जंतर-मंतर पर अब नहीं गूंजेंगे विरोध के स्वर, केंद्र सरकार ने प्रदर्शनों पर लगाई पूर्ण रोक: रामलीला मैदान समेत 3 नए ठिकाने तय
Rinku Yadav
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33 साल से प्रदर्शनकारियों का प्रमुख केंद्र रहा जंतर-मंतर सूची से बाहर; रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड को बनाया गया विकल्प
अनप्लग इंडिया। डेस्क
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर अब विरोध-प्रदर्शनों का गवाह नहीं बनेगा। केंद्र सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से पूरी तरह बाहर कर दिया है। गौरतलब है कि पिछले 33 वर्षों से यह स्थान देश के छोटे-बड़े आंदोलनों का मुख्य केंद्र रहा था।
गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के बाद अब दिल्ली में शांतिपूर्ण धरने के लिए तीन वैकल्पिक स्थानों का चयन किया गया है, जिनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी (CBD) ग्राउंड शामिल हैं। इन नए स्थलों पर प्रदर्शन के नियमों को लेकर जल्द ही एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की जाएगी।
सुरक्षा कारणों से लिया गया बड़ा फैसला
हालांकि सरकार की ओर से इस पाबंदी की कोई आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों और हालिया घटनाक्रमों के अनुसार इसके पीछे 5 मुख्य सुरक्षा कारण माने जा रहे हैं:
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- संसद से नजदीकी: जंतर-मंतर देश की संसद से महज 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे वीवीआईपी इलाके की सुरक्षा हमेशा दांव पर रहती है।
- सुरक्षा में चूक की आशंका: बीते जून-जुलाई में विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारी संसद भवन के बेहद करीब पहुंच गए थे, जिसके बाद सुरक्षा घेरा मजबूत करने के लिए संसद के दरवाजे तक बंद करने पड़े थे।
- विपक्ष की बड़ी लामबंदी: वर्तमान राजनीतिक माहौल में राहुल गांधी समेत समूचा विपक्ष और विभिन्न संगठन दोबारा जंतर-मंतर पर एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे थे।
- दूरी का रणनीतिक लाभ: नए तय किए गए स्थानों में रामलीला मैदान संसद से करीब 3-4 किलोमीटर दूर है, जबकि बुराड़ी और सीबीडी ग्राउंड शहर के बाहरी कोनों में हैं, जिससे लुटियंस दिल्ली में कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी।
- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: बीते 9 अक्टूबर को सर्वोच्च अदालत ने भी कानून-व्यवस्था और जनसुविधाओं का हवाला देते हुए जंतर-मंतर के विकल्प के रूप में ऐसे बड़े मैदानों को तलाशने का सुझाव दिया था, जहां प्रदर्शनकारियों के लिए पानी, शौचालय और आपातकालीन चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
राजनीतिक सरगर्मी तेज: दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम
इस प्रशासनिक प्रतिबंध के बीच दिल्ली में सियासी पारा चढ़ गया है। निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार और अन्य प्रमुख मांगों को लेकर सोमवार को जब विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर पर मार्च निकालने की अनुमति मांगी, तो दिल्ली पुलिस ने केंद्र के नए नियमों का हवाला देकर परमिशन देने से साफ इनकार कर दिया।
पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में आंदोलनकारी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली पुलिस को साफ तौर पर 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है। संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों का कहना है कि यदि उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए वैकल्पिक तिथि या उचित स्थान की अनुमति तुरंत नहीं दी गई, तो वे पूरी दिल्ली में एक बार फिर बड़ा व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल इस विषय में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है।
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