मेटा के इसी तरह के फैसले के बाद सामने आया था। फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा ने भी सितंबर 2026 में भारत में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे I4C के साइबर अपराध पोर्टल पर भेजने की प्रतिबद्धता जताई थी।

इससे पहले भारत सरकार ने बड़ी टेक कंपनियों के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और आपत्तिजनक सामग्री की रिपोर्टिंग को लेकर बातचीत की थी। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों में सूचना संबंधित भारतीय एजेंसियों तक जल्द पहुंचे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो।

2025 में दुनियाभर से मिलीं 2.13 करोड़ से अधिक रिपोर्ट

बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण से संबंधित सामग्री दुनिया भर में गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अमेरिका स्थित NCMEC की साइबरटिपलाइन को वर्ष 2025 में संभावित बाल यौन शोषण से संबंधित 2.13 करोड़ से अधिक रिपोर्ट मिली थीं।

इन आंकड़ों से समस्या के बड़े पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, रिपोर्ट की संख्या को अलग-अलग पीड़ित बच्चों या पुष्ट अपराधों की संख्या के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री की पहचान करना, उसे हटाना, बार-बार अपलोड होने से रोकना और संबंधित मामलों की सूचना जांच एजेंसियों तक पहुंचाना इस चुनौती से निपटने के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

सीधे रिपोर्टिंग से क्या होगा फायदा?

भारत की साइबर अपराध एजेंसियों को सीधे जानकारी मिलने से संदिग्ध खातों, सामग्री और संभावित अपराधियों से जुड़े मामलों की जांच में तेजी लाने में मदद मिल सकती है। खासकर ऐसे मामलों में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी, जहां किसी बच्चे को तत्काल सुरक्षा की आवश्यकता हो।

हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि रिपोर्टिंग व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है, सूचना कितनी जल्दी उपलब्ध कराई जाती है और संबंधित एजेंसियां उस पर कितनी तेजी से कार्रवाई करती हैं।

कुल मिलाकर, गूगल और मेटा की सितंबर 2026 में सामने आई पहल भारत में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम थी। इसे वर्तमान में पूरी तरह लागू हो चुकी व्यवस्था बताने से पहले इसके क्रियान्वयन की नवीनतम स्थिति की पुष्टि करना आवश्यक है।

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