मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
▪ देश: राहुल गांधी के मार्च पर CJI सूर्यकांत की दो टूक—अदालत को दबाव में नहीं ला सकता कोई ▪ देश: अंकिता भंडारी हत्याकांड: न्याय की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन, माता-पिता हिरासत में लेने के बाद रिहा ▪ राजनीति: दिल्ली में सियासी भूचाल: राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों का रो-रोकर बुरा हाल, पुलिस पर लगाए प्राइवेट पार्ट पर हमला करने के संगीन आरोप ▪ देश: एअर इंडिया की फ्लाइट में हाईजैक अलर्ट से हड़कंप, जयपुर में करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग; शुरुआती जांच में गलती से बटन दबने की आशंका ▪ राज्य: बिहार के वैशाली में गंगा नदी में नाव हादसा, 13 बच्चों की मौत; एक परिवार की 7 बच्चियों ने गंवाई जान ▪ राजनीति: अमित शाह का राहुल गांधी पर निशाना, बोले- 2029 में भी हारेगी कांग्रेस; SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों पर दिया जवाब ▪ देश: मोदी बोले- एक दशक में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए, भारत में पहली बार ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम ▪ राजनीति: SIR पर विपक्ष की याचिका में 14 कमियां, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने उठाए सवाल; ₹220 की कोर्ट फीस भी कम
15 अक्तूबर 2026 | भरोसेमंद खबरें, सीधे आपके शहर से
अंक: 15 Oct 2026
Unplug India

भरोसेमंद खबरें, सीधे आपके शहर से

आज का अखबार पढ़ें

फोर्टिस हॉस्पिटल मानेसर का कमाल: आधुनिक न्यूरोमॉड्यूलेशन और माइक्रोसर्जरी से उज्बेकिस्तान के तीन बच्चों को मिर्गी से मिली मुक्ति

Rinku Yadav • • 4 मिनट पढ़ें
फोर्टिस हॉस्पिटल मानेसर का कमाल: आधुनिक न्यूरोमॉड्यूलेशन और माइक्रोसर्जरी से उज्बेकिस्तान के तीन बच्चों को मिर्गी से मिली मुक्ति

दवाओं बेअसर होने के बाद एडवांस न्यूरोमॉड्यूलेशन (VNS) और माइक्रोसर्जरी तकनीक का किया गया प्रयोग।इलाज के बाद बच्चों के बोलने, हाथों के मूवमेंट और मानसिक विकास में दिखा शानदार सुधार।

अनप्लग इंडिया। डेस्क
मानेसर| हरियाणा के मानेसर स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने उज्बेकिस्तान से आए तीन ऐसे बच्चों का सफल इलाज किया है, जो गंभीर किस्म की ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी (ऐसी मिर्गी जिस पर दवाओं का असर होना बंद हो जाता है) से पीड़ित थे। कई तरह की भारी दवाओं के नियमित सेवन के बाद भी इन बच्चों को रोजाना जानलेवा दौरे पड़ रहे थे।
      फोर्टिस हॉस्पिटल मानेसर की मल्टीडिसीप्लीनरी टीम ने आधुनिक न्यूरोमॉड्यूलेशन टेक्नोलॉजी और प्रिसीजन माइक्रोसर्जिकल इंटरवेंशन (सटीक दिमागी सर्जरी) के अनूठे मेल से इन तीनों बच्चों को एक नया जीवन दिया है।
न्यूरोसर्जरी टीम के कुशल नेतृत्व में हुआ उपचार
इन बेहद जटिल मामलों का सफल प्रबंधन फोर्टिस हॉस्पिटल मानेसर के न्यूरोसर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. निशांत याग्निक और एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल के नेतृत्व वाली विशेष टीम द्वारा किया गया। डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद दो बच्चों के लिए वेगस नर्व स्टिमुलेशन (VNS) इंप्लांटेशन तकनीक को चुना, जबकि तीसरे बच्चे के मामले में एक बेहद जटिल माइक्रोसर्जिकल ब्रेन सर्जरी की प्रक्रिया को अंजाम दिया। शुरुआती फॉलो-अप में तीनों ही बच्चों की स्थिति में ऐतिहासिक सुधार देखा गया है।
मामला १: ३ वर्षीय मुहम्मद ज़ियो खोजाकुलोवा (रोजाना ३ से ४ दौरों से राहत)
तीन साल का मासूम मुहम्मद विकास संबंधी देरी (Developmental Delay), बोलने में कठिनाई और हर दिन व रात में बार-बार मिर्गी के दौरों से त्रस्त था। भारी दवाओं के बाद भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं था। डॉक्टरों की टीम ने जनरल एनेस्थीसिया देकर बच्चे के शरीर में स्पेश्यलाइज़्ड नर्व-स्टिमुलेशन इंप्लांट (VNS) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस आधुनिक इलाज के बाद से मासूम को एक भी दौरा नहीं पड़ा है और वह अब सामान्य बच्चों की तरह रोजमर्रा की गतिविधियों और स्कूल से जुड़ पा रहा है।
मामला २: ५ वर्षीय बेबी शाख्लो कुवांदिकोवा (अचानक बेहोश होने की समस्या खत्म)
पांच साल की शाख्लो को बार-बार कुछ पलों के लिए ब्लैकआउट (अचानक आंखों के सामने अंधेरा छाना) होने, शून्य में ताकने और हाइपरएक्टिविटी जैसी गंभीर मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। इस वजह से उसकी सुरक्षा और बचपन पूरी तरह दांव पर था। फोर्टिस मानेसर में नर्व-स्टिमुलेटिंग इंप्लांट प्रक्रिया के बाद अब उसके दौरों की फ्रीक्वेंसी लगभग समाप्त हो गई है और वह पूरी तरह सुरक्षित होकर अपना बचपन जी रही है।
मामला ३: ११ वर्षीय इब्रोहिमजोन पारदाबाएव (४ घंटे चली जटिल ब्रेन सर्जरी)
इब्रोहिमजोन का बायां हिस्सा जन्म से ही कमजोर था और समय के साथ उसे मिर्गी के अनियंत्रित दौरे पड़ने लगे। इससे उसके जीवन की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई थी। मेडिकल टीम ने लगातार ४ घंटे तक चली एक अत्यंत जटिल स्पेश्यलाइज़्ड माइक्रोसर्जिकल ब्रेन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने उसकी एंटी-एपिलेप्टिक दवाओं को तीन से घटाकर केवल एक कर दिया है। अब उसके बोलने और हाथों के मूवमेंट में जादुई सुधार देखा जा रहा है।
डॉ. निशांत याग्निक (सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोसर्जरी) ने कहा:
“बच्चों में ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी के लिए बहुत बारीक जांच-पड़ताल की जरूरत होती है। हमने प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत मेडिकल आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए नर्व स्टिमुलेशन और माइक्रोस्कोपिक ब्रेन सर्जरी का इस्तेमाल किया। हमारा लक्ष्य बच्चों में मिर्गी पर नियंत्रण को नाममात्र या न के बराबर दवाओं से हासिल करना है।”
डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल (एसोसिएट कंसल्टेंट, न्यूरोसर्जरी) ने साझा किया:
“बार-बार पड़ने वाले दौरे बच्चों के मानसिक विकास, नींद, संचार और शिक्षा को रोक देते हैं। वेगस नर्व स्टिमुलेशन थेरेपी (VNS) और एडवांस एपिलेप्सी सर्जरी उन बच्चों के लिए वरदान है जिन पर दवाएं काम नहीं करतीं।”
श्री इंद्रजीत कुमार सिंह (फैसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पिटल मानेसर) ने कहा:
“ये मामले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। हमने एडवांस न्यूरोमॉड्यूलेशन तकनीकों का मेल प्रिसीजन माइक्रोसर्जरी के साथ करवाकर इन युवा मरीजों के लिए इलाज के नए रास्ते खोले हैं।”

यह भी पढ़ें